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ठंड में मन उदास रहता है? ये है वजह

सीज़नल अफेक्टिव डिसॉर्डर को कुछ लोग विंटर डिप्रेशन के नाम से भी जानते हैं.

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करीब 10-20 प्रतिशत लोग जिन्हें डिप्रेशन की बीमारी होती है, उनमें डिप्रेशन के एपिसोड मौसम का पैटर्न फॉलो करते हैं
(यहां बताई गई बातें, इलाज के तरीके और खुराक की जो सलाह दी जाती है, वो विशेषज्ञों के अनुभव पर आधारित है. किसी भी सलाह को अमल में लाने से पहले अपने डॉक्टर से ज़रूर पूछें. दी लल्लनटॉप आपको अपने आप दवाइयां लेने की सलाह नहीं देता.)

दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं. एक जिन्हें ठंड का मौसम बेहद पसंद है. सालभर इंतज़ार करते हैं कि कब ठंड आए और वो रज़ाई में घुसकर मूंगफली खाएं. दूसरे वो, जिन्हें ठंड के नाम से नफ़रत है. मौसम बदलते ही उनका मूड बदल जाता है. ठंड के मौसम की तरह ज़िंदगी भी ग्रे का एक शेड लगती है. मन उदास रहता है.
कुछ ऐसा ही होता है कामिनी के साथ. 29 साल की हैं. भागलपुर की रहने वाली हैं. पिछले कई सालों से वो एक चीज़ नोटिस कर रही हैं. जैसे ही मौसम बदलता है, ठंड आती है उनके बर्ताव में बदलाव आ जाता है. मन उदास रहता है. रोना सा आता है. कुछ करने का मन नहीं करता. अब ऐसा उन्होंने तब नहीं लगता जब धूप होती है. कई साल तो कामिनी ने इस पर ध्यान नहीं दिया, पर पिछले साल उन्होंने एक थेरेपिस्ट को दिखाया. वहां उन्हें पता चला SAD के बारे में.
SAD यानी सीज़नल अफेक्टिव डिसॉर्डर. जिसे विंटर डिप्रेशन के नाम से भी जाना जाता है. हैरान करने वाली बात ये है कि कई लोग इससे जूझते हैं, पर उनको ये पता नहीं होता कि ऐसा उनके साथ क्यों हो रहा है. उन्हें ये तक अंदाज़ा नहीं होता कि ये एक बीमारी है. इसलिए कामिनी चाहती हैं कि हम सेहत पर सीज़नल अफेक्टिव डिसॉर्डर के बारे में बात करें. ये क्या होता है, किसे होता है, इसके लक्षण क्या हैं, इलाज क्या है, ये सारे सवाल एक्सपर्ट्स से पूछें. तो अगर आप भी उन लोगों में से हैं जिन्हें ठंड के मौसम में डिप्रेशन महसूस होता है, तो जानिए इससे कैसे निपटें. सीज़नल अफेक्टिव डिसॉर्डर क्या और क्यों होता है? ये हमें बताया डॉक्टर समीर पारिख ने.
Dr. Samir Parikh - Doctor You Need Doctor You Need डॉक्टर समीर पारिख, डायरेक्टर, डिपार्टमेंट ऑफ़ मेंटल हेल्थ एंड बिहेवियरल साइंसेस, फ़ोर्टिस हेल्थकेयर


-सीज़नल अफेक्टिव डिसॉर्डर को कुछ लोग विंटर डिप्रेशन के नाम से भी जानते हैं.
-सीज़नल अफेक्टिव डिसॉर्डर डिप्रेशन का एक एपिसोड है.
-जो मौसम के पैटर्न को फॉलो करता है.
-अपने आप में अलग बीमारी नहीं है.
-करीब 10-20 प्रतिशत लोग जिन्हें डिप्रेशन की बीमारी होती है, उनमें डिप्रेशन के एपिसोड मौसम का पैटर्न फॉलो करते हैं.
-करीब 20-25 प्रतिशत लोग जिन्हें बाइपोलर डिसऑर्डर है, उनमें भी डिप्रेशन के एपिसोड मौसम के हिसाब से आते हैं.
-सीज़नल अफेक्टिव डिसॉर्डर के नाम से पता चलता है कि मौसम बदलने पर या किसी ख़ास मौसम में उदासीनता का आना.
-शरीर में मेलाटोनिन नाम का एक न्यूरोट्रांसमिटर (शरीर में पाए जाने वाले केमिकल दूत) होता है, उसका भी रोल विंटर डिप्रेशन में पाया जाता है.
-जिन देशों में ठंड लंबी चलती है, वहां लाइट थेरेपी दी जाती है.
-जैसे ही ठंड आती है, इस डिप्रेशन के लक्षण दिखने शुरू हो जाते हैं.
-लक्षण डिप्रेशन के ही हैं, पर मौसम को फॉलो करते हैं.
Seasonal affective disorder: How to get through the pandemic's winter months - CNN करीब 10-20 प्रतिशत लोग जिन्हें डिप्रेशन की बीमारी होती है, उनमें डिप्रेशन के एपिसोड मौसम का पैटर्न फॉलो करते हैं


