41 हजार की घड़ी, पहन नहीं सकते, फिर भी बेंगलुरु से बैंकॉक तक लोग इसके लिए पगला रहे
Audemars Piguet x Swatch: 41 हजार रुपये की इस घड़ी जिसे हाथ में पहना भी नहीं जा सकता, उसे खरीदने के लिए ऐसी मारामारी हुई कि कई जगह स्टोर बंद करने पड़े. ऐसे में हमारे दिमाग में टिक-टिक हुआ कि घड़ी में ऐसा क्या है जो पब्लिक पगला रही है.

Bengaluru के Phoenix Marketcity मॉल से लेकर लंदन, ज़ुरिक, न्यूयॉर्क, सिंगापुर, बैंकॉक, और ओसाका के Swatch स्टोर के बाहर गुजरे वीकेंड हजारों लोग लाइन में लगे थे. ये Audemars Piguet x Swatch के कॉलेब वाली घड़ी को खरीदने की कोशिश कर रहे थे. 41 हजार रुपये की घड़ी जिसे हाथ में पहना भी नहीं जा सकता, उसे खरीदने के लिए ऐसी मारामारी हुई कि कई जगह स्टोर बंद करने पड़े. ऐसे में हमारे दिमाग में टिक-टिक हुआ कि घड़ी में ऐसा क्या है जो पब्लिक पगला रही है. क्या ये वही फंडा है जो दुनिया भर के अमीरों की घड़ियों पर लागू होता है. मतलब घड़ी नहीं इनवेस्टमेंट है या फिर FOMO हैं. समझते हैं.
Audemars Piguet x Swatch का कॉलेबAudemars Piguet माने सच्ची-मुच्चि में अमीरों की घड़ी. 6 लाख से स्टार्ट होकर ढाई करोड़ तक इसकी कीमत जाती है. कंपनी हर मॉडल के लिमिटेड प्रोडक्ट ही बनाती है इसलिए इस घड़ी का हर मॉडल अपने असल दाम से कई गुना कीमत पर बिकता है. हालांकि ऐसा सिर्फ AP के साथ नहीं बल्कि दूसरी कंपनियों जैसे रोलेक्स, Patek Philippe के साथ भी होता है. इसलिए ऐसी घड़ियों को टाइम देखने के लिए बल्कि इनवेस्टमेंट के लिए खरीदा जाता है.
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दूसरी तरफ है Swatch जिसे अमीरों का मीशो कह सकते हैं. इसकी घड़ी लाखों करोड़ों की तो नहीं आती लेकिन हजारों में जरूर मिलती है. नए-नए अमीरों की कलाई पर इसे खूब देखा जा सकता है. जाहिर है ऐसे में जब दोनों कंपनियों ने कॉलेब किया तो पब्लिक का बौराना बनता है. इसके पहले जब Swatch ने कुछ साल पहले Omega के साथ मिलकर मूनवॉच नाम से मॉडल निकाला था, तब भी पब्लिक में खूब दीवानगी दिखी थी. लेकिन वो अलग समय था और ये अलग समय है.
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Omega और Swatch की मूनवॉच एक लिमिटेड एडिशन प्रोडक्ट था. माने कंपनी ने इसकी कुछ तय यूनिट ही बाजार में उतारी थीं. माने जो आपने इस घड़ी को खरीदा तो आप फ्यूचर में उसे अपने मन के दाम पर बेच सकते थे. मगर Audemars Piguet x Swatch का रॉयल पॉप कलेक्शन कोई लिमिटेड एडिशन नहीं है. Swatch ने खुद कहा है कि ये मॉडल अगले कई महीनों तक उपलब्ध रहेगा. मतलब ये हुआ कि जो लोग लाइन में लगकर इस उम्मीद से इस घड़ी को खरीद रहे कि आगे चलकर दोगुने दाम में बेचकर मोटा मुनाफा कमाएंगे तो आपका टाइम खराब होने वाला है.
इनवेस्टमेंट नहीं FOMO हैAudemars Piguet x Swatch का कॉलेब FOMO (फियर ऑफ मिसिंग आउट) की अर्थव्यवस्था और भीड़ की मानसिकता का एक सटीक उदाहरण है. ज्यादातर लोग घड़ियों के शौकीन होने की वजह से इसमें दिलचस्पी नहीं रख रहे. वे इसलिए दिलचस्पी रख रहे क्योंकि बाकी सब लोग उनमें दिलचस्पी रख रहे हैं. वैसे बाकी लोगों को भी नहीं पता कि वे क्यों दिलचस्पी रख रहे हैं.
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