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मुरादाबाद सीट पर सपा की फजीहत के पीछे आजम खान? एसटी हसन की जगह कैसे आया रुचि वीरा का नाम?

रुचि वीरा के नामांकन के बाद एसटी हसन ने खुद कह दिया कि वे अपना पर्चा वापस लेंगे.

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Akhilesh Yadav Azam khan
22 मार्च को अखिलेश ने आजम खान से जेल में मुलाकात की थी. (फाइल फोटो)
27 मार्च 2024 (Updated: 27 मार्च 2024, 22:33 IST)
Updated: 27 मार्च 2024 22:33 IST
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उत्तर प्रदेश की मुरादाबाद लोकसभा सीट के टिकट बंटवारे को लेकर समाजवादी पार्टी को फजीहत झेलनी पड़ी है. मुरादाबाद के मौजूदा सांसद एसटी हसन को सपा ने फिर से टिकट दिया था. लेकिन बाद में उन्हें नाम वापस लेना पड़ा, वो भी तब जबकि वो नामांकन दाखिल कर चुके थे. उनकी जगह उम्मीदवार बनाया गया सपा की पूर्व विधायक रुचि वीरा को. कहा जा रहा है कि इस पूरे खेल के सूत्रधार रहे जेल में बंद आजम खान. चर्चा है कि उन्हीं के दबाव के बाद सपा ने रुचि वीरा को उम्मीदवार बनाया है. 27 मार्च को रुचि ने नामांकन भी दाखिल कर दिया. इसके साथ ही एसटी हसन की उम्मीदवारी रद्द कर दी गई.

बीती 24 मार्च को समाजवादी पार्टी ने बतौर लोकसभा उम्मीदवार एसटी हसन के नाम का एलान किया था. इसके बाद से ही पार्टी खेमों में बंट गई थी. आजम खान के समर्थकों ने विरोध करना शुरू कर दिया था. कहा गया आजम खुद भी इससे खुश नहीं थे. हसन की उम्मीदवारी की घोषणा तब हुई, जब 22 मार्च को अखिलेश यादव ने सीतापुर जेल में आजम खान से मुलाकात की थी. खबरें आई थीं कि ये मुलाकात रामपुर और दूसरी सीटों पर उम्मीदवारों पर चर्चा को लेकर ही हुई थी.

अब एसटी हसन के टिकट काटे जाने के बाद समाजवादी पार्टी का भी एक धड़ा आजम खान के विरोध में उतर आया है. हालांकि रुचि वीरा के नामांकन के बाद एसटी हसन ने खुद कह दिया कि वे अपना पर्चा वापस लेंगे. आजतक से बातचीत में उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव ही बेहतर बता पाएंगे कि उनका टिकट क्यों काटा गया है. हसन ने कहा,

"अखिलेश यादव पार्टी के नेता हैं, वे जिसको चाहें लड़ाएं, जिसको चाहें ना लड़ाएं. टिकट होना या ना होना एसटी हसन की शख्सियत को खत्म नहीं कर सकता है. हमारी जो विचारधारा है, वो मुलायम सिंह यादव की थी और अखिलेश यादव की है, हम उसी के साथ हैं."

एसटी हसन ने आगे ये भी कहा कि वे मुस्लिम वर्ग से आते हैं. उनके मुताबिक, आज की तारीख में मुसलमान 70 सालों में सबसे ज्यादा दुखी हैं.

2019 लोकसभा चुनाव में एसटी हसन को 50 फीसदी से ज्यादा वोट मिले थे. उन्होंने बीजेपी के कुंवर सर्वेश कुमार को हराया था. कांग्रेस के इमरान प्रतापगढ़ी को सिर्फ 59 हजार वोट मिले थे.

आजम खान की बात कैसे मानी गई?

आजतक से जुड़े कुमार अभिषेक की रिपोर्ट के मुताबिक, आजम खान ने एक दिन पहले अखिलेश यादव को चिट्ठी भी लिखी थी. उन्होंने कहा था कि समाजवादी पार्टी को बनाने और संवारने में उनका भी रोल है. रिपोर्ट के मुताबिक आजम ने आरोप लगाया कि अखिलेश सिर्फ अपने और अपने परिवार की सीटों को ही जीतना चाहते हैं. जबकि रामपुर और मुरादाबाद सीट पर उनका ध्यान नहीं है. इन दोनों सीट पर पार्टी लंबे समय से आजम खान की राय लेती आई है.

रिपोर्ट बताती है कि आजम खान ने अखिलेश को रामपुर से चुनाव लड़ने को कहा था. उनको पता था कि अखिलेश चुनाव नहीं लड़ेंगे. और वे दबाव बनाकर रामपुर और मुरादाबाद में अपने उम्मीदवार खड़े कर लेंगे. लेकिन अखिलेश ने जेल में मुलाकात के बाद एसटी हसन की उम्मीदवारी का एलान कर दिया. जबकि आजम खान और हसन के बीच छत्तीस का आंकड़ा माना जाता है.

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एसटी हसन कभी आजम खान के खास हुआ करते थे. कहा जाता है कि मुरादाबाद के मेयर रहते हुए उन्हें आजम खान ने ही लोकसभा का टिकट दिलवाया था. लेकिन आजम के जेल जाने के बाद हसन अखिलेश यादव के करीब आ गए. हसन पार्टी का मुस्लिम चेहरा भी बन गए हैं. अखिलेश यादव ने उन्हें लोकसभा में पार्टी के संसदीय दल का नेता भी बना दिया था. बताया गया कि इससे भी आजम खान नाराज थे.

हसन की उम्मीदवारी के बाद आजम खान के समर्थकों ने विरोध करना शुरू कर दिया. यहां तक कि चुनाव का बहिष्कार करने की भी धमकी दी गई. आजम खान ने कथित तौर पर रुचि वीरा को उम्मीदवार बनाने पर जोर दिया. वो आजम खान की करीबी मानी जाती हैं.

रामपुर सीट पर भी मारामारी

रामपुर लोकसभा सीट पर भी पार्टी का कैंडिडेट फाइनल नहीं हो सका. सीट सपा के लिए अहम है क्योंकि उनके लिए मजबूत सीट है. 2004 और 2009 में यहां से सपा के टिकट पर जया प्रदा जीती थीं. 2014 में बीजेपी जीती. लेकिन 2019 में फिर सपा से आज़म खान सांसद बने. साल 2022 में आजम की सांसदी जाने के बाद उपचुनाव हुए. तब ये सीट बीजेपी के पल्ले आ गई.

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अब आजम खान के गढ़ में काफी जद्दोजहद के बाद सपा ने उम्मीदवार बनाया है मौलाना मोहिबुल्लाह नदवी को. नदवी, दिल्ली पार्लियामेंट स्ट्रीट जामा मस्जिद के इमाम हैं. मूल रूप से रामपुर के ही रहने वाले हैं. उन्होंने नॉमिनेशन फाइल कर दिया है. लेकिन रामपुर जिला ईकाई में आजम खान समर्थकों ने चुनाव बहिष्कार की धमकी दे दी है. उनकी मांग है कि अखिलेश यादव रामपुर से चुनाव लड़ें. 

इस बीच खबरें आईं हैं कि रामपुर में सपा नेता आसिम रजा ने भी नामांकन पत्र खरीदा है. आसिम ने 2022 लोकसभा उपचुनाव में सपा के टिकट पर चुनाव लड़ा था. अब उनके इस कदम से भी पार्टी की टेंशन बढ़ गई है. अब बताया जा रहा है कि शिवपाल यादव खुद सीतापुर जाकर पार्टी नेताओं से बात करेंगे.

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