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चेन्नई में एक सिंगल लड़की को किराए पर घर नहीं मिला, वजह जानकर उल्टी आएगी

सानों से ज़्यादा रिज़र्वेशन घरों के लिए हैं. वास्तु, लिंग, पंथ, मैरिटल स्टेटस, खानपान जैसे तमाम झमेले हैं. ऐसा ही एक मामला आया है तमिल नाडु से.

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हर बार हाउस हंटिंग के अनुभव अच्छे नहीं होते, इस केस में भी यही हुआ. (फोटो - ट्विटर/सांकेतिक घर)

घर. अपने साउंड से ही कितना काव्यात्मक है न? घर. ये भी हो सकता है कि ये कवियों-लेखकों ने इस शब्द को अति-रोमैंटिसाइज़ कर दिया है. जो भी हो घर सुनकर सुरक्षित, सुकून टाइप फीलिंग तो आती ही है. कवियों-लेखकों ने घर के सुकून पर तो ख़ूब लिखा, लेकिन घर मिलना भी तो चाहिए. मिलता ही नहीं. रेंट पर तो बिल्कुल ही नहीं. कविता का पता नहीं, लेकिन समाज में तो घर बहुत ओवर-रेटेड है. इंसानों से ज़्यादा रिज़र्वेशन घरों के लिए हैं. वास्तु, लिंग, पंथ, मैरिटल स्टेटस, खानपान जैसे तमाम झमेले हैं.

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ऐसा ही एक मामला आया है तमिल नाडु से. कथित पढ़ा-लिखा राज्य. एक महिला पत्रकार को रेंट पर घर नहीं मिला क्योंकि वो महिला हैं, सिंगल हैं और पत्रकार हैं.

क्यों नहीं मिला... घर?

द न्यूज़ मिनट से जुड़ी एक पत्रकार हैं. भारती सिंघरावल. चैन्नई में रहती हैं. अपने लिए किराए पर घर ढूंढ़ रही हैं. ये हमें कैसे पता? उन्होंने ट्विटर पर डाला था भई! तो वो कर रही हैं घर की खोज, हाउस-हंटिंग. लेकिन हर बार हाउस हंटिंग के अनुभव अच्छे नहीं होते.

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तो अपने प्रेफ़र्ड एरियाज़ में घर शॉर्टलिस्ट करने के बाद भारती एक मकान मालिक से मिलीं. घर की बात ऑल्मोस्ट नक्की कर ली. लेकिन ऐन मोमेंट पर भारती के 'होने वाले पड़ोसी' ने आपत्ति जता दी. भारती ने ट्विटर थ्रेड में लिखा,

"एक घर मैंने लगभग फ़ाइनल कर दिया. मकान मालिक से मिल ली. इंडिपेंडेंट घर था. फिर उसी मंज़िल पर किराए पर रहने वाले एक वकील ने मकान मालिक के साथ लड़ाई कर ली, ये कहते हुए कि वो बैचलर है और लैंडलॉर्ड एक अकेली महिला को घर कैसे दे सकता है.

वह एक वकील है. इसलिए लैंडलॉर्ड उससे डर रहे हैं और वैसे भी पुरुष पुरुषों की ही सुनते हैं. तो मकान मालिक पीछे हट गए और कहा कि वो केवल एक 'परिवार' को ही घर किराए पर देंगे. ऐसा शहर जहां किराए पर रहने वाली सिंगल औरतें सबसे कम हैं, उसका फैमिली को किराए पर घर देने का ऑब्सेशन समझ नहीं आता. और, इसी के साथ तलाश फिर से शुरू होती है.

एक कुंवारे लड़के के लिए अपने लिए एक घर किराए पर लेना ठीक है, लेकिन ख़ुदा न करे कि एक महिला ऐसा कर ले! ख़ासतौर से उसके बग़ल में. मर्द थकाऊ होते हैं."

इस पूरी स्टोरी में सबसे ज्यादा प्रॉब्लमैटिक वो वकील है, जो खुद एक बैचलर है. किराए पर रहता है, लेकिन मकान मालिक को धमका रहा है कि उसके आसपास वो सिंगल लड़की को किराए पर घर कैसे दे सकता है. क्योंकि भई सिंगल आदमी है, उसके आसपास लड़की रहेगी तो उसका मन भटकेगा और लड़की ने उसे अपने जाल में फंसा लिया तो?

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सोचने की कोई सीमा नहीं होती, तो लोग कुछ भी सोच लेते हैं. सोच सकते हैं. ऊपर से वो आदमी अपने वकील होने की धौंस मकान मालिक को दिखा रहा है. अब जैसे भाई जॉली एलएलबी बता गए हैं कि हमारे देश में कोई झगड़ा होता नहीं कि लोग एक-दूसरे को कोर्ट में देखने की धमकी देने लगते हैं, ऐसे में कोई वकील से काहे बैर मोल ले. तो मकान मालिक भी पीछे हट गए.

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