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अफ़ग़ानिस्तान में महिला TV ऐंकर की ये तस्वीर देख तालिबान जल-भुन जाएगा

तालिबान ने महिला ऐंकर्स को सिर से पैर तक बुर्का पहनने का आदेश दिया था.

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तालिबान प्रवक्ता मोहम्मद अकिफ सादिक मोहजीर ने कहा कि मंत्रालय का इरादा महिलाओं के हक़ छीनना नहीं है (फोटो - ट्विटर/AFP)

तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान के सभी चैनलों के लिए फ़रमान निकाला. कहा कि, ’21 मई से चैनलों की सभी महिला ऐंकर्स पूरा चेहरा ढक कर ही TV पर ख़बर पढ़ेंगी.’ ये फ़रमान तालिबान के एक पुराने फ़रमान से जुड़ा है. दो हफ़्ते पहले तालिबान ने आदेश निकाला था कि सभी महिलाओं को पब्लिक स्पेसेज़ में सिर से पैर तक बुर्का पहनना होगा, वर्ना उनके पति या पिता को सज़ा दी जाएगी.

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लेकिन महिला प्रेज़ेंटर्स ने आदेश की अवहेलना की और अपने चेहरा दिखाते हुए ऑन एयर चली गईं.

इस महीने की शुरुआत में अफ़ग़ानिस्तान में तालिबान के सर्वोच्च नेता हिबतुल्लाह अखुंदज़ादा ने महिलाओं को सार्वजनिक जगहों पर हेड-टू-टो तक पारंपरिक बुर्का पहनने का फ़रमान जारी किया. अब इसके बाद Ministry for Promotion of Virtue and Prevention of Vice ने महिला टीवी प्रेज़ेंटर्स को 21 मई से बुर्के में न्यूज़ प्रेज़ेंट करने का आदेश दिया. इसके बाद एरियाना टेलीविज़न, शमशाद टीवी और 1TV जैसे अफ़ग़ानिस्तान के प्रमुख चैनलों में महिला ऐंकर्स ने पूरा हिजाब पहन कर और चेहरा ढककर न्यूज़ बुलेटिन प्रेज़ेंट किया.

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इसी बीच TOLO News की एक ऐंकर ने शो के सेट पर ही बुर्के के बिना फोटो डाल दी. हालांकि, ऐंकर ने हेडस्कार्फ़ पहना हुआ था. फोटो सामने आई और ट्विटर पर लोगों ने ऐंकर की हिम्मत की तारीफ़ की.


Tolo News की ऐंकर सोनिया नियाजी ने AFP को बताया,

“हमने विरोध किया, लेकिन TOLO News पर दबाव डाला गया. कहा गया कि अगर कोई महिला ऐंकर बिना अपना चेहरा ढके स्क्रीन पर दिखाई दे, तो उसे कोई और काम न दिया जाए या उसे हटा दिया जाए. हमें बुर्का पहनने के लिए मजबूर किया गया.”

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तालिबानी क़ब्ज़े से पहले भी महिला ऐंकर्स को हेडस्कार्फ़ पहनना अनिवार्य था.

ऐंकर की फोटो आने के बाद ट्विटर पर लोगों ने तालिबान की ख़ूब आलोचना की. इसके बाद अफगानिस्तान सरकार के मंत्रालय की तरफ़ से सफ़ाई आई है. तालिबान प्रवक्ता मोहम्मद अकिफ सादिक मोहजीर ने कहा,

“महिलाओं को सार्वजनिक स्पेस से हटाने का, उन्हें दरकिनार करने का या उनके काम करने के अधिकार छीनने का हमारा कोई इरादा नहीं है. हम मीडिया चैनलों से ख़ुश हैं कि उन्होंने इस ज़िम्मेदारी को अच्छे तरीक़े से लागू किया.”

हालांकि तालिबान के आदेश में ये भी कहा गया है कि अगर महिलाएं नए ड्रेस कोड का पालन नहीं करती हैं, तो उन्हें निकाल दिया जाए. सरकारी नौकरी करने वाले पुरुष भी अगर अपनी पत्नियों या बेटियों को ड्रेस कोड पालन करने में विफल रहते हैं, तो उन्हें निलंबन का जोखिम हो सकता है.

तालिबान ने अफ़ग़ानिस्तान क़ब्ज़े के बाद से ही महिलाओं पर एक के बाद एक पाबंदियां लगाई हैं. 19 मई को ही तालिबान ने औरतों को घरों में बांधना शुरू कर दिया. कहा कि हमारे लड़ाके जब तक औरतों से बिहेव करना नहीं सीख जाते, तब तक औरतें घर के अंदर रहें. अब तालिबान के प्रभारी आंतरिक मंत्री सिरजुद्दीन हक्कानी ने कुछ औरतों को नॉटी यानी बदमाश बताया.

CNN की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जब ये कहा गया कि तालिबान के आने के बाद से औरतें घर से बाहर निकलने से डरने लगी हैं. तो हक्कानी ने जवाब दिया,

“हम नॉटी औरतों के घर के अंदर रखते हैं.”

इसके बाद हक्कानी ने सफाई दी कि ये एक मज़ाक था और नॉटी औरतों से मतलब उन औरतों से था जो विरोधियों के साथ मिलकर अफगानिस्तान की वर्तमान सरकार पर सवाल उठाती हैं.

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