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अपने चंडीगढ़ को ऐसे देख कर बुरा लगता है!

वीडियो आया है. लड़की नशे में धुत है. पढिए एक चंडीगढ़ वाले को बुरा क्यों लगता है!

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फोटो - thelallantop
मेरे शहर चंडीगढ़ का है ये वीडियो. हालांकि स्कूटर का नंबर रोपड़(पंजाब) का है. सुबह से कई लोगों की टाइमलाइन पर शेयर होता हुआ देख चुका हूं. बुरा लग रहा है. अब तक जब और जहां भी अपने शहर की बात करता हूं, ऊंची आवाज और हंसते हुए चेहरे के साथ करता हूं. पर ये वीडियो डिस्टर्बिंग हैं. लड़की नशे में धुत. ऊपर से जब पुलिस आई तो उससे भी लड़ने लगी. पूलिस वाला हाथ जोड़े खड़ा है पर वो कह रही है कि दम है तो हाथ लगाके दिखा.
इसलिए सोचने लगा कि इसके बारे में कैसे बात करूं. सोचा कि ये स्टोरी करूं भी या नहींना करने का इसलिए सोचा क्योंकि लड़कियां हैं. पहले ही समाज में खूब दबाई जाती हैं और फिर ऐसे वीडियो लड़कियों पर और दबाव बना देते हैं. दबाव सभ्य और सुशील व्यवहार करने का. उन्हें कहा जाता है, देखो आजादी देने का ये नतीजा होता है.
साथ ही यह भी लगा कि हमारा शहर तो सिर्फ अच्छी चीज़ों के लिए ही जाना जाता है. गलत चीज दिखाऊंगा तो लोग कहेंगे कि हां वही सिटी ब्यूटीफुल ना जहां लड़कियां दारू पीके गिरती-पड़ती रहती हैं. https://www.youtube.com/watch?v=wR-CMDF70H4&feature=youtu.be
आपको लग रहा होगा कि जब इतना सब सोच रहा हूं तो फिर लिख क्यों रहा हूं? तो सुनिए. लिख इसलिए रहा हूं क्योंकि यही सच्चाई है आज के पंजाब की. जजमेंटल नहीं हो रहा हूं. ये है मेरे पंजाब का कड़वा सच. पिछले 10-15 साल में नशा ऐसे मिलने लगा है जैसे किराने की दुकान पर दाल. जवानी खराब कर दी है हरे-भरे पंजाब की.
पहले तो सिर्फ पंजाब तक ही था. अब चंडीगढ़ में भी आम हो गया है. लड़कों से लेकर लड़कियों तक. सबको ले लिया है इसने चपेट में. दो या तीन साल पहले ऐसा ही कुछ दिखा था सैक्टर 17 प्लाजा में न्यू ईयर पर. चंडीगढ़ भास्कर ने फ्रंट पेज पर लड़की की फोटो छापी थी. उल्टे मुंह नशे में धुत जमीन पर पड़ी थी रात के बारह बजे.  मुझे बुरा लगा था, उतना ही जितना आज लग रहा है. पर ये डिसाइडिंग टाइम है. सोचना तो पड़ेगा ही. पिंडों(गांवों)में से जवानियां खत्म होती जा रही है. अमृतसर के पास गांव पड़ता है मकबूलपुरा. गांव में कोई जवान लड़का नहीं बचा है. नामो बाई नाम की औरत अपने 6 लड़के खो चुकी है. 75% महिलाएं वहां विधवा हैं. और ये सिर्फ एक गांव की कहानी नहीं है. गांव के गांव उजड़ गए हैं. बारातें आनी बंद हो गई है. बुरा लगना शायद जायज हैं. एक दोस्त खो चुका हूं. ओवरडोज़ ले ली थी. इन लड़कियों को देखा तो गुस्सा भी आया और बुरा भी लगा. क्योंकि तुम लड़कियां हो. हम लड़कों से कई ज्यादा अच्छी. जब चीजें बिगड़ती हैं तो हम उम्मीद करते हैं, कोई संभालेगा. बिहार में औरतों ने नशे बंदी के लिए प्रोटेस्ट किया था. तुम तो रिश्तों में जान फूंकती हो. फिर ऐसा जानलेवा जहर क्यों? तुम्हारा ही ये हाल होगा तो कैसे चलेगा! ये इसलिए नहीं कह रहा हूं कि मुझे लगता है ' ये लड़कियां होकर नशा कैसे कर सकती हैं'. इसलिए कह रहा हूं कि जब तुम्हारे आस-पास सबकुछ बुरा ही नशे की वजह से हो रहा है, तो कैसे तुम इसकी चपेट में आ सकती हो! ये हम सबको कमजोर करता है. हम सबको जिम्मेवार होना होगा. होना होगा ना? जो कर रहे हैं उसकी जिम्मेदारी तो लेनी पड़ेगी. ताकि पंजाब में खिल-खिलाती फसलें, सरसों के फूल और खूबसूरत कल्चर अकेला ना पड़ जाए. क्या यार मूड ऑफ हो गया. जबसे लिखने बैठा हूं गुरदास मान का गाना याद आ रहा है 'नशेयां ने पटते पंजाबी गबरू....की बणू दुनिया दा'. https://www.youtube.com/watch?v=pjQyBF2gwjQ

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