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बिना डिजिटल अरेस्ट के FD अकाउंट से साफ किए 2.8 करोड़ रुपये, नया साइबर फ्रॉड डराने वाला

टेक कर्मचारी के दो FD अकाउंट से पैसे कट गए. चूंकि फोन की क्लोनिंग हो चुकी थी इसलिए बैंक ने जो ओटीपी भेजा था वो सीधे ठगों के पास पहुंच गया. पुलिस ने आईटी एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज करके कार्रवाई शुरू कर दी है.

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बेंगलुरु में साइबर फ्रॉड का एक नया मामला सामने आया है जिसमें ठगों ने सिम कार्ड और मोबाइल के जरिए करोड़ो रुपये की चंपत लगाई है. (तस्वीर:इंडिया टुडे)

साइबर फ्रॉड के मामले दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं. बेंगलुरु का एक और टेक कर्मचारी साइबर ठगी का शिकार हो गया है. उसे 2.8 करोड़ रुपये की चपत लगी है. ‘कस्टम विभाग में पार्सल’ और ‘डिजिटल अरेस्ट’ से अलग अब स्कैमर्स ने एक नया तरीका ढूंढ निकाला. फ्री मोबाइल और सिम का लालच देकर कर्मचारी को फांस लिया गया.

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नए मोबाइल फोन और सिम कार्ड ने लगाया चूना

मामले की शुरुआत हुई एक अंजान नंबर से आए WhatsApp कॉल से. ‘Deccan Herald’ की एक रिपोर्ट के मुताबिक, नवंबर, 2024 में बेंगलुरु के एक टेक कर्मचारी को अंजान नंबर से कॉल करने वाले ने खुद को ‘City Union Bank’ का प्रतिनिधि बताया. उसने पीड़ित टेक कर्मचारी को बताया कि उसके नाम पर एक क्रेडिट कार्ड जारी किया गया है. लेकिन कार्ड को एक्टिवेट करने और उसे इस्तेमाल करने के लिए अपने सिम को बदलकर एयरटेल का एक सिम लगाना होगा. अजनबी कॉलर ने बताया कि वो खुद नया सिम कार्ड और मोबाइल फोन भेजेगा.

60 साल के टेक कर्मचारी ने अजनबी कॉलर की बातों पर भरोसा कर लिया. स्कैमर्स ने उसके घर के पते पर एक दिसंबर को 10 हज़ार रुपये का रेडमी मोबाइल फोन और सिम कार्ड भेज दिया. इसके बाद कॉल करके उसने टेक कर्मचारी को भेजे गए फोन में नया सिम कार्ड लगाने को कहा. जैसे ही उसने सिम कार्ड लगाया उसे अनधिकृत लेनदेन का नोटिफिकेशन मिला. जब बैंक अकाउंट चेक किया तो मालूम पड़ा कि 2.8 करोड़ रुपये निकाल लिए गए हैं.

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दो FD अकाउंट से कट गए करोड़ रुपये

‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, बेंगलुरु के व्हाइटफील्ड पुलिस थाने के डिप्टी कमिश्नर शिवकुमार गुनार ने बताया कि यह एक नए तरीके का साइबर स्कैम है. उन्होंने कहा, “इस तरह का नया फ्रॉड हाल ही में थाने में रिपोर्ट किया गया. ठगों ने पीड़ित को जो फोन भेजा था उसमें पहले से मेलवेयर इंस्टॉल था.”

गुनार ने कहा कि टेक कर्मचारी के दो FD अकाउंट से पैसे कट गए. चूंकि फोन की क्लोनिंग हो चुकी थी इसलिए बैंक ने जो ओटीपी भेजा था वो सीधे ठगों के पास पहुंच गया. पुलिस ने आईटी एक्ट की धाराओं के तहत मामला दर्ज करके कार्रवाई शुरू कर दी है.

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