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हनुमान खुद अपनी पहचान बताने आ रहे हैं!

अगर आप ये चिट्ठी उन तक पहुंचा दो तो जल्दी आ जाएंगे.

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बयानबाजी से परेशान हनुमान जी कभी भी विकट रूप धर सकते हैं. इमेज: करण आचार्य
प्रात लेइ जो नाम हमारा। ता दिन ताहि न मिलै अहारा।।
ये चौपाई हमने सुनी है. सुंदर कांड का बहुत पाठ किया है. सवेरे सवेरे आपका नाम लेना पड़ रहा है क्योंकि पिछली रात सो नहीं सका. तो सोचा जागने पर सबसे पहले आपको एक ओपन लेटर लिख देता हूं. आजकल किसी भी कंट्रोवर्सी पर कुछ लिखने के लिए ये बेस्ट ऑप्शन माना जाता है. आपको तो सब मालूम ही होगा. आपको माता सीता ने अष्ट सिद्धि नौ निधि दे रखी हैं. अजर अमर रहने का आशीर्वाद भी आपको प्राप्त है. तो ऐसा तो हो ही नहीं सकता कि इस पुण्य धरा भारत में जो हो रहा हो वो आपसे छिपा हो. मुझे तो ये भी उम्मीद है कि अब तक आप गदा भी उठा चुके होंगे.

देखो जैसा कि मोदी जी कहते हैं, उनका हर चीज से बचपन का नाता होता है. हमारा आपसे है. रामायण सीरियल हमने भी देखा है. उसमें राम, लक्ष्मण, सीता, दशरथ, कैकेयी, मेघनाद, रावण ये सब अडल्ट करेक्टर्स थे. हम बच्चों के लिए एक ही करेक्टर था, वह थे आप. हनुमान. अशोक वाटिका में जाकर इस डाली से उस डाली कूदते हुए जो धमाचौकड़ी मचाई. लंका जलाने के दौरान जो सरकस दिखाया वो सब हमने बहुत एंजॉय किया. हमारे मन में आपकी वही पुरानी खिलंदड़ छवि बनी हुई है. अपन कनेक्ट करते हैं आपसे यार, इसको हल्के में मत लो. लेकिन अफसोस ये है कि आपके खिलंदड़पन को अभी तक सिर्फ एक नेता कैश करा पाया. आपको स्पोर्ट्स पर्सनैलिटी बताया.
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सबसे पहले आपको योगी जी ने आपको दलित (नहीं) बताया था. उसके बाद अनगिनत नेताओं ने अनगिनत जातियां बताईं. किसी ने जाट तो किसी ने मुसलमान बताया. एक जने ने तो आपकी नेशनलिटी पर सवाल उठाते हुए आपको चाइनीज बता दिया. उनको ये भी डर नहीं लगा कि चाइनीज बताते ही आप पर यहां बैन लग सकता है. खैर, डर की बात इस समय करना यहां ब्लास्फेमी की कैटेगरी में आता है, तो आगे बढ़ते हैं. हमने शास्त्रों में पढ़ रखा है कि आप भगवान लोग इतने दयालु होते हो कि कोई एक इंसान या राक्षस सौ-डेढ़ सौ साल एक पैर पर तपस्या कर ले तो आप दर्शन दे देते हो. यहां कितने मुंह आपका नाम रोज लेकर तपस्या कर रहे हैं. अब नहीं तो कब प्रभु?
कारों के शीशे में चिपकने के लिए बने हनुमान
कारों के शीशे में चिपकने के लिए बने हनुमान

राम और गाय की लड़ाई के बीच जिस तरह से आपको फुटेज मिली उससे मन सचमुच गदगद है. पहला थैंक्यू करण आचार्य को जो उन्होंने एंग्री हनुमान बनाकर अनजाने ही आपको पॉलिटिक्स में पहुंचाया. दूसरा थैंक्यू योगी जी को जो उन्होंने गाय और राम के साथ आपका नाम नत्थी किया. तीसरा थैंक्यू उन लोगों को जिन्होंने योगी जी के प्ले पॉज से दलित वाला एंगल निकाला. उसके बाद सबको थैंक्यू जो पूरी बहस को नए लेवल पर लेकर गए. लेकिन हनुमान जी सच कहें, हम चट चुके हैं इस रोज की खिट पिट से. एक दिन आप अपनी पसंद का कोई भी न्यूज चैनल चुन लीजिए. अपने मुताबिक सभी न्यूज चैनल नंबर वन हैं. तो आप किसी पर भी प्राइम टाइम पर आकर अपनी असली आइडेंटिटी रिवील कर दो.
अभी बताता हूं तुम सबको
अभी बताता हूं तुम सबको

देखो हमको कोई प्रॉब्लम नहीं है. आप किसी भी जाति के हो. क्षत्रिय खानदान में पैदा हुए राम और यादवों के घर में पैदा हुए कृष्ण में से किसी का भौकाल कम नहीं है. उनकी जन्मभूमि पर विवाद हो सकता है लेकिन हमारे शास्त्रों के मुताबिक उनकी जाति पर लफड़ा नहीं होने वाला. लेकिन आप वानर खानदान में पैदा हो गए. साइंस और प्लैनेट ऑफ ऐप्स फिल्म के मुताबिक आपकी जाति बता भी दें तो कोई मानेगा नहीं. इसलिए हे रेड कलर प्रेमी हनुमान, खुद ही सामने आकर इस समस्या का अंत करो. हमको पूरा यकीन है कि आप किसी भी जाति के हों, आपको स्वीकार किया जाएगा. दलित होने की वजह से आपको घोड़ी चढ़ने से रोका नहीं जाएगा. क्षत्रिय होगे तो कोई आपसे कट्टा लेकर सेल्फी खिंचाने और प्रोफाइल पिक लगाने को नहीं कहेगा. ब्राह्मण होगे तो कोई आपको 'ब्राह्मण भूखा तो सुदामा, रूठा तो चाणक्य' वाली पोस्ट डालने को नहीं कहेगा. यादव होंगे तो मुलायम और लालू खानदान को सपोर्ट करने को नहीं कहा जाएगा. लेकिन आप खुद अपनी जाति का पता दे दो. प्लीज.
इतनी लंबी चिट्ठी पढ़ने का शुक्रिया. माता सीता की कृपा आप पर सदैव बनी रहे. भगवान राम आजकल अलग बिजी चल रहे हैं.


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