-ज़रूरी नहीं है कि सीज़नल अफेक्टिव डिसॉर्डर के लक्षण ठंड में ही आएं, कुछ लोगों को बरसात में, गर्मियों में भी हो सकता है. पर ज़्यादातर लोगों में ठंड के मौसम में होता है. लक्षण -उदासीनता
-लो मूड
-ख़ुश न रहना
-अच्छा नहीं लगना
-किसी चीज़ को करने का मन नहीं करना
-जो चीज़ें करना पहले अच्छी लगती थीं, वो भी अच्छी नहीं लगतीं
-अकेलापन महसूस होना
-नकारात्मक ख़्याल आना
-बेबसी
-जीवन अंधकार में लगना
-फोकस न कर पाना
-भूख, नींद पर असर होना
-लाइफ की क्वालिटी ख़राब होना
-अगर 2 हफ़्ते तक ये लक्षण रहते हैं तो इसे डिप्रेशन कहते हैं.
Seasonal Depression Coupled With the Pandemic Could Make For a Long Winter | WDET शरीर में मेलाटोनिन नाम का एक न्यूरोट्रांसमिटर (शरीर में पाए जाने वाले केमिकल दूत) होता है, उसका भी रोल विंटर डिप्रेशन में पाया जाता है


-ज़्यादातर ठंड में लोगों को डिप्रेशन महसूस होता है इसलिए इसे विंटर डिप्रेशन कहते हैं.
-ख़ासकर ऐसे देशों में जहां ठंड लंबी होती है.
-जहां धूप कम निकलती है.
-वहां विंटर डिप्रेशन ज़्यादा देखा जाता है. इलाज -इसका इलाज जैसे डिप्रेशन का होता है, ठीक वैसे ही होता है क्योंकि कारण भी एक जैसे होते हैं.
-न्यूरोट्रांसमिटर का बैलेंस बिगड़ना जैसे सेरोटोनिन, उसे ठीक करने के लिए दवाइयां दी जाती हैं.
-साइकोथेरेपी जैसे कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी, जहां साइकोलॉजिस्ट पेशेंट से बात करते हैं.
-उनकी सोच, एक्शंस पर काम किया जाएगा.
-फैमिली थेरेपी की जाती है परिवार के सपोर्ट के लिए.
-सीज़नल अफेक्टिव डिसॉर्डर एक बीमारी है.
-ये विंटर ब्लूज़ या मानसून ब्लूज़ से अलग है.
-विंटर ब्लूज़ में डलनेस महसूस होती है जब मौसम में बदलाव आता है.
-ये डलनेस बीमारी नहीं है.
-इसे बीमारी कहलाने के लिए जो लक्षण बताए गए हैं, उनका महसूस होना ज़रूरी है.
-अगर विंटर ब्लूज़ हो रहे हैं तो कुछ ख़ास बातों का ध्यान रखें.
-दिनचर्या ठीक करिए.
-सुबह उठने के समय को फ़िक्स करिए.
-सुबह कुछ अच्छी एक्टिविटी करिए.
-ख़ासतौर पर जो बाहर हो.
-धूप लीजिए.
-जिस समय धूप अच्छी होती है, उस समय बाहर रहिए.
-रात को सोने का समय फ़िक्स करिए.
How to tell difference between depression and winter blues | Daily Sabah विंटर ब्लूज़ में डलनेस महसूस होती है जब मौसम में बदलाव आता है


-कामों को टालें नहीं.
-लोगों से मिलना बंद न करें.
-जो चीज़ें करना पसंद हैं उन्हें करते रहिए.
-इस मौसम में जो सुस्ती आती है, उससे निपटने के लिए अपने रूटीन को ठीक करें.
-विंटर ब्लूज़ को अपनी दिनचर्या से ठीक किया जा सकता है.
-डिप्रेशन एक मेडिकल बीमारी है.
-जिसके लिए एक्सपर्ट की राय लेना ज़रूरी है.
-क्योंकि उसमें दवाइयां और साइकोथेरेपी दोनों का रोल होता है.
जैसे डॉक्टर साहब ने बताया, ज़रूरी नहीं सीज़नल अफेक्टिव डिसॉर्डर हमेशा ठंड के मौसम में ही हो, पर हां, ज़्यादातर लोगों को ये ठंड के मौसम में ही होता है. अगर आप को भी डॉक्टर के बताए गए लक्षण महसूस होते हैं तो इन्हें सिर्फ़ ख़राब मूड समझकर इग्नोर न करें. ये एक बीमारी है. जिसका इलाज भी संभव है. इसलिए एक्सपर्ट की सलाह लें.

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