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'विधवा को मेकअप की जरूरत नहीं... ' हाई कोर्ट के इस बयान पर सुप्रीम कोर्ट ने सुना दिया

Patna High Court ने विधवा महिला पर ये टिप्पणी की, जो सुप्रीम कोर्ट को रास नहीं आई. लेकिन हाई कोर्ट ने ऐसा बोला क्यों? मामला क्या था?

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जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा. (फाइल फोटो: सुप्रीम कोर्ट)

सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने पटना हाई कोर्ट (Patna High Court) के एक बयान को ‘अत्यधिक आपत्तिजनक’ बताया है. पटना हाई कोर्ट ने कहा था कि विधवा को मेकअप करने की जरूरत नहीं होती. शीर्ष अदालत ने कहा है कि हाई कोर्ट के इस कॉमेंट पर सवाल उठाए जा सकते हैं. इस मामले के 7 आरोपियों ने सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी. इन सातों को पटना हाई कोर्ट ने संपत्ति विवाद में एक महिला के अपहरण और हत्या के मामले में दोषी ठहराया था.

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लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने सभी सातों आरोपियों को बरी कर दिया है. कोर्ट ने कहा कि इस मामले में दूसरे पक्ष की कहानी बेहद ‘अस्थिर’ थी. 

मेकअप की बात क्यों आई?

दरअसल, इस मामले में आरोपी ठहराए गए पक्ष का कहना था कि मृतक महिला उस घर में नहीं रहती थी, जहां कत्ल होने की बात कही जा रही है. कोर्ट में केस से संबंधित गवाहों ने अदालत को बताया कि घटना के समय महिला उसी घर में रह रही थी. जांच के दौरान पुलिस को घर में मेकअप का सामान मिला था. और साथ ही ये भी पता चला कि घर के उसी हिस्से में एक और महिला रह रही थी, जो विधवा थी.

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पटना हाई कोर्ट ने इस बात पर गौर किया. लेकिन साथ ही ये भी कहा कि मेकअप का सामान दूसरी महिला का नहीं हो सकता, क्योंकि वो विधवा थी और विधवा को मेकअप की जरूरत नहीं थी. और इसलिए ये साबित होता है कि मृतक महिला उसी घर में रहती थी. 

Supreme Court की आपत्ति

सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस बेला एम त्रिवेदी और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने उच्च न्यायालय के इस बयान पर आपत्ति जताई. उन्होंने कहा, 

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“हमारे विचार में उच्च न्यायालय की टिप्पणी को कानूनी रूप से स्वीकार नहीं ही किया जा सकता. साथ ही ये बेहद आपत्तिजनक भी है. इस प्रकार की व्यापक टिप्पणी, न्यायालय से उम्मीद की जाने वाली संवेदनशीलता और तटस्थता के अनुरूप नहीं है. विशेषकर तब, जब रिकॉर्ड पर किसी सबूत से ऐसा साबित ना हुआ हो.”

क्या है पूरा मामला?

NDTV की एक रिपोर्ट के मुताबिक, ये मामला अगस्त 1985 का है. घटना मुंगेर जिले की है. कथित तौर पर महिला के पिता के घर पर कब्जा करने के लिए उनका अपहरण किया गया. बाद में उनकी हत्या कर दी गई. हाई कोर्ट ने इस मामले में 5 लोगों को दोषी ठहराया. और 2 अन्य सह-आरोपियों को बरी करने के फैसले को खारिज कर दिया. इन दोनों को पहले ट्रायल कोर्ट ने सभी आरोपों से बरी कर दिया था. इसमें आरोपियों का कहना था कि उनपर झूठा आरोप लगाया जा रहा है, जहां से महिला के अपहरण की बात की जा रही है, वहां वो महिला रहती ही नहीं थी.  

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