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तारीख: जब पहली बार 'बुबोनिक प्लेग' का इस्तेमाल हत्या के लिए हुआ!

आज से 90 साल पहले बायोलॉजिकल हथियारों से जुडी हर खबर कानों को चौकन्ना कर जाती थी.

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साल 1933 की दुनिया में तमाम तरह के मसले चल रहे थे. उसी साल हिटलर जर्मनी का चांसलर बना. इंग्लैंड ने एशेज जीतने के लिए बॉडीलाइन बोलिंग शुरू की. जिससे दोनों देशों के बीच इस कदर तनाव बढ़ा कि आंच डिप्लोमेटिक रिश्तों तक पहुंच गई. 1933 ही वो साल था जब भारत का बंटवारा कर पाकिस्तान नामक एक अलग मुल्क बनाने की बात उठी. लेकिन इन सब बातों से इतर उस साल की सबसे बड़ी खबर थी कलकत्ता से. जो दुनिया भर के अखबारों की सुर्खी बनी. ऐसा क्या था इस खबर में?

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कलकत्ता के एक रईस जमींदार की हत्या हो गई थी. और हत्या में इस्तेमाल हुआ था एक बायोलॉजिकल वेपन. याद कीजिए ये दो विश्व युद्धों के बीच का समय था. और बायोलॉजिकल हथियारों से जुडी हर खबर कानों को चौकन्ना कर जाती थी. जिसके चलते दुनिया भर के लोग इस हत्या पर रिसर्च करने पहुंचे. यहां तक कि टाइम मैगज़ीन ने भी इस हत्या पर एक लम्बी रिपोर्ट छापी. बायोलॉजिकल वेपन से हत्या का भारत में ये पहला केस था. कैसे हुई थी हत्या, किसने की और कैसे पुलिस ने इस केस का खुलासा किया. देखिए वीडियो. 

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