इंडिया पाकिस्तान बॉर्डर. सबसे सेंसिटिव इलाके. अखनूर, अरनिया, आरएस पुरा के जानलेवा मौसम में दुश्मन से कुछ ही दूर लगे वॉच टावर. इन टावर्स में कंधे पर इंसास राइफल टांगे 6 से 8 घंटे नजर गड़ाए रहने वाली BSF की लेडी सोल्जर्स. इन्हीं में से एक हैं लक्ष्मी. सांबा सेक्टर में पोस्टेड. कहती हैं "हम तैयार हैं, किसी भी एक्शन के लिए." जी हां. ये स्टोरी लड़कियों को चूल्हे चौके में झोंकने वालों की आंख में थोड़ी हया का पानी भर देती है. 23 से 30 साल तक की इन लड़कियों में कुछ शादीशुदा भी हैं. कुछ अपने पूरे परिवार के साथ बटालियन हेडक्वार्टर्स में रहती हैं. कुछ ने अपने पति, बच्चों को अपने गांव, घर में छोड़ रखा है. खुद बॉर्डर पर लड़ रही हैं. टाइम्स ऑफ इंडिया को अनुबाला ने बताया कि वो 2008 से BSF में हैं. कहा कि उनकी करियर चॉइस ने घर को मुश्किल में नहीं डाला. बल्कि उनको गर्व करने का मौका दिया. बताती हैं कि हमारे गांव वाले कहते हैं "हमारी बहू बेटियों ने हमारा नाम रोशन किया है." भोर की पहली किरण आने के कुछ ही देर बाद कॉन्स्टेबल रबिंदर कौर और अनुबाला अपनी इंसास राइफल कंधे के हवाले करके बॉर्डर चेकपोस्ट की तरफ कूच कर जाती हैं. वहां से पाकिस्तानी रेंजर्स पर नजर रखती हैं. अगर उधर से गोली चली तो बिना हिचकिचाए उनको छेद देने के लिए इधर से बंदूक का ट्रिगर दबाती हैं. इनको MMG यानी मीडियम मशीन गन और 51mm मोर्टार सलीके से संभालने और चलाने के लिए ट्रेंड किया गया है. जम्मू में 192 किलोमीटर के दायरे में 90 लेडी जवान पोस्टेड हैं. उन्हीं में से हैं रबिंदर और अनुबाला. रबिंदर जम्मू की ही हैं. पति ऑस्ट्रेलिया में काम करता है. कहती हैं "We are the new woman power. हम लोग भी जवाब देंगे, और ऐसा जवाब देंगे कि सौ साल तक याद रखेंगे कि वीमेन कॉन्स्टेबल्स की ताकत क्या होती है."
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दुश्मन के लिए तलवार हैं हम: BSF की लेडी सोल्जर्स
192 किलोमी़टर के दुर्गम इलाके में तैनात हैं 90 महिला जवान.
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फोटो - thelallantop
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