The Lallantop

भारत की 'आख़िरी ओरिजिनल आवाज़' उदित नारायण, जिनके करिश्मे से बचना नामुमकिन है

आज उदित नारायण का हैप्पी बड्डे है. तो चलिए उनके साथ यादों का गलियारा छान मारें.

Advertisement
post-main-image
उदित नारायण.
आप टीन एज के लड़के हैं. अभी अभी बचपन की देहरी लांघ कर आए हैं. प्यार, इश्क, मुहब्बत का कीड़ा आपको काटने ही वाला है. अनगिनत सम्भावनाओं वाले इस सिलसिले की पहली घटना आपके जीवन में घटने ही वाली है. ऐसे में किसी लड़की को आप पसंद कर बैठते हैं. उसकी अटेंशन पाने के लिए छटपटाने लगते हैं. ढेर सारी मेहनत और अनगिनत तिकड़मों के बाद एक दिन वो आपको नोटिस करती है. और घोर आश्चर्य! आपको देखकर मुस्कुराती भी है. आप झट से ज़मीन छोड़ के आसमान में पहुंच जाते हैं और आपके कानों में एक बेहद सुरीली आवाज़ अपने आप बजने लगती है,

पहला नशा, पहला ख़ुमार... नया प्यार है, नया इंतज़ार..

उदित नारायण की जादुई दुनिया में आपका स्वागत है. वो आपकी इस प्रेम कहानी में आपके साथ साथ रहेंगे अब हमेशा. ऐसा ही करिश्मा है उदित की आवाज़ में जो आप 'जो जीता वही सिकंदर' (1992) के संजू की तरह स्लो मोशन में उड़ते फिरते रहना चाहते हैं.

