POCSO ऐक्ट पर विवादित फैसला देने वाली जस्टिस पुष्पा का प्रमोशन रुक सकता है
या फिर उन्हें डिमोट करके जिला न्यायालय भी भेजा जा सकता है.
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Justice Pushpa Ganediwala ने अभी एक और विवादित फैसला सुनाया है. उन्होंने कहा कि बिना हाथापाई किए युवती का मुंह दबाना, कपड़े उतारना और फिर रेप करना असंभव लगता है.
बॉम्बे हाईकोर्ट की जज पुष्पा गनेडीवाला का प्रमोशन रुक सकता है. हाल ही में उन्होंने कुछ ऐसे फैसले सुनाए जिन पर काफी विवाद हुआ. अब ऐसा माना जा रहा है कि सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम उनका प्रमोशन रोक सकता है. इंडिया टुडे रिपोर्टर संजय शर्मा की ख़बर के मुताबिक- या तो उन्हें स्थाई जज बनाने के लिए प्रोबेशन पीरियड को बढ़ाया जा सकता है या फिर उन्हें डिमोट करके जिला न्यायालय भेजा जा सकता है.
जस्टिस गनेडीवाला के हालिया फैसले
1. 15 जनवरी 2021 को जस्टिस पुष्पा ने एक फैसला सुनाया. 50 साल के एक शख्स पर 5 बरस की बच्ची के यौन शोषण का आरोप था. शिकायत बच्ची की मां ने की थी. कहा था कि आरोपी, बच्ची को एक कमरे में ले गया था. घटना के वक्त आरोपी की पैंट की चेन भी खुली थी. सेशन कोर्ट ने आरोपी को POCSO Act के तहत दोषी माना था लेकिन बॉम्बे हाईकोर्ट की जज पुष्पा गनेडीवाला ने कहा था कि ये मामला POCSO Act की धारा 7 के तहत यौन अपराधों की श्रेणी में नहीं आता. हालांकि, उन्होंने आरोपी को IPC की धारा 354 (1) (i) के तहत बच्ची की गरिमा भंग करने और POCSO Act की धारा 12 के तहत दोषी पाया. 2. 19 जनवरी 2021 को उन्होंने एक और फैसला सुनाया. एक शख्स पर 12 साल की बच्ची के स्तनों को छूने का आरोप था. निचली कोर्ट ने आरोपी को POCSO Act के तहत दोषी पाया लेकिन जस्टिस पुष्पा गनेडीवाला ने कहा कि इस मामले में आरोपी ने कपड़ों के भीतर हाथ नहीं डाला और स्किन टू स्किन टच नहीं हुआ. इसलिए यह पॉक्सो एक्ट की धारा 7 के तहत यौन हमला नहीं है. हालांकि विवाद बढ़ने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने उनके इस फैसले पर रोक लगा दी.
कौन हैं जस्टिस पुष्पा गनेडीवाला?
पुष्पा गनेडीवाला महाराष्ट्र के अमरावती की रहने वाली हैं. 2007 में वो जिला जज बनी थीं. इसके बाद नागपुर में मुख्य जिला और सेशन जज बनीं. और फिर बॉम्बे हाईकोर्ट की रजिस्ट्रार जनरल नियुक्त की गईं. फरवरी 2019 में उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट में अस्थाई जज बनाया गया. इसके बाद जनवरी 2019 में उन्हें हाईकोर्ट का अतिरिक्त जज नियुक्त करने की सिफारिश की गई. अगर पुष्पा गनेडीवाला को हाईकोर्ट में स्थाई जज नहीं बनाया गया तो उन्हें रिटायरमेंट तक जिला जज के रूप में ही काम करना होगा. आपको बता दें कि अतिरिक्त जज का प्रोबेशन पीरियड खत्म होने से पहले सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम अगर उन्हें स्थाई नियुक्ति देता है तो ठीक अन्यथा उनकी नियुक्ति को निष्प्रभावी माना जाता है. स्थाई नियुक्ति के बाद जज को महाभियोग की प्रक्रिया के जरिए ही हटाया जा सकता है.
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