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आइए, आपको डोनाल्ड ट्रंप की ससुराल घुमा लाते हैं

इजराइल से मनुष्का की अगली किस्त आ गई है, आज नदी, पहाड़ और पानी के बीच चलने की बारी है.

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फोटो - thelallantop
मनुष्का
मनुष्का

हम हमेशा उसी टीचर से सबसे ज्यादा प्यार करते हैं, जो हमें खूब बड़ी-बड़ी बातें चुटकियों में समझा देता है. मनुष्का उसी टीचर जैसी हैं. वैसे असल में टीचर नहीं हैं, वैज्ञानिक हैं. सुनकर घबराने की जरूरत नहीं हैं, क्योंकि जो लिखती हैं, बड़ी मोहब्बत से लिखती हैं. उन्होंने जर्मनी से PhD की है और अभी इजराइल के टेल अवीव में कैंसर जीन थेरेपी पर रीसर्च कर रही हैं. पहाड़ों, पेड़ों, झीलों और नदियों से बेइंतेहा प्यार है इन्हें.

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दुनिया के लड़ाई-झगड़े इनके जरा भी पल्ले नहीं पड़ते, इसलिए जो भी देखती हैं, सब खूबसूरत ही देखती हैं. देश-दुनिया के किस्सों और हेल्दी नुस्खों के लिए इन्हें थैंक्स बोलना मत भूलिएगा.

इस बार किस्त आई है स्लोवेनिया की राजधानी ल्युब्लियाना से. मनुष्का वहां घूमने गईं थी. वहां खूब मौज किया है. और अपना एक्सपीरियंस लिख डाला है. आपके और हमारे लिए.

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शरणार्थी शब्द से तो आप परिचित ही होंगे. रोज़मर्रा की चर्चा में रहता है. नहीं समझे तो अंग्रेजी में इसे इमिग्रेंट्स कहते हैं. अमेरिका के करीब 4 सौ साल के इतिहास से जान लें कि जो लोग भी बसे, वो अप्रवासी थे, इसीलिए इन्हें 'इमिग्रेंट' देश भी कहा जाता है. यहां यूरोप, अफ्रीका, चीन जगह-जगह से समय-समय पे लोग आए और बसे. हाल ही में ज़ोर-शोर से अमरीकी चुनाव हुए. माननीय डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा कि ज़्यादातर अपराध, रेप करने वाले बाहर से आए हुए शरणार्थी हैं (इशारा मेक्सिकन्स पे था). ये भी कहा कि चीनी और भारतीय 'अमेरिकन्स' की नौकरी चुरा रहे हैं.
जीत भी गए. पर मज़ेदार बात ये है कि उनके दादा/दादी और नाना/नानी चारों यूरोप से आए. पहली बीवी चेक रिपब्लिक से हैं और दूसरी भी विदेशी हैं. आते हैं तीसरी पर यानी मेलानिया ट्रम्प. मिशेल ओबामा की जगह लेंगी व्हाइट हाउस में. मॉडल रह चुकीं मेलानिया की पैदाइश एक छोटे से देश स्लोवेनिया की है. इन्हें अमेरिका की नागरिकता ट्रम्प से शादी करने के बाद 2006 में मिली. वही स्लोवेनिया जहां की सैर करने वाले हैं आप मेरे साथ.
स्लोवेनिया यूरोप में स्थित छोटा सा देश है. एरिया में मिजोरम जितना बड़ा और जनसंख्या हमारे शहर विशाखापत्तनम जितनी यानी करीब 20 लाख. 2012 में दो दोस्त बने स्लोवेनिया से. 'बिली और याका'. दोनों जर्मनी से आए थे और हम साथ काम करते थे. तब से जाने का मन था. पर जाना हुआ इस साल जून में. ये रहा वहां के एक शहर मारीबोर का रेलवे स्टेशन. ऐसा लगता है समय थम गया.
मारीबोर का रेलवे स्टेशन. फोटो क्रेडिट: मनुष्का

मेरा बचपन देहरादून में बीता है. तभी से पहाड़ जहां होते हैं वहां घर जैसा महसूस होता है. मेरे दोस्त रहते हैं स्लोवेनिया की राजधानी ल्युब्लियाना में. इनके घर पहुंची. इनके किसी भी कमरे से देखो तो चारों तरफ छोटे-छोटे पहाड़. दिल खुश हो गया पहुंचते ही. हम पैदल एक छोटे पहाड़ पर चढ़ के ल्युब्लियाना दुर्ग पहुंचे. वहां से शहर कुछ ऐसा दिखता है.
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ल्युब्लियाना शहर. फोटो क्रेडिट: मनुष्का

