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विदेशी निवेशकों को भारत में विश्वास नहीं? शेयर बाजार से 2.25 लाख करोड़ रुपये निकाले

ताइवान और दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार भी अब भारत के शेयर बाजार को पीछे छोड़ चुके हैं. इन देशों में एआई और चिप पर काफी निवेश हो रहा है.

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3 जून 2026 (पब्लिश्ड: 08:54 PM IST)
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दुनियाभर के निवेशक AI कंपनियों के शेयरों में दांव लगा रहे हैं (फोटो क्रेडिट: Business Today)
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विदेशी निवेशकों का भारतीय शेयर बाजार में निवेश दस साल के निचले स्तर पर आ गया है. न्यूज एजेंसी ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट में बताया गया है कि नेशनल सिक्योरिटीज डिपॉजिटरी लिमिटेड (NSDL) के आंकड़ों के मुताबिक 1 जून तक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) का भारत के शेयर बाजार में कुल शुद्ध निवेश करीब 7.3 लाख करोड़ था. यह साल 2016 के बाद से सबसे कम है.

ऐसे में बड़ा सवाल ये है कि भारतीय शेयर बाजार के प्रति क्या विदेशी निवेशकों का भरोसा घट रहा है?

AI और चिप कंपनियों में निवेश बढ़ा रहे विदेशी निवेशक

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान युद्ध की वजह से भारत को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है. तेल के दाम उछलने से भारत की इकोनॉमी पर दबाव बढ़ सकता है. दुनियाभर के निवेशक अब उन देशों की कंपनियों के शेयरों में पैसा लगा रहे हैं जहां पर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (AI) से जुड़े बुनियादी ढांचे पर खूब पैसा खर्च किया जा रहा है. 

इसी का नतीजा है कि ताइवान और दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार भी अब भारत के शेयर बाजार को पीछे छोड़ चुके हैं. इन देशों में एआई और चिप पर काफी निवेश हो रहा है.

ब्रोकेरज फर्म ‘जियोजित इन्वेस्टमेंट’ के चीफ स्ट्रैटजिस्ट वीके विजयकुमार का मानना है कि भारतीय कंपनियों का मुनाफा उभरते बाजारों की कंपनियों की तुलना में कम रहा है. इस वजह से विदेशी निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकालकर उन देशों में पैसा निवेश कर रहे हैं जहां उन्हें लगता है कि कमाई ज्यादा हो सकती है. इन देशों में सबसे आगे ताइवान और दक्षिण कोरिया के बाजार शामिल हैं.

ये भी पढ़ें: शेयर बाजार के मामले में साउथ कोरिया ने भी भारत को पछाड़ा, आखिर दिक्कत कहां है?

रुपये में गिरावट से विदेशी निवेशकों को नुकसान 

वहीं, निवेश सलाहकार विनोद रावल लल्लनटॉप से बातचीत में कहते हैं, “अमेरिका में बॉन्ड पर बेहतर रिटर्न मिल रहा है. इस वजह से विदेशी निवेशक भारत से पैसा निकालकर अमेरिकी बाजार में निवेश बढ़ा रहे हैं. इसके अलावा डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट ने भी विदेशी निवेशकों को भारत के शेयर बाजार से पैसा निकालने में काफी अहम भूमिका निभाई है.”

दरअसल विदेशी निवेशक जब शेयर बेचते हैं तो रुपये डॉलर में बदलना पड़ता है. इसलिए अगर रुपया जितना कमजोर होगा उनका नुकसान उतना बढ़ता जाएगा. विदेशी निवेशक डॉलर लेकर भारत में आते हैं लेकिन उनको निवेश रुपये में करना पड़ता है.

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मनीकंट्रोल की एक खबर के मुताबिक ईरान युद्ध शुरू होने के बाद भारत के शेयर मार्केट से विदेशी निवेशकों ने ताबड़तोड़ पैसा निकाला. युद्ध शुरू होने के बाद से 16 दिन में (26 फरवरी से 20 मार्च के बीच) विदेशी निवेशकों ने करीब एक लाख करोड़ रुपये भारतीय शेयर बाजार से निकाले. 

रिपोर्ट में कहा गया है कि इन 16 दिनों में विदेशी निवेशकों ने भारत के शेयर बाजार से हर घंटे 1000 करोड़ रुपये निकाले. NSDL के आंकड़े बताते हैं कि इस साल अब तक विदेशी निवेशक भारतीय शेयर मार्केट से करीब 2.25 लाख करोड़ रुपये निकाल चुके हैं. 

ताजा आंकड़ों की बात करें तो विदेशी निवेशकों ने मई महीने में भी बिकवाली जारी रखी और इस महीने इन्होंने करीब 32 हजार 963 करोड़ रुपये निकाले हैं. 

अविनाश मेंटर रिसर्च के फाउंडर और रिसर्च हेड अविनाश गोरक्षकर लल्लनटॉप से कहते हैं कि विदेशी निवेशकों को लगता है कि आने वाले समय में भारत के शेयर बाजार में कम रिटर्न रह सकता है. इस वजह से विदेशी निवेशक भारत के शेयर बाजार से पैसा निकाल रहे हैं. निवेशकों को लगता है कि भारत में तेल के दाम बढ़ने से महंगाई भड़केगी और ब्याज दरें भी ऊंची रह सकती हैं.  

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