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UP पंचायत चुनावों में कोरोना ने 1500 की जान ले ली, कहते हुए SC पहुंचे, क्या रुकेगी काउंटिंग?

कर्मचारियों का दावा- चिट्ठी लिखी, पर न UP सरकार ने जवाब दिया, न चुनाव आयोग ने.

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पंचायत चुनाव के दौरान वोट डालते ग्रामीण. फोटो- आजतक
यूपी में पंचायत चुनाव के लिए वोटिंग खत्म हो चुकी है. 2 मई को मतगणना होनी है. इस चुनावी प्रक्रिया में टीचर और अन्य सरकारी महकमों के तमाम कर्मचारी जुटे हैं. टीचरों के संगठनों का दावा है कि अभी तक 700 से अधिक टीचरों की कोरोना संक्रमण से मौत हो गई है और हजारों टीचर कोरोना से पीड़ित हैं. अधिकतर टीचर, मतगणना टालने के लिए गुहार लगा रहे हैं. विपक्षी दल भी इसे लेकर सरकार पर निशाना साध रहे हैं लेकिन सरकारी अधिकारी इन आंकड़ों को गलत बता रहे हैं. लगातार हो रही हैं मौतें आगे बढ़ने से पहले कुछ खबरों पर नज़र डालिएः
- सुल्तानपुर के बिरधौरा गांव में रहने वाले टीचर रमेश कुमार यादव 28 साल के थे. 19 अप्रैल को चुनाव संपन्न कराने के बाद से वह बीमार हुए और 28 अप्रैल की रात उनकी मृत्यु हो गई. दिसंबर 2020 में नौकरी मिली थी. अभी पहली सैलेरी भी नहीं मिली थी. इस मामले पर सुल्तानपुर जिले के उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षक संघ के जनपदीय प्रवक्ता निज़ाम खान कहते हैं कि सुल्तानपुर में अभी तक 13 शिक्षकों की चुनाव ड्यूटी के कारण मौत हो चुकी है.
- नवभारत टाइम्स में छपी एक खबर के मुताबिक आगरा में पंचायत चुनाव में ड्यूटी के बाद लौटे 6 टीचरों की कोरोना से मौत हो गई. उत्तर प्रदेश सीनियर बेसिक शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष डॉ. महेशकांत शर्मा के हवाले से अखबार ने लिखा है कि एक टीचर को तो न बेड मिला, न ऑक्सीजन और न ही वेंटीलेटर. परिवार वाले इधर उधर दौड़ते रहे और टीचर ने आखिर में दम तोड़ दिया.
- अमर उजाला अखबार में छपी एक खबर के मुताबिक, फिरोजाबाद में पंचायत चुनाव ड्यूटी से लौटे शिक्षकों की तबीयत बिगड़ रही है. 29 अप्रैल को छपी इस खबर में दावा किया गया है कि पिछले 24 घंटे में चार शिक्षकों की मौत कोरोना के कारण हो गई है. इसके अलावा कई शिक्षकों की तबीयत खराब है. टीचरों का कहना है कि चुनाव के काम से मना करने पर अधिकारी FIR की धमकी दे रहे हैं.
- टीचर्स ही नहीं, चुनाव ड्यूटी पर लगे प्रशासनिक अधिकारी और सुरक्षाकर्मी भी कोविड की चपेट में आकर जान गवां रहे हैं. बदायूं के उप मुख्य चिकित्साधिकारी डॉक्टर अवधेश की भी पंचायत चुनाव में ड्यूटी लगी थी. अमर उजाला अखबार लिखता है कि इसी चुनाव के दौरान अवधेश संक्रमित हुए और उनकी मौत हो गई.
Panchayat Election बुलंदशहर के टीचर ने ये तस्वीर भेजी है. साफ दिखता है कि सोशल डिस्टेंसिंग नहीं है.
इस मामले पर टीचर्स और कर्मचारी संघों का क्या कहना है? इस पूरे मामले पर उत्तर प्रदेशीय प्राथमिक शिक्षा संघ ने एक पत्र यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ और राज्य निर्वाचन आयुक्त को भेजा है. इस पत्र में सीएम से मतगणना रोकने की गुहार लगाई गई है. कहा गया है कि 706 टीचर मर चुके हैं, बाकी डरे हुए हैं. सभी चाहते हैं कि वोटों की गिनती को रोका जाए.

