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म्यांमार सीमा पर गोलीबारी के बाद इंडियन आर्मी ने कहा, 'ये सर्जिकल स्ट्राइक नहीं'

जून 2015 में इंडियन आर्मी ने म्यांमार में सर्जिकल स्ट्राइक की थी.

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सांकेतिक तस्वीर
इंडियन आर्मी और NSCN(K) के बीच म्यांमार बॉर्डर पर गोलीबारी हुई है, जिसमें NSCN(K) के कई उग्रवादियों के मारे जाने की खबर है. पहले इस एनकाउंटर को सर्जिकल स्ट्राइक बताया जा रहा था, लेकिन इंडियन आर्मी की ईस्टर्न कमांड ने साफ किया है कि ये सर्जिकल स्ट्राइक नहीं है, बल्कि सीमा पर गोलीबारी का मामला है. इससे पहले जून 2015 में इंडियन आर्मी ने म्यांमार में सर्जिकल स्ट्राइक की थी. तब उग्रवादियों के दो कैंप तबाह किए गए थे और इस बार उग्रवादियों के पांच कैंप तबाह करने की खबरें हैं. ये ऑपरेशन म्यांमार के लांखू गांव के पास हुआ है.
अभी तक की रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ उग्रवादियों ने सुबह पौने पांच बजे के आसपास सेना के कुछ जवानों पर गोलियां चलाईं, जिसका सेना ने जवाब दिया और आतंकी कैंपों को भारी नुकसान पहुंचाया. सेना की तरफ से किसी भी नुकसान की खबर नहीं है.
      हालांकि, इंडियन आर्मी की सात ऑपरेशन कमांड्स में से एक ईस्टर्न कमांड्स के सूत्रों का कहना है कि सुबह पौने पांच बजे भारत-म्यांमार बॉर्डर पर गोलीबारी हुई है, लेकिन ये सर्जिकल स्ट्राइक नहीं है.       इस्टर्न कमांड की तरफ से बताया गया कि भारतीय सैनिकों पर अज्ञात विद्रोहियों ने हमला किया था, जिसका सेना ने सफलतापूर्वक जवाब दिया. इसके बाद गोलीबारी करने वाले मैदान छोड़कर भाग गए. भारतीय सेना को किसी भी तरह के नुकसान की खबर गलत है. ईस्टर्न कमांड ने साफ किया कि इंडियन आर्मी म्यांमार में नहीं घुसी.       इस मामले में गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने बयान दिया है कि म्यांमार भारत का मित्रराष्ट्र है, इस नाते उसे ऑपरेशन की जानकारी दी जाएगी. इससे पहले साल 2015 में 10 जून को इंडियन आर्मी ने इंडो-म्यांमार इंटरनेशनल बॉर्डर के पार जाकर सर्जिकल स्ट्राइक की थी. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सेना ने 100 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया था. ये कार्रवाई NSCN(K) के ही एक हमले के जवाब में की गई थी. 4 जून 2015 को NSCN(K) के उग्रवादियों ने मणिपुर के चंदेल में सेना पर हमला करके 18 जवानों को मार गिराया था. chandel इस हमले के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल ने 6 जून को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बांग्लादेश जाने का प्रोग्राम टाल दिया था. हमले के बाद डोवाल कुछ दिनों तक मणिपुर में ही रुके थे, जहां से वो इंटेलिजेंस से मिल रहीं जानकारियों पर नज़र बनाए हुए थे. 10 जून को हुई सर्जिकल स्ट्राइक में 70 कमांडो शामिल थे और ये ऑपरेशन 40 मिनट तक चला था. इसके बाद 29 सितंबर 2016 को इंडियन आर्मी ने पाक अधिकृत कश्मीर में सर्जिकल स्ट्राइक की थी.

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