10 साल फंसा रहा पीएम क्लेम, EPFO को हर्जाना भरना पड़ा
चंडीगढ़ स्थित जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने हाल ही में फैसला सुनाया है कि ईपीएफओ किसी कर्मचारी के पुराने पीएफ खाते से नए पीएफ खाते में पैसे ट्रांसफर करने से करीब एक दशक की देरी के लिए सॉफ्टवेयर संबंधी समस्याओं को बहाना नहीं बना सकता

Employees Provident Fund (इंप्लायी प्रॉविडेंट फंड) के क्लेम प्रोसेस में 10 साल की देरी कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) को भारी पड़ गई. इकोनॉमिक टाइम्स में छपी एक खबर के मुताबिक, चंडीगढ़ के जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने हाल ही में फैसला सुनाया है कि ईपीएफओ किसी कर्मचारी के पुराने पीएफ खाते से नए पीएफ खाते में पैसे ट्रांसफर करने से करीब एक दशक की देरी के लिए सॉफ्टवेयर संबंधी समस्याओं को बहाना नहीं बना सकता. साथ ही क्लेम प्रोसेस में देरी के लिए कर्मचारी को ईपीएफओ से 50,000 रुपये का मुआवजा मिला है.
क्या है पूरा मामला?चंडीगढ़ के गर्ग नाम के एक व्यक्ति को 27 फरवरी 2009 को पुणे के टेक महिंद्रा में नौकरी मिल गई. कंपनी ने उनका पीएफ खाता खोला. 19 जुलाई 2010 को गर्ग ने इंफोसिस ज्वाइन कर ली. यहां फिर से नई कंपनी में उनका पीएफ खाता खोला गया. इस तरह से उनके पास 2 पीएफ खाते हो गए. गर्ग ने सितंबर 2010 में अपने नए नियोक्ता यानी इंफोसिस की मदद से टेक महिंद्रा वाले पुराने पीएफ खाते से जमा रकम को इंफोसिस वाले पीएफ खाते में ट्रांसफर करने के लिए आवेदन किया.
गर्ग ने बताया कि बार-बार प्रयास करने के बावजूद ईपीएफओ ने पीएफ ट्रांसफर को लेकर कोई जबाव नहीं दिया. इसके बाद उन्होंने 9 सितंबर, 2011 को एक आरटीआई एप्लीकेशन दायर कर अपने पीएफ ट्रांसफर की स्थिति के बारे में जानकारी मांगी. ईपीएफओ ने 9 नवंबर, 2011 को उनके आरटीआई का जवाब दिया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच लंबे समय तक पत्राचार चला. आखिरकार 16 अप्रैल, 2020 को ईपीएफओ ने गर्ग के नए पीएफ खाते में 6.21 लाख रुपये ट्रांसफर किए. इस पर गर्ग ने तर्क दिया कि उनकी गणना के अनुसार उन्हें 11.07 लाख रुपये मिलने चाहिए थे.
इस पर ईपीएफओ ने कहा कि ब्याज भुगतान रोक दिया गया था क्योंकि खाता 1 अप्रैल 2011 से निष्क्रिय घोषित कर दिया गया था. इसलिए, 2012-13 से 2015-16 की अवधि के लिए ब्याज आय गर्ग के खाते में जमा नहीं की गई थी.
उपभोक्ता शिकायत दर्ज कराईइसके बाद 23 मई, 2021 को गर्ग ने पीएफ क्लेम डिपार्टमेंट के सामने एक और आरटीआई अपील दायर की. हालांकि, ईपीएफओ ने इसे नजरअंदाज कर दिया और उन्हें शेष राशि/ब्याज का भुगतान नहीं किया. इस पर ईपीएफओ की तरफ से सेवा में कमी और अनुचित व्यापार प्रथाओं का आरोप लगाते हुए गर्ग ने चंडीगढ़ जिला आयोग के समक्ष उपभोक्ता शिकायत दर्ज कराई. इसमें ब्याज, मुआवजे और मुकदमेबाजी लागत सहित बकाया राशि ट्रांसफर की मांग की गई. गर्ग ने यह उपभोक्ता मामला 22 जुलाई, 2021 को दायर किया था.
उपभोक्ता मामला दर्ज होने के बाद ईपीएफओ ने स्वीकार किया कि गर्ग ने उन्हें पीएफ हस्तांतरण में देरी के बारे में सूचित किया था, लेकिन दावा प्रक्रिया में कुछ तकनीकी दिक्कतों के कारण वे क्लेम प्रोसेस नहीं कर सके. ईपीएफओ ने यह भी कहा कि इस प्रकार की तकनीकी समस्या सभी प्रकार के पीएफ दावों के लिए सामान्य है. ईपीएफओ ने स्पष्ट रूप से कहा कि गर्ग का दावा 24 फरवरी, 2020 को निपटा दिया गया था और 6.21 लाख रुपये उनके इंफोसिस स्थित चालू पीएफ खाते में स्थानांतरित कर दिए गए थे.
