सरधना यूपी विधानसभा की वो सीट, जहां पर देश का सबसे मशहूर चर्च है. नाम है सेंटजोसेफ़. ये चर्च बेगम समरू ने बनवाया था. ये इलाका सूत का बड़ा उत्पादक रहा है. कईतरह के बाग़ देखने को मिल जाएंगे. यहां का शिवमंदिर भी अपने आप में एक पहचान है.लेकिन इस सीट की पहचान अब संगीत सोम के नाम से होती है. वही संगीत सोम, जोमुजफ्फरनगर दंगों से बदनाम होकर राजनीति में मशहूर हो गए. यहां बीजेपी या सपावर्चस्व की बात नहीं है. लोगों के मुताबिक यहां दो नेता जो सबसे आगे माने जाते हैंवो संगीत सोम और अतुल प्रधान हैं.रिपोर्ट को समझना है तो आंकड़े जान लेने चाहिएटोटल वोट- तीन लाख 27 हज़ार 619 पुरुष वोट- एक लाख 80 हज़ार 895 महिला वोट- एक लाख 46हज़ार 678सरधना सीट से भाजपा के उम्मीदवार संगीत सिंह सोम हैं. मौजूदा विधायक हैं. 2012 में12274 वोटों से रालोद के कैंडिडेट हाजी याकूब कुरैशी को हराया था. सपा तीसरे नंबरपर रही थी. ये मेरठ जिले में आती है. लेकिन लोकसभा मुजफ्फरनगर लगती है. 2007 मेंहुए चुनाव में बसपा के चंद्रवीर सिंह ने लोकदल की तबस्सुम बेगम को हराया था. वो भीतकरीबन 9 हज़ार वोटों से. उससे पहले लगातार तीन बार ये सीट बीजेपी के पास रही है.यानी 93 से लेकर साल 2002 तक. इस सीट पर समाजवादी पार्टी के जीतने की बात तो दूरकभी दूसरे नंबर पर भी नहीं रही है. लेकिन इस बार सीट संगीत सोम को टक्कर देती नज़र आरही है.बीजेपी कैंडिडेटसंगीत सोम. मौजूदा विधायक हैं. मुजफ्फरनगर दंगे के आरोपी हैं. भड़काऊ भाषण के लिएबार बार चर्चा में बने रहे हैं. वोटों का ध्रुवीकरण करने में माहिर माने जाते हैं.2009 में सपा के टिकट पर मुजफ्फरनगर से लोकसभा चुनाव लड़ा था. जीत नहीं पाए. पालाबदला और भाजपा में आ गए. 2012 में सरधना सीट से टिकट मिला. और जीत गए. इस सीट परकरीब 24 गांव ठाकुर बाहुल्य हैं, जिनमें उनकी खास पैठ बताई जाती है. इस बार भी जीतके करीब माने जाते हैं.सपा कैंडिडेटसपा ने यहां से अतुल प्रधान को चुनावी मैदान में उतारा है. पिछली बार सपा के टिकटसे चुनाव लड़े थे. तीसरे नंबर पर रहे. लेकिन इस बार स्थिति मज़बूत है. सपा छात्र सभाके प्रदेशाध्यक्ष रह चुके हैं. पहले अतुल को ही प्रत्याशी बनाया गया था. मगर सपामें बाप बेटे का झगड़ा हुआ और उनका टिकट काट दिया गया. शिवपाल ने जो लिस्ट जारी कीउसमें पिंटू राणा को उम्मीदवार बना दिया गया था.source facebookबाद में अखिलेश की जीत हुई और फिर अतुल प्रधान को ही टिकट मिल गया. क्योंकि युवाचेहरा हैं और अखिलेश यादव के करीबी माने जाते हैं. पिंटू राणा के समर्थक अतुल केलिए परेशानी खड़ी कर सकते हैं. क्योंकि उनका टिकट कैंसिल होने से नाराज़ हैं. अगरअतुल प्रधान को सपा से टिकट नहीं मिलता तो ये चर्चा आम थी कि वो निर्दलीय लड़ जाते.जब अतुल का टिकट काट दिया गया था तो शिवपाल यादव पर उन्होंने एक महत्वाकांक्षी औरलालची आदमी होने का आरोप लगाया था.बसपा कैंडिडेटहाफिज़ मोहम्मद इमरान. हाजी याकूब कुरैशी के बेटे हैं. और इस बार बसपा ने उन्हेंअपना उम्मीदवार बनाया है. हाजी याकूब कुरैशी ये वही हैं जो पिछली बार संगीत सोम सेहार गए. लेकिन तब ये रालोद में थे. जिसका कांग्रेस से गठबंधन था. इमरान पहली बारचुनाव में हैं, लेकिन पिछली बार अपने पिता के लिए प्रचार किया था. याकूब कुरैशी खुदबीएसपी के टिकट पर मेरठ (दक्षिण) से चुनाव लड़ रहे हैं. ये वही कुरैशी हैंजिन्होंने शर्ली आब्दो पर हुए हमले को सही ठहराया था और मोहम्मद साहब का कार्टूनबनाने वाले पर 51 करोड़ रुपये के इनाम की घोषणा की थी.source facebookरालोद कैंडिडेटवकील चौधरी को टिकट दिया है. पार्टी में ये नए नवेले नेता हैं. बसपा छोड़कर आए हैं.