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वेनेजुएला और अमेरिका की लड़ाई में मुकेश अंबानी की रिलायंस की मौज होने वाली है?

अगर वेनेजुएला पर लगे प्रतिबंधों में कुछ ढील मिलती है या पूरी तरह हटा लिए जाते हैं, तो रिलायंस इंडस्ट्रीज और ONGC को फायदा हो सकता है.

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Venezuelan oil
दुनियाभर में जितना तेल है उसमें वेनेजुएला की हिस्सेदारी 18% है (फोटो क्रेडिट: Aaj tak)
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प्रदीप यादव
5 जनवरी 2026 (Updated: 5 जनवरी 2026, 06:44 PM IST)
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अमेरिका और वेनेजुएला की लड़ाई में भारत की दो कंपनियां मलाई काट सकती हैं. इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट में ब्रोकरेज फर्म जेफरीज (Jefferies) के हवाले से लिखा गया है कि अगर अमेरिका की अगुवाई में वेनेजुएला के तेल उद्योग पर कब्जा होता है, तो भारत की रिलायंस इंडस्ट्रीज और ONGC को इसका बड़ा फायदा मिल सकता है. जेफरीज का मानना है कि अगर वेनेजुएला पर लगे प्रतिबंधों में कुछ ढील मिलती है या पूरी तरह हटा लिए जाते हैं, तो इन दोनों भारतीय कंपनियों को फायदा होगा. 

वेनेजुएला में 18% तेल भंडार 

जेफरीज का कहना है कि दुनियाभर में जितना तेल है उसमें वेनेजुएला की हिस्सेदारी 18% है.  लेकिन अभी वेनेजुएला का दुनिया के तेल बाजार में खासा दखल नहीं है.  दुनियाभर में कच्चे तेल की सप्लाई में वेनेजुएला की हिस्सेदारी 1% से भी कम है. वेनेजुएला में कच्चे तेल का उत्पादन अभी 10 लाख बैरल से भी कम है. इसलिए वेनेजुएला के तेल सेक्टर को लेकर चल रही ताजा भू-राजनीतिक हलचल से कच्चे तेल की कीमतों पर तुरंत कोई बड़ा असर पड़ने की संभावना कम है. 

जेफरीज का मानना है कि जैसे ही वेनेजुएला पर लगे प्रतिबंध हटेंगे. अमेरिका की तेल कंपनियां वहां के तेल क्षेत्रों में मोटा पैसा लगाएंगी. इससे 2027–28 तक वेनेजुएला में कच्चे तेल का उत्पादन बढ़ सकता है. अगर OPEC और उसके सहयोगी देश इस बढ़ी हुई सप्लाई के मुकाबले उत्पादन में कटौती नहीं करते, तो इससे तेल की कीमतों में गिरावट देखने को मिलेगी.

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रिलायंस को क्या फायदा होगा?

रिलायंस इंडस्ट्रीज के लिए सबसे बड़ा फायदा यह है कि उसे वेनेजुएला का तेल सस्ती कीमत पर मिल सकता है. वेनेजुएला का कच्चा तेल अलग किस्म का होता है. यह तेल बहुत भारी, कसैला और ज्यादा अम्लीय (Acidic) होता है. दुनिया में बहुत कम रिफाइनरियां ऐसी हैं जो इस तरह के तेल को प्रोसेस कर सकती हैं. रिलायंस का जामनगर रिफाइनरी कॉम्प्लेक्स तकनीकी रूप से इस तेल को प्रोसेस करने में सक्षम है. इसी वजह से वेनेजुएला का कच्चा तेल आमतौर पर ब्रेंट क्रूड से 5 से 8 डॉलर प्रति बैरल सस्ता मिलता रहा है. यह रिलायंस के लिए लागत कम करने और मुनाफा बढ़ाने का बड़ा मौका बन सकता है. 

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रिलायंस इंडस्ट्रीज ने साल 2012 में वेनेजुएला की सरकारी तेल कंपनी PDVSA के साथ एक समझौता किया था. इस समझौते के तहत रिलायंस अपनी रोजाना की कच्चे तेल की जरूरत का करीब 20% तेल वेनेजुएला से खरीदती है. लेकिन साल 2019 में अमेरिका ने वेनेजुएला पर सख्त प्रतिबंध लगा दिए थे. इसके बाद यह डील खत्म हो गई थी. लेकिन अब हालात बदलते दिख रहे हैं. अमेरिका ने संकेत दिए हैं कि वह वेनेजुएला के कच्चे तेल को अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को बेचने की अनुमति दे सकता है. ब्रोकरेज फर्म जेफरीज का मानना है कि अगर ऐसा होता है, तो रिलायंस को फिर से लंबे समय के लिए सस्ता वेनेजुएला क्रूड मिलने का मौका मिल सकता है. इससे रिलायंस की रिफाइनिंग लागत घटेगी, रिफाइनिंग मार्जिन (मुनाफा) बेहतर होगा और कंपनी की कमाई बढ़ेगी.

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ONGC को 'फंसा' पैसा मिल सकता है?

जेफरीज ने ONGC को लेकर कहा है कि कंपनी को एक बड़ा फायदा  कंपनी की बैलेंस शीट में देखने को मिल सकता है. जेफरीज का कहना है कि ONGC को वेनेजुएला के एक तेल ब्लॉक (San Cristobal) से होने वाले उत्पादन पर अपना हिस्सा मिलना चाहिए था, लेकिन अब तक कंपनी को यह पैसा नहीं मिला है. इस वजह से ONGC के बकाया डिविडेंड करीब 4,500 करोड़ रुपये से ज्यादा पहुंच चुका है. अगर अमेरिका की अगुवाई में वेनेजुएला के तेल सेक्टर में सुधार होता है और वहां का सिस्टम ज्यादा पारदर्शी बनता है, तो ONGC को यह लंबे समय से अटका हुआ पैसा वापस मिलने की उम्मीद है. इससे ONGC की बैलेंस शीट मजबूत होगी. 

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