हालांकि, सिस्टम के सॉफ्टवेयर एप्लिकेशन में तकनीकी त्रुटि के कारण वित्तीय वर्ष 2010-11 का ब्याज जमा नहीं हुआ था. इसलिए उस वित्तीय वर्ष (2010-11) का 64,841 रुपये का ब्याज गर्ग के चालू पीएफ खाते में स्थानांतरित कर दिया गया था. ईपीएफओ ने कहा कि गर्ग द्वारा गलत राशि के बारे में शिकायत दर्ज करने के बाद उन्होंने रिकॉर्ड की दोबारा जांच की और बाद में खाते में 3.67 लाख रुपये की अपडेटेड ब्याज राशि जमा की. 16 मार्च, 2026 को गर्ग ने उपभोक्ता आयोग में आंशिक रूप से मुकदमा जीता .
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मुआवजा चुकाने का आदेशचंडीगढ़ स्थित जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने कहा कि दोनों पक्ष यह स्वीकार करते हैं कि उपभोक्ता शिकायत के लंबित रहने के दौरान ईपीएफओ ने मामले की फिर से जांच के बाद गर्ग के नए पीएफ खाते (इंफोसिस) में 3 अप्रैल, 2022 को 3.67 लाख रुपये और 7 जून, 2022 को 64,841 रुपये की अतिरिक्त राशि ट्रांसफर की थी. हालांकि, गर्ग का तर्क है कि ईपीएफओ अभी भी उन्हें 1.62 लाख रुपये का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी है. लेकिन ईपीएफओ का कहना है कि उनके द्वारा प्रस्तुत गणना गलत है और उन्हें कुछ भी देय नहीं है.
उपभोक्ता आयोग ने कहा कि गर्ग ने अपने समर्थन में एक गणना पत्रक प्रस्तुत किया है. ऐसा लगता है कि यह केवल शिकायतकर्ता या उनके वकील द्वारा तैयार किया गया है. न कि किसी चार्टर्ड अकाउंटेंट (सीए) या किसी विशेषज्ञ द्वारा. दूसरी ओर, ईपीएफओ ने अपनी गणना शीट दाखिल करके इसका खंडन किया है और कहा है कि शिकायतकर्ता के मामले की दोबारा जांच की गई और पूरा ब्याज खाते में जमा कर दिया गया था और कुछ भी देय नहीं है.
चंडीगढ़ जिला उपभोक्ता आयोग ने कहा कि उपलब्ध परिस्थितियों में यह मानना सुरक्षित नहीं है कि शिकायतकर्ता के खाते में EPFO की ओर से कोई राशि लंबित थी या EPFO ने अनुचित व्यापार व्यवहार किया. हालांकि, आयोग ने यह भी साफ किया कि सेवा में देरी को तकनीकी त्रुटि या क्लेम प्रोसेसिंग की कठिनाइयों का हवाला देकर सही नहीं ठहराया जा सकता. आयोग के अनुसार, EPFO का यह बचाव तर्कसंगत और वैध नहीं है. यह सेवा में कमी को दिखाता है. कोर्ट ने ईपीएफओ को क्लेम में देरी पर गर्ग को 50 हजार मुआवजा देने का फैसला सुनाया.
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क्या है क्लेम प्रोसेस का नियम ?मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक फिलहाल ऑनलाइन EPF क्लेम पहले के मुकाबले काफी तेजी से प्रोसेस हो रहे हैं. जनवरी 2026 में सरकार ने संसद में बताया कि डिजिटल पीएफ क्लेम का एवरेज सेटलमेंट का समय करीब 8 दिन रह गया है. वहीं, रिकॉर्ड मिसमैच, KYC दिक्कत या पुराने खाते में क्लेम सेटलमेंट में अब भी लगभग 20 दिन तक लग सकते हैं. हाल ही में EPFO ने ऑटो क्लेम सेटलमेंट सिस्टम को और तेज किया है. हालिया रिपोर्ट्स बताती हैं कि जिन खातों में KYC, बैंक डिटेल और रिकॉर्ड पूरी तरह सही हैं. उनके कई एडवांस क्लेम 3 दिनों के भीतर भी सेटल किए जा रहे हैं लेकिन तकनीकी या दस्तावेज आधे-अधूरे होने वाले मामलों में देरी अब भी संभव है.
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