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JDU प्रेसिडेंट बने बिहार के सीएम नीतीश कुमार

JDU का अध्यक्ष बनने से ठीक पहले नीतीश कुमार ने कल चला था एक बड़ा दांव. पढ़ें पूरा मामला.

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फोटो - thelallantop
बिहार में शराब बैन के बाद सीएम नीतीश कुमार को रविवार को नई जिम्मेदारी मिल गई है. नीतीश कुमार JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए हैं. दिल्ली में नीतीश कुमार को  JDU की कार्यसमीति की बैठक में पार्टी अध्यक्ष चुना गया. https://twitter.com/PTI_News/status/719076319934291968 JDU के प्रेसिडेंट बनने से ठीक पहले नीतीश ने रिजर्वेशन पर बड़ा दांव चला. बोले- दलित मुस्लिमों और दलित इसाइयों को एससी-एसटी का दर्जा मिलना चाहिए. क्योंकि दलितों की तरह वो भी उपेक्षा का शिकार रहे हैं. नीतीश कुमार ने कहा, 'अब वक्त आ गया है कि इस मुद्दे पर स्ट्रॉन्ग विल दिखाई जाए. संविधान संशोधन कर 50 फीसदी रिजर्वेशन के सीलिंग का कैप हटाया जाए और तमिलनाडु के तर्ज पर रिजर्वेशन बढ़ाया जाए. अगर निजी क्षेत्रों में एससी, एसटी और ओबीसी को रिजर्वेशन नहीं मिला तो सामाजिक न्याय का मजाक उड़ेगा.' नीतीश कुमार शनिवार को बिहार विधानसभा के ऑडोटोरियम में बोल रहे थे. तमिलनाडु की संस्था पेरियार इंटरनेशनल यूएस की तरफ से एक ऑर्गेनाइजड एक प्रोग्राम में हिस्सा लेने आए थे. नीतीश ने प्रोग्राम में आगे कहा,
'मैंने गांधी जी की प्रेरणा से संसद में 10 साल पहले ये मुद्दा उठाया था कि धर्म बदलने से जात नहीं बदलती. दलित मुसलमान और इसाइयों को एससी-एसटी का दर्जा मिलना चाहिए. एससी और एसटी यानी अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति किसी भी धर्म के हो सकते हैं. कोई जरूरी नहीं कि सिर्फ हिंदु धर्म के मानने वालों को ही एससी-एसटी का दर्जा मिले. वक्त के साथ बौद्ध लोगों और सिक्खों को एससी-एसटी का दर्जा मिल गया लेकिन बड़ी संख्या में इस्लाम को मानने वालों और इसाइयों को इससे महरूम रखा गया. याद कीजिए, इस बार के बिहार चुनाव में प्रधानमंत्री ने इसे राजनैतिक तौर पर दलितों के हकमारी के रूप में मेरे खिलाफ इस्तेमाल किया था. इससे मेरे पार्टी के लोग भी घबराए थे लेकिन मैंने कहा कि इसे मजबूती से रखे क्योंकि मैंने सोच समझकर कहा था. अगर अनुसूचित जाति की संख्या बढ़ेगी तो उनका 27 फीसदी का कोटा भी बढ़ना चाहिए. अगर तमिलनाडु में 69 फीसदी रिजर्वेशन हो सकता है तो एससी-एसटी और ओबीसी को मिलाकर तो बाकी देश में क्यों नहीं हो सकता, इसके लिए एक स्ट्रॉग विल चाहिए. मंडल कमीशन के कॉन्टेक्सट में सुप्रीम कोर्ट का फैसला है जिसे हम मानते हैं लेकिन रिजर्वेशन का दायरा बढ़ना चाहिए. इस पर चर्चा होने का वक्त आ गया है. मैं मानता हूं कि मुस्लिम हो या इसाई हों, उन्हें रिजर्वेशन मिलना चाहिए क्योंकि दलितों की तरह वो भी उसी तरह के उपेक्षा के शिकार हैं. पिछड़ेपन के शिकार हैं. उन्हें एससी-एसटी का दर्जा मिलना चाहिए और संविधान का संशोधन कर 50 फीसदी का दायरा बढ़ाया जाना चाहिए.'

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