The Lallantop

दिल एक कुत्ता है, गया है बागों में, पड़े जो पत्थर फिर, गली को लौटेगा

एक कविता रोज़ में आज पढ़िए पुनीत शर्मा की कविता 'लौटेगा'

Advertisement
post-main-image
फोटो - thelallantop
एक कविता रोज़ में आज पढ़िए पुनीत शर्मा की कविता 'लौटेगा'. पुनीत  इंदौर के रहने वाले हैं.  हाल मुकाम मुंबई. पढ़ाई की बायोटेक की. मगर नौकरी की इश्तेहार लिखने की. गाने भी लिखते हैं. औरंगजेब और रिवॉल्वर रानी के नगमे रचे. हर वक्त सिनेमा की पिनक में रहते हैं. नशा यूं ही तारी रहे. पढ़िए कविता.
 

घटा बन के पानी, ज़मीं को लौटेगा, उसे भी जाने दो, यहीं को लौटेगा

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

इकाई ये किसकी, दहाई ये किसकी, हिसाब हम सभी का, बही को लौटेगा

दरख़्त बरगद का, जड़ें बढ़ा के फिर, जहां से उपजा था, वहीं को लौटेगा

Advertisement

जो रोज़ दरिया में, डुबाता था नेकी, किसको पता था वो, बदी को लौटेगा

दिल एक कुत्ता है, गया है बागों में, पड़े जो पत्थर फिर, गली को लौटेगा

जो रूह लौटी तो, वो गंगा लौटा है, गले का मोती भी, नदी को लौटेगा

Advertisement

एक कविता रोज: इरशाद कामिल की कविताएं प्रेमिकाएं होती हैं

Advertisement