इनके आने से पहले तक पार्टी के मज़बूत और आस्था वाले युवा नेता एनुद्दीन शाह को टिकटमिलने की उम्मीद थी. पिछली बार रालोद का कैंडिडेट दूसरे नंबर पर रहा था, लेकिन इसबार की स्थिति और भी कमज़ोर दिखाई पड़ती है. इस बार हुआ ये है कि जो पिछली बार रालोदका था वो बसपा में चला गया. और बसपा से आये इस नेता को रालोद ने टिकट थमा दिया.source facebookरावण का चेहरा बनाना पड़ गया महंगामुजफ्फरनगर में दंगे हुए. संगीत सोम पर दंगे भड़काने का आरोप लगा. इसका असर इसविधानसभा में खूब दिखा. जब उनपर आरोप लगे तो उनको गिरफ्तार कर लिया गया. रासुकालगाया गया. इसके खिलाफ सरधना के खेड़ा गांव में महापंचायत हुई और तकरीबन 20 हज़ार लोगपहुंचे. इस महापंचायत पर पुलिस ने रोक लगायी थी. लेकिन लोग नहीं माने. और पुलिस सेही भिड़ंत हो गई थी. इस बवाल में तीन लोगों की मौत हुई थी.तब से ये इलाका इतना संवेदनशील हो गया कि कहीं कुछ हुआ, फौरन पुलिस ने एक्शन लेनाशुरू कर दिया. अभी पिछले साल अक्टूबर की बात है. सरधना के लश्करगंज के रहने वालेमुदस्सिर राणा एक पब्लिक स्कूल में प्रिंसिपल हैं. उन्होंने फेसबुक पेज पर पीएममोदी की एक फोटो डाल दी. उस फोटो में पीएम को रावण के रूप में दिखाया था और रावण केचेहरों की जगह बीजेपी नेताओं के चेहरे लगाये गए थे. इसके खिलाफ किसी ने शिकायत कीऔर एफआईआर दर्ज हो गई. पुलिस ने माहौल बिगाड़ने के इल्ज़ाम में गिरफ्तार कर लिया औरजेल भेज दिया. ये संवेदनशीलता को ही बयान करता है. नहीं तो कितना फोटोशॉप किया जाताहै और कोई किसी के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लेता.क्या है इस बार सियासी चालसंगीत सोम पिछली बार इसलिए जीते, क्योंकि ध्रुवीकरण हुआ. और हाजी याकूब दूसरे नंबरपर रहे. लेकिन इस बार सियासी चाल बदली हुई है. इस बार हाजी याकूब कुरैशी बसपा मेंचले गए हैं, जोकि पिछली बार रालोद की तरफ से दूसरे नंबर पर रहे थे. क्योंकिकांग्रेस से समर्थन था. और मुस्लिम का वोट मिला. इस बार उनका बेटा बसपा से चुनावलड़ेगा. तीसरे नंबर पर रहे अतुल सपा के उम्मीदवार हैं. और वो इसलिए मज़बूत हो जातेहैं कि इमरान दलबदलू हैं और इस बार कांग्रेस से गठबंधन है. .संगीत सोम के लिए मुश्किल ये है कि इस बार ध्रुवीकरण होता नजर नहीं आ रहा. दूसराउन्हें तगड़ी सुरक्षा मिली हुई है. इससे वहां के लोग ये मानते हैं कि इस वजह से वोआसानी से अपने विधायक से मिल नहीं पाते. जो नाराज़गी की वजह बनता है. अगर दलित औरमुस्लिम वोट एक प्लेटफ़ॉर्म पर आता है तो बीजेपी मज़बूत होती है. क्योंकि बसपा सेपिछली बार चंद्रवीर सिंह चौथे नंबर पर रहे थे. और जो इस बार मुस्लिम कैंडिडेट हैउनके पिता दूसरे नंबर पर वो भी महज़ थोड़े से ही अंतर पर. अगर ये दोनों फैक्टर जुड़तेहैं तो बसपा कहीं मज़बूत नजर आ रही है. लेकिन अतुल प्रधान को भी नकारा जा सकता.क्योंकि इसबार वो अखिलेश के करीबी बनकर उभरे हैं. युवा हैं. अगर सपा और कांग्रेसमुस्लिम वोट को लुभाने में कामयाब हो जाती हैं तो अतुल मज़बूत हो जाएंगे. अगर बसपादलित के साथ मुस्लिम वोट समेट लेती है तो इमरान कुरैशी मज़बूत. और अगर ध्रुवीकरणजैसा कुछ होता है तो संगीत सोम की जीत पक्की है. लेकिन ध्रुवीकरण इस बार नजर नहींआता. मामला एकदम त्रिकोणीय है. रालोद बाहर ही नजर आती है.जातियों का खेलसवा तीन लाख वोटरों वाली इस सीट पर मुस्लिम सबसे ज्यादा हैं. एक लाख के करीब. इसकेबाद दलित 50 हजार, ठाकुर 45 हजार, गुर्जर 35 हजार, जाट 25 हजार, सैनी 25 हजार.बागपत से रिपोर्ट देखिएhttps://www.youtube.com/watch?v=jp4jh35HjqIलल्लनटॉप स्पेशलhttps://www.youtube.com/watch?v=VWIxUBCT9sohttps://www.youtube.com/watch?v=qk0alksFn7o&feature=youtu.be-------------------------------------------------------------------------------- ये भी पढ़ेंबागपत से ग्राउंड रिपोर्ट : यहां विधायक बनते हैं, सड़क नहीं बनतीबुलंदशहर से ग्राउंड रिपोर्ट: ‘अखिलेश ने काम तो किया, मगर वोट हाजी को ही जाएगा’दी लल्लनटॉप की यूपी चुनाव यात्रा हीरा-मोती की जोड़ी के साथ शुरू