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10 साल के इंतजार के बाद आ रहा है NSE IPO, 10 प्वाइंट में जानिए इसकी खास बातें

NSE IPO News: 10 साल के लंबे इंतजार के बाद देश का सबसे बड़ा IPO लॉन्च होने वाला है. एनएसई आईपीओ से पहले हुंडई मोटर इंडिया का आईपीओ साल 2024 में अब तक सबसे बड़ा आईपीओ लॉन्च था.

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18 जून 2026 (पब्लिश्ड: 02:21 PM IST)
NSE IPO
इस IPO से NSE 30 हजार करोड़ रुपये जुटा सकता है (फोटो क्रेडिट: Business Today)
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नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने अपने बहुप्रतीक्षित इनीशियल पब्लिक ऑफर (IPO) के लिए बाजार नियामक सेबी के समक्ष अपना ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (डीआरएचपी) दाखिल कर दिया है. यह भारत के आईपीओ बाजार में आने वाला सबसे बड़ा इनीशियल पब्लिक ऑफर है. अनलिस्टेड मार्केट में नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की वैल्यूएशन लगभग 5 लाख करोड़ रुपये है.

इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट में बाजार की स्थिति के हिसाब से अनुमान लगाया गया है कि इस आईपीओ का आकार लगभग 30,000 करोड़ रुपये हो सकता है. इस तरह से यह भारत के सबसे बड़े आईपीओ में से एक बन जाएगा. 

इससे पहले हुंडई मोटर इंडिया का आईपीओ साल 2024 में अब तक सबसे बड़ा आईपीओ लॉन्च था. इस आईपीओ के जरिये कंपनी ने निवेशकों से करीब 28 हजार करोड़ रुपये जुटाए थे. आइए जानते हैं कि NSE IPO की 10 खास बातें क्या हैं?

एक्सचेंज के कितने शेयर बिक्री के लिए रखे गए हैं

यह आईपीओ पूरी तरह से 1 रुपये प्रति शेयर के अंकित मूल्य वाले 14.89 करोड़ इक्विटी शेयरों की बिक्री का प्रस्ताव (OFS) है. यह NSE की पेड इक्विटी कैपिटल का लगभग 6% है. इश्यू का साइज एक्सचेंज की चुकता पूंजी का 6% तय किया गया है.

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NSE Share कहां लिस्टेड होंगे? 

एनएसई के शेयर बीएसई (BSE) पर लिस्टेड होंगे. यह उस व्यवस्था के मुताबिक है जिसके तहत बीएसई के अपने शेयर एनएसई पर सूचीबद्ध हैं.

एनएसई की वैल्यूएशन कितनी है?

ब्रोकरेज फर्म बोनान्जा के रिसर्च एनालिस्ट नितांत दारेकर के मुताबिक गैर-सूचीबद्ध बाज़ार में NSE का वैल्यूएशन अभी भी प्रीमियम पर बना हुआ है. दारेकर ने कहा कि NSE एक इक्विटी कम इन्वेस्टमेंट वाली लगभग एकाधिकार कंपनी है. गैर-सूचीबद्ध बाजार में इसका मूल्य लगभग 1,950-2,170 रुपये है जो वित्त वर्ष 2026 की कमाई के लगभग 45 गुना के बराबर है.

7 सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां हिस्सेदारी बेचेंगी 

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI), बैंक ऑफ बड़ौदा, स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन, GIC, न्यू इंडिया एश्योरेंस, नेशनल इंश्योरेंस कंपनी और यूनाइटेड इंश्योरेंस कंपनी सहित 7 सार्वजनिक क्षेत्र की संस्थाएं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) में अपनी कुछ हिस्सेदारी बेचने की तैयारी में है. 

यह एक्सचेंज के बहुप्रतीक्षित इनीशियल पब्लिक ऑफर (आईपीओ) के माध्यम से किया जाएगा. बाजार नियामक सेबी के पास दायर एनएसई के कागज-पत्तर के मुताबिक सात सरकारी स्वामित्व वाली संस्थाओं के पास मिलकर लगभग 7.97 करोड़ शेयर हैं.

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LIC और अन्य कंपनियों ने हिस्सेदारी बरकरार रखी

नेशनल स्टॉक मार्केट (एनएसई) के प्रमुख शेयरधारकों में से एक, भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी), शेयर बिक्री में हिस्सा नहीं लेगी.एनएसई की तरफ से पेश दस्तावेजों के अनुसार, प्रेमजी इन्वेस्ट जिसके पास 2.35% हिस्सेदारी है और निवेशक राधाकिशन दमानी जिनके पास 1.58% हिस्सेदारी है भी कोई शेयर नहीं बेच रहे हैं.

NSE IPO की डिटेल्स

नेशनल स्टॉक मार्केट का ऑपरेटिंग रेवेन्यू वित्त वर्ष 2024 के 14,780 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2026 में 16,601 करोड़ रुपये हो गया है. इसी अवधि में शुद्ध लाभ 8,305 करोड़ रुपये से बढ़कर 10,302 करोड़ रुपये हो गया.

हालांकि, टैक्स के बाद लाभ में पिछले साल की तुलना में 15% की गिरावट आई है, जो वित्त वर्ष 2025 के 12,188 करोड़ रुपये से घटकर वित्त वर्ष 2026 में 10,302 करोड़ रुपये हो गया है. 

दुनिया का सबसे बड़ा डेरिवेटिव एक्सचेंज

वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ एक्सचेंजेस के अनुसार एनएसई ने वित्त वर्ष 2026 के दौरान करी 3700 करोड़ कांट्रैक्ट ट्रेड हुए . इसके साथ ही इसने दुनिया के सबसे बड़े इक्विटी डेरिवेटिव एक्सचेंज के रूप में अपना स्थान बरकरार रखा है. इसमें एनएसई इंटरनेशनल एक्सचेंज पर होने वाली गतिविधियां भी शामिल हैं. 

वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ एक्सचेंजेस के मुताबिक, 31 मार्च, 2026 तक कुल कैश मार्केट ट्रेडिंग के मामले में यह एक्सचेंज भारत में सबसे बड़ा और नकद इक्विटी ट्रेडों की संख्या के मामले में विश्व स्तर पर तीसरा सबसे बड़ा एक्सचेंज था.

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तकनीक के मामले में भी काफी मजबूत

मार्च 2026 तक एनएसई के तकनीकी बुनियादी ढांचे ने औसतन रोजाना 1200-1400 करोड़ संदेशों को प्रोसेस किया है. इसके ट्रेडिंग  इकोसिस्टम के विशाल आकार को दर्शाता है. एनएसई ने पहली बार साल 2016 में आईपीओ के लिए कागज-पत्तर जमा किये थे लेकिन कंपनी को मंजूरी नहीं मिली थी. उस समय एनएसई अपने इश्यू के जरिये बाजार से 10,000 करोड़ रुपये जुटानाा चाहती थी.

खूब बांटा डिवीडेंड

कैश मार्केट टर्नओवर, इक्विटी डेरिवेटिव्स टर्नओवर और एक्सचेंज-ट्रेडेड करेंसी डेरिवेटिव्स टर्नओवर के मामले में एनएसई भारत का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज है. एनएसई की मजबूत और निरंतर कैश जनरेशन उसके शेयरधारकों को किए जाने वाले भुगतान में  में झलकती है. एक्सचेंज ने वित्त वर्ष 2025 और 2026 दोनों में प्रति शेयर 35 रुपये का लाभांश दिया. 

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