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IT कंपनियों के शेयर 52 हफ्तों में सबसे नीचे, निवेश का सुनहरा मौका या दूरी भली?

17 मार्च को विप्रो, इंफोसिस से लेकर कई बड़ी कंपनियों के शेयर 52 हफ्तों के निचले स्तर पर आ गए. इस दिन इंफोसिस का शेयर 1,215 रुपये, टीसीएस का शेयर 2,360 रुपये और एचसीएल टेक्नोलॉजीज के शेयर का दाम 1,298 रुपये से नीचे चला गया. इसी तरह से कोफोर्ज का शेयर गिरकर 1,008 रुपये और एमफैसिस का 2,030.50 रुपये पर आ गया.

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IT stocks crash
इस साल दिग्गज आईटी कंपनियों के शेयर करीब 30 परसेंट तक गिरे हैं. (फोटो क्रेडिट: Business Today)
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प्रदीप यादव
19 मार्च 2026 (पब्लिश्ड: 04:21 PM IST)
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पिछले कुछ दिनों से आईटी शेयरों में उठापटक देखने को मिली है. इससे पहले फरवरी में आईटी कंपनियों के शेयर औंधे मुंह गिरे थे. द हिंदू बिजनेस लाइन की एक खबर बताती है कि 17 मार्च को निफ्टी आईटी के कई शेयरों ने 52 हफ्तों का निचला स्तर छू लिया. इस गिरावट के पीछे वैसे तो कई कारण हैं, लेकिन एआई यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस सबसे बड़ी वजह बताई जा रही है.

इन आईटी कंपनियों के शेयर नीचे

बिजनेस लाइन की रिपोर्ट में बताया गया है कि 17 मार्च को विप्रो, इंफोसिस से लेकर कई बड़ी कंपनियों के शेयर 52 हफ्तों के निचले स्तर पर आ गए. इस दिन इंफोसिस का शेयर 1,215 रुपये, टीसीएस का शेयर 2,360 रुपये और एचसीएल टेक्नोलॉजीज के शेयर का दाम 1,298 रुपये से नीचे चला गया. इसी तरह से कोफोर्ज का शेयर गिरकर 1,008 रुपये और एमफैसिस का 2,030.50 रुपये पर आ गया.

इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक 18 मार्च को इंफोसिस, टीसीएस और एचसीएल टेक जैसी आईटी कंपनियों के शेयरों में 4% तक की तेजी आई. वहीं 19 मार्च को जैसे ही बाजार गिरावट के साथ खुले तो आईटी शेयर फिर से लाल निशान पर दिखे. गुरुवार को शुरुआती कारोबार में इंफोसिस का शेयर करीब 3 परसेंट की गिरावट के साथ 1231 रुपये पर कारोबार कर रहा था. टीसीएस का शेयर करीब ढाई परसेंट गिरकर 2378 रुपये के आसपास था. इसी तरह विप्रो के शेयर करीब ढाई परसेंट की गिरावट के साथ 189 रुपये पर कारोबार कर रहे थे.

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निफ्टी आईटी इंडेक्स 24% गिरा

आईटी शेयरों में यह गिरावट इस साल फरवरी में दलाल स्ट्रीट पर तब शुरू हुई जब एआई स्टार्टअप एंथ्रोपिक ने अपने क्लाउड कोवर्क एजेंट के लिए प्लग-इन लॉन्च किए. यह कानूनी, सेल्स एंड मार्केटिंग और डेटा विश्लेषण से जुड़े कामों को ऑटोमैटिक करने में सक्षम हैं. इकोनॉमिक टाइम्स की पत्रकार देबारोती अधिकारी की एक रिपोर्ट में बताया गया है कि निफ्टी आईटी इंडेक्स इस साल अब तक 24% से अधिक गिर चुका है. इस दौरान दिग्गज आईटी कंपनियों मसलन इंफोसिस, टीसीएस और विप्रो के शेयर करीब 30 परसेंट तक गिरे हैं.

ये तो हो गया आईटी शेयरों की हाल के दिनों की चाल, अब समझते हैं कि- 

- इन शेयरों का भविष्य क्या है? 
- आईटी कंपनियों के शेयरों में कब तक बहार आएगी?
- अगर आप अभी निवेश करते हैं, तो कब तक इन शेयरों से फायदा होने की उम्मीद रखें? 

इन सब बातों को बाजार के जानकारों की मदद से समझेंगे. 

CLSA ने इन शेयरों की खरीदारी की सलाह दी

दुनिया की जानी-मानी ब्रोकरेज फर्म सीएलएसए ने प्रमुख आईटी शेयरों पर आउटपरफॉर्म रेटिंग बरकरार रखी है. इसके बाद 18 मार्च को शेयर 4 परसेंट तक उछल गए थे. ब्रोकरेज फर्म ने भारत की टॉप 10 आईटी सेवा कंपनियों जैसे कि टीसीएस, इंफोसिस, एचसीएल टेक, विप्रो, टेक महिंद्रा, एलटीआईमाइंडट्री, कोफोर्ज, परसिस्टेंट, एमफैसिस और हेक्सावेयर को "Buy" रेटिंग दी है. इसका मतलब फर्म को लगता है कि आगे इन कंपनियों के शेयर ऊपर जाएंगे इसलिए निवेशक चाहें तो खरीद सकते हैं.