उदित की आवाज़ की सबसे ख़ास बात ये है कि जब भी उनका कोई गाना शुरू होता है उनकी आवाज़ का थ्रो, फुल स्पीड में आपके ज़हन से आ के टकराता है. यूं, जैसे किसी ने आपकी पसलियों में घूंसा जड़ दिया हो. यूं, जैसे कोई प्लेन पहले सेकण्ड में ही टेक ऑफ़ कर जाए. आप इंस्टेंटली कनेक्ट हो जाते हैं.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement
आमिर खान की आंखें चौंधियाने वाली सिनेमाई जर्नी का आगाज़ जब हुआ था तब उदित ही उनकी आवाज़ बने थे. कौन भूल सकता है आइकॉनिक गाना "पापा कहते हैं बड़ा नाम करेगा"! समूचे भारत का युवा वर्ग उन दिनों बस यही गुनगुनाता था. फिर आगे चल कर उन्होंने आमिर के लिए ढेर सारे गीत गाए. 'पहला नशा' तो जैसे प्रेमीजनों का एंथम बन गया था. एक दौर तो ऐसा था जब उदित इंडस्ट्री के तीनों टॉप के स्टार शाहरूख़, सलमान, आमिर की आवाज़ कहलाए जाते थे. यूं तो उदित की गायकी की शुरुआत सन् 1980 में ही फिल्म 'उन्नीस-बीस' के गाने से हो चुकी थी लेकिन उनका सिक्का जमा 1988 में आई आमिर की 'क़यामत से क़यामत तक' से. इस फिल्म ने उदित को कल्पनातीत सफलता दी. इसी के बाद उदित भारत के घर-घर में पहचाने जाने लगे. इस फिल्म के सभी गाने उदित ने गाए थे और सब एक से बढ़कर एक थे. 'ऐ मेरे हमसफ़र', 'ग़ज़ब का है दिन', 'अकेले हैं तो क्या ग़म है' सभी. फिल्म 'दिल' में 'मुझे नींद ना आए' गाकर उदित ने तमाम प्रेमियों की उड़ी हुई नींदों की सटीक तर्जुमानी कर दी थी. 'यहां के हम सिकंदर' तो जैसे मंत्र ही था कोई, जो हर जोशीला नौजवान रिपीट मोड़ में गुनगुनाता था. प्यार करने वाले अपने साथियों से उदित की आवाज़ में ही वचन मांगते थे कि 'मेरे दिल में यूं ही रहना, तुम प्यार प्यार बन के.' नुसरत फ़तेह अली खान से उठाया हुआ गीत 'कितना प्यारा तुझे रब ने बनाया' उदित की आवाज़ में ही क़बूल हो सकता था. शाहरुख़ खान की नब्बे के दशक की लगभग हर फिल्म में उदित ने गाया है. किरण के पीछे पंजे झाड़ कर पड़े शाहरुख़ जब उदित की आवाज़ में 'जादू तेरी नज़र' गाते हैं तो उनके डरावने इश्क का चेहरा भी खूबसूरत लगने लगता है. शाहरुख़ के करियर की सबसे स्वीट फिल्म 'कभी हां कभी ना' के गाने 'दीवाना ये दिल दीवाना' की इस एक लाइन को हकीक़त का रूप देने के लिए कई लड़कों ने अपनी महबूबाओं के रुमाल उठा लिए थे - 'दिल से लगा कर के रक्खा है अब तक रेशम का तेरा रुमाल.
फिल्म 'मोहब्बतें' में अड़ियल नारायण शंकर के आगे ढोल बजाता हुआ राज आर्यन जब बुलंद आवाज़ में 'दुनिया में कितनी है नफरतें, फिर भी दिलों में है चाहतें' गाता है तब यूं लगता है जैसे समूची कायनात का विश्वास मुहब्बत में बहाल हो गया. एक दौर तो ऐसा आया था कि कोई शादी उदित के गाए और शाहरुख़ के परफॉर्म किए 'मेहंदी लगा के रखना, डोली सजा के रखना' के बिना मुकम्मल ही नहीं होती थी.
पूरे इंडिया में ऐसा शख्स मिलना मुश्किल है जो नाइंटीज़ में जवान हुआ हो और जिसने अपने लव इंटरेस्ट का परिचय यूं ना दिया हो, 'भोली सी सूरत, आंखों में मस्ती, दूर खड़ी शरमाए, आय हाय.'
यूं तो उदित ने सभी टॉप के संगीतकारों के साथ काम किया लेकिन ए आर रहमान के साथ उनके कॉम्बिनेशन की बात ही अलग थी. 'रंगीला' से शुरू हुई इस जुगलबंदी ने 'स्वदेस' तक खूब कहर ढाया. 'रंगीला' के 'क्या करें क्या ना करें' ने जैसे उन सभी सहमे, झिझक से भरे तालिब-ए-इश्क़ नौजवानों के डर को ज़ुबां दी, जिनको इश्क़ करना तो आ गया है लेकिन इज़हार करना नहीं. 'पुकार' का गीत 'सुनता है मेरा खुदा' आप सुनते नहीं, बहते हैं उसके साथ.
'ताल' के टाइटल ट्रैक में अलका याग्निक रहमान के जादुई संगीत में गा रही है. गाने के बीच में उदित आते हैं, 'माना अंजान है तू मेरे वास्ते'. और वहां से गाना एक और ही ऊंचाई पर चला जाता है. सिम्पली अमेजिंग! जब भुवन ने अंग्रेजी हुकूमत से पंगा लिया था तो उदित की आवाज़ में ही अपने साथियों को समझाया था, 'मितवा ओ मितवा तुझको क्या डर है रे!' और भी बहुत से नगीने हैं लेकिन एक गीत ऐसा है जिसे मरने से पहले कम से कम एक करोड़ बार सुना जा सकता है, 'ऐ अजनबी, तू भी आवाज़ दे कहीं से.' इस गाने में जब उदित 'तू है कहां, कहां है' गाते हुए हाई पिच में पहुंच जाते हैं तब आपकी आंखें खुद ब खुद बंद हो जाती हैं और आप किसी और ही दुनिया में पहुंच जाते हैं. उदित के करिश्मे से बचना नामुमकिन है. आज इन्हीं क्रिस्टल क्लियर आवाज़ के धनी उदित नारायण झा की सालगिरह है. सारा भारतवर्ष आज के दिन उदित नारायण से एक सुर में एक ही बात कहना चाहता है,

दिल ने ये कहा है दिल से, मुहब्बत हो गई है तुमसे..

Advertisement

Advertisement
Advertisement