
source- Raj Kothari
कतर एयरवेज ने उनके लगेज को तय डायमेंशन से ज्यादा का माना. और "exceeding baggage dimensional allowance" का टैग लगा, 130 डॉलर का फाइन हर बक्से पर ठोंक दिया. लेकिन राज और उनकी टीम के पास पैसे कम थे. लगभग 70 डॉलर थे. देने 260 थे. एयरपोर्ट चेक-इन पर ये सुपरवाइजर से मान-मनौव्वल कर ही रहे थे कि एक आदमी ने इनसे पूछा क्या प्रॉब्लम है? वो आदमी इनके पीछे खड़ा था और बड़ी देर से इनकी बातों पर ध्यान दे रहा था.
राज ने बताया हमारा लगेज ओवर साइज है. हमें 260 डॉलर एक्स्ट्रा देने हैं, जो हमारे पास हैं नहीं.
उस अजनबी ने कहा कि कोई मसला नहीं. तुम लोग लगेज चेक-इन करो. मैं तुम्हारे बक्सों के लिए पैसे दूंगा.
राज और उसके टीम के लिए चौंकाने वाला था, क्योंकि उस आदमी को वो बिलकुल नहीं जानते थे. दूर देश में जिसे वो पहचानते भी नहीं हैं, भला क्यों उनके लिए इतने ज्यादा पैसे यूं ही भरेगा. खैर इन बालकों के पास कोई चारा नहीं था. इनने मदद स्वीकार कर ली. लेकिन ये तय किया कि उनका अकाउंट नंबर ले लेंगे और लौटते ही उनके पैसे चुका देंगे. लेकिन इससे भी उनने मना कर दिया.
राज ने उन्हें थैंक्स कहा. और कहा बाय द वे, आप इंडिया में कहां से हैं?
जवाब आया. कराची, पाकिस्तान से.
राज़ और उनकी टीम हक्की-बक्की रह गई. उन्हें समझ नहीं आ रहा था. इस बात पर रिएक्ट कैसे करें. उनने उनके साथ यादगार के तौर पर सेल्फी ली. अमाद नाम था उनका.

अमाद, राइट में
ये राज का किस्सा था. राज ने बताया. कैसे एक अजनबी पाकिस्तानी ने उनकी मदद की. दूर देश में और अपने पैसे भी लेने से मना कर दिया. कोरा पर कुछ रोज़ पहले उनने ये जवाब दिया. ये जवाब लोगों ने पढ़ा खूब शेयर किया. हम तक पहुंचा. भली बातें लोगों तक कम ही पहुंचती हैं. हम आप तक पहुंचा रहे हैं.






