चॉइस इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज की आईटी एनालिस्ट धनश्री जाधव ने ईटी से कहा कि भारतीय आईटी निवेशकों के बीच यह आशंका गहरी हो गई कि तेज और सस्ते एआई बाजार में आने से भारतीय आईटी कंपनियों की मांग कम हो जाएगी. हालांकि उनका कहना है कि आईटी क्षेत्र में विकास की अपार संभावनाएं हैं. सिस्टम इंटीग्रेटर्स की भूमिका महत्वपूर्ण बनी हुई है और एआई के बढ़ते इस्तेमाल के साथ यह और भी विकसित हो रही है. सिस्टम इंटीग्रेटर्स वे कंपनियां होती हैं जो अलग-अलग टेक्नोलॉजी, सॉफ्टवेयर, हार्डवेयर और प्लेटफॉर्म्स को जोड़कर एक पूरा काम करने वाला सिस्टम तैयार करती हैं. उनका कहना है कि आईटी शेयरों में पिछले कुछ समय से जारी गिरावट निवेशकों के लिए खरीदारी का अच्छा मौका लेकर आई है.

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बाजार के जानकारों की राय क्या है?

ब्रोकरेज फर्म पीएचडी कैपिटल के फाउंडर और सीईओ प्रदीप हल्दर ने लल्लनटॉप से बातचीत में कहा कि आईटी सेक्टर में हालिया 30% की गिरावट के बाद अब निवेशकों के लिए ये सेक्टर काफी दिलचस्प मोड़ पर खड़ा है. आईटी इंडेक्स करीब 28,870 के आसपास ट्रेड कर रहा है, जिससे अच्छी कंपनियों के वैल्यूएशन पहले की तुलना में काफी आकर्षक हो गए हैं. हालांकि फिलहाल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव है और अच्छे संकेतों के बावजूद तुरंत पॉजिटिव रिएक्शन नहीं दिख रहा, लेकिन सेक्टर के भीतर फंडामेंटल बेस बनना शुरू हो चुका है. सरकार और कॉर्पोरेट स्तर पर उठाए गए कदम इस बात के शुरुआती संकेत दे रहे हैं कि आने वाले समय में रिकवरी की नींव तैयार हो रही है.

इस माहौल में निवेशकों के लिए यह समय धीरे-धीरे खरीदारी का है. एक साथ बड़ा निवेश करने से बचें. जैसे ही वैश्विक अनिश्चितताएं कम होंगी. आईटी सेक्टर में मजबूत रिकवरी देखने को मिल सकती है. प्रदीप हल्दर की सलाह है कि आईटी शेयरों में निवेश की शुरुआत बड़ी और भरोसेमंद कंपनियों, जैसे टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS), इंफोसिस से करनी चाहिए क्योंकि इन कंपनियों के शेयर अपेक्षाकृत सस्ते वैल्यूएशन पर ट्रेड कर रहे हैं. इसके बाद आईटी सेक्टर में तेजी लौटने पर मिड-कैप और स्मॉल-कैप आईटी स्टॉक्स में निवेश किया जा सकता है. कुल मिलाकर, संकेत यही है कि IT सेक्टर के लिए आगे का रास्ता आसान नहीं है और निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है.

ब्रोकरेज फर्म नुवामा इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज (Nuvama Institutional Equities) की रिपोर्ट के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-2026 में वैश्विक अर्थव्यवस्था को एक के बाद एक बड़े झटके लगे हैं. टैरिफ में इजाफा होने, टेक्नोलॉजी में तेज बदलाव और तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव जैसे कुछ बड़े झटकों में शामिल हैं. इसके अलावा अब सबसे बड़ा खतरा आईटी कंपनियों की सेवाओं की मांग में अचानक गिरावट को बताया जा रहा है.

रिपोर्ट के अनुसार अमेरिका का लेबर मार्केट कमजोर पड़ रहा है और वहां बैंकों के अलावा लोन देने वाले संस्थान अब पैसे की कमी से जूझ रहे हैं. इस वजह से कंपनियों को कर्ज मिलने में दिक्कतें आ रही हैं. अगर आईटी कंपनियों को भी फंडिंग में दिक्कत होती है तो वे आईटी के मद में होने वाला अपना खर्च घटा सकती हैं. इसका सीधा असर IT कंपनियों और टेक कंपनियों पर पड़ेगा क्योंकि इनकी कमाई काफी हद तक अमेरिकी और यूरोपीय बाजार पर निर्भर है. 

रिपोर्ट में यह भी चेतावनी दी गई है कि इससे न सिर्फ टेक कंपनियों की वैल्यूएशन गिर सकती है, बल्कि AI पर होने वाला खर्च भी धीमा पड़ सकता है. मिंट की खबर में कहा गया है कि महंगी ब्याज दरों के बीच अमेरिकी आईटी खर्च में कमी से पिछले 15 महीनों से भारतीय आईटी क्षेत्र को लेकर नजरिया कमजोर बना हुआ है. यह आगे भी जारी रहने की उम्मीद है.  

इस रिपोर्ट में बताया गया है कि डॉट काम बबल (Dot-com Bubble) की तरह अगर निवेश ज्यादा और रिटर्न कम हुआ, तो सेक्टर की ग्रोथ घट सकती है. डॉट काम बबल में इंटरनेट कंपनियों के शेयरों में हाइप देखने को मिली थी. यह बनावटी तेजी साल 2000 के आसपास अचानक क्रैश हो गई.

(ऊपर दी गईं सलाह एक्सपर्ट्स की निजी है. लल्लनटॉप निवेश की सलाह नहीं देता है . किसी भी तरह के निवेश से जुड़े फैसले करने से पहले सेबी से मान्यता प्राप्त वित्तीय सलााहकारों की मदद जरूर लें )

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