UP Covid 19 Deceased

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"मैं अभी तक सरकार और चुनाव आयोग को तीन चिट्ठी लिख चुका हूं. कोई जवाब नहीं. किसी ने कोई बात नहीं की अभी तक. टीचरों का चुनावों के लिए प्रशिक्षण हुआ, वहां भीड़ जमा हुई, फिर पोलिंग पार्टियों को रवाना किया गया, वहां भीड़ जमा हुई, फिर वोटिंग हुई. अब मतगणना होगी. ये चुनाव EVM से तो हुए नहीं हैं. हर वोट गिना जाएगा. हर उम्मीदवार के लोग मौके पर होंगे. किसी टीचर को ना तो वैक्सीन लगवाई गई और ना ही टेस्टिंग की व्यवस्था कराई गई. अभी तक 706 टीचरों की मृत्यु हो चुकी है. सैंकड़ों टीचर बीमार हैं. जाने क्या होगा अब."
"अभी तक राज्य सरकार के 800 से अधिक कर्मचारी पंचायत चुनाव में अपनी जान गवां चुके हैं. हमने सरकार और निर्वाचन आयोग दोनों से गुहार लगाई लेकिन कोई रिस्पॉन्स नहीं आया. अब हमारे पास यही ऑप्शन है कि 'जान है तो जहान है' वाले फॉर्मूले पर चलते हुए मतगणना से इनकार कर दें. जान से बड़ी थोड़े ही है नौकरी. हर उस विभाग के लोगों ने जान गंवाई है जिनकी ड्यूटी चुनावों में लगी थी. चुनाव के कारण कर्मचारियों के घरों तक बीमारी पहुंच गई है. लोग मर रहे हैं."

संगठन के अध्यक्ष दिनेश चंद्र शर्मा ने 'दी लल्लनटॉप' को फोन पर बताया, इस मामले में 'दी लल्लनटॉप' ने राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश अध्यक्ष हरि किशोर तिवारी से भी बात की. उन्होंने कहा, विपक्षी पार्टियों का क्या कहना है? पंचायत चुनावों के दौरान हो रही मौतों का मुद्दा प्रदेश की तीनों बड़ी विपक्षी पार्टियों सपा, बसपा और कांग्रेस ने उठाया है. समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने ट्वीट किया,
"पंचायत चुनावों में इलेक्शन ड्यूटी में जिन अधिकारियों, शिक्षकों व कर्मचारियों की मृत्यु कोरोना संक्रमण से हुई है उनके परिवारों को उप्र सरकार तत्काल 50 लाख की सहायता राशि प्रदान करे. भाजपा सरकार सुरक्षा दे अन्यथा सरकारी कर्मी व शिक्षक मतगणना का बहिष्कार करने पर बाध्य हो जाएंगे."
https://twitter.com/yadavakhilesh/status/1387685198318297088
बसपा अध्यक्ष मायावती ने अपने 3 ट्वीट में लिखा,
"कोरोना के बढ़ते प्रकोप के चलते यदि यू.पी. सरकार पंचायत चुनाव टाल देती, अर्थात् थोड़ा आगे बढ़ा देती तो यह उचित होता और फिर चुनाव डयूटी में लगे काफी कर्मचारियों की मृत्यु नहीं होती, जो अति-दुःखद."
"यू.पी. सरकार ऐसे सभी मृतक कर्मचारियों के आश्रित परिवार को उचित आर्थिक मदद करने के साथ ही उनके एक सदस्य को सरकारी नौकरी भी जरूर दे, बीएसपी की यह मांग."
"इसके साथ ही, अब कोरोना प्रकोप के गांव-देहातों में भी काफी फैलने की सम्भावना है. ऐसी स्थिति में यू.पी. सरकार शहरों के साथ-साथ देहातों में भी कोरोना की रोकथाम के लिए जरूरी कदम उठाए, बी.एस.पी. की यह सलाह."
Mayawati बसपा सुप्रीमो मायावती का ट्वीट

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी इस मुद्दे को उठाया. उन्होंने लिखा,
"यूपी पंचायत चुनावों की ड्यूटी में लगे लगभग 500 शिक्षकों की मृत्यु की खबर दुखद और डरावनी है. चुनाव ड्यूटी करने वालों की सुरक्षा का प्रबंध लचर था तो उनको क्यों भेजा? सभी शिक्षकों के परिवारों को 50 लाख रु मुआवाजा व आश्रितों को नौकरी की मांग का मैं पुरजोर समर्थन करती हूं."
https://twitter.com/priyankagandhi/status/1387709862306480129 सुप्रीम कोर्ट में पहुंचा मामला पंचायत चुनाव के नतीजे 2 मई को आने हैं. उससे दो दिन पहले यानी 30 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है. याचिका में मतगणना पर रोक लगाने की मांग की गई है. इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार और यूपी निर्वाचन आयोग को नोटिस दिया है. 1 मई को इस मामले पर सुनवाई होगी. सरकारी पक्ष क्या है? इस पूरे मामले में आधिकारिक जानकारी लेने के लिए ‘दी लल्लनटॉप’ ने यूपी चुनाव आयोग की वेबसाइट पर दिए नंबरों पर कॉल किए. फोन उठा नहीं. इलेक्शन कमिश्नर मनोज कुमार के मोबाइल नंबर पर भी कॉल किया लेकिन उन्होंने भी फोन नहीं उठाया. अगर उनका पक्ष आता है तो उसे ख़बर में अपडेट किया जाएगा. आपको बता दें कि 28 अप्रैल को भी इस मुद्दे पर हमने खबर की थी, तब ये पता चला था कि एडिशनल इलेक्शन कमिश्नर वेद प्रकाश वर्मा और सचिव जय प्रकाश सिंह, दोनों कोविड पॉजिटिव हैं.

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