शाम को खाने का प्लान बना तो बताया गया कि एक मेला लगा है. दुनिया के विभिन्न पकवानों का. वहां चल के खाया जाए. थाई, तुर्किश, ब्राज़ील तमाम जगह के व्यंजन थे. और अंत में दिखा मसाला डोसा. ले दे के मेरी सुई अटकी तो डोसे पर. चूंकि उनके दोस्त भी आ गए थे, सब खूब हंसे कि भारतीय दोस्त इतनी दूर से हमारे देश आई है डोसा खाने. मेरे साथ उन चारों ने भी डोसा ही खाया. मीठे में उन्होंने अपना फ़ेवरेट Crêpes- Palačinke क्रेप्स खिलाया. वाकई क्या स्वाद था. नारियल की क्रीम, चॉकलेट और स्ट्रॉबेरी सॉस के साथ रोमियो कैफ़े का क्रेप्स. अगर आप कभी ल्युब्लियाना गए तो क्रेप्स ज़रूर-ज़रूर खाइएगा.
विदेशों में सफाई का खास ख्याल रखा जाता है, सो यहां भी दिखा. इतनी हरियाली होने की वजह से राजधानी लुब्ल्याना को यूरोपियन ग्रीन कैपिटल 2016 पुरस्कार से नवाज़ा गया है.
अगले दिन हम एक घंटे ड्राइव कर के एक खूबसूरत झील पहुंचे. लेक ब्लेड (Lake Bled). इसी की तस्वीर को देख के मेरा मन यहां आने का हुआ था. झील के बगल में एक पहाड़ पर स्थित एक और किले पर हम जा पहुंचे. जहां से नज़ारा परियों की कहानी जैसा था. झील के बीचों-बीच एक टापू, जिस पर पुराना चर्च है.

लेक ब्लेड की एक तस्वीर. फोटो क्रेडिट- मनुष्का

फिर हम चल पड़े बोहिंय नदी (sava Bohinj) के साथ-साथ उसके उद्गम स्थल की ओर. नदी का पारदर्शी पानी, पहाड़ों से गुज़रती राहें, दोनों तरफ हरे-भरे पेड़. एक सेकंड को लगा सपना देख रही हूं. स्लोवेनिया के बारे में मुझे ज़्यादा लिखने की ज़रूरत ही नहीं, तस्वीरें अपने आप खूबसूरती बयां करती हैं.
हमने बोहिंय झील पहुंच के गाड़ी पार्क की. एक घंटे पहाड़ पर हाइक कर बोहिंय नदी के उद्गम स्थल 'सवीस' झरने तक पहुंचे. स्लोवेनिया की सबसे ऊंची पहाड़ियों पर स्थित ट्रीग्लाव ग्लेशियर पिघलने पर बोहिंय नदी बनाता है. देख के अंदाज़ा नहीं लग रहा होगा पर असल में कुतुब मीनार जितनी ऊंचाई से गिरती है ये धाराएं.

'सवीस' झरना. फोटो क्रेडिट: मनुष्का
अगले दिन हमारा पड़ाव 10 लाख साल पुरानी और 24 किलोमीटर लंबी अद्भुत गुफा Postojna Cave थी. पर्यटकों के लिए सिर्फ 5 किलोमीटर ही खुली है. और अंदर ले जाती है ट्रेन जो हर घंटे चलती है. नदी में लाइमस्टोन या चूना मिला हो तो उसके सालों टपकने से विभिन्न संरचना बनती हैं. लाइमस्टोन ऊपर से टपकने की वजह से Stalactite और नीचे से ऊपर की और बढ़े तो Stalagmite कहा जाता है. ऊपर और नीचे बने स्ट्रक्चर जब मिल जाते हैं तो स्तम्भ बनाते हैं.
मैं इस से पहले जर्मनी की अट्टा गुफा भी गई हूं. लेकिन इतनी बड़ी संरचनाएं कभी नहीं देखी. हमें बताया गया कि 1 मिलीमीटर बनने में 10 साल लगते हैं. और अगर इन पे हाथ लगाओ तो इनका बढ़ना रुक जाता है. इनके कई रंग भी हो सकते हैं. जैसे अगर पानी में लोहा मिला हो तो लालिमा ले लेते हैं. ग्लोबल वॉर्मिंग की वजह से गुफा में भी गर्मी बढ़ गई है. जिसके चलते अब इन पर काई जमने लगी है. और कई संरचनाओं का बढ़ना रुक गया है.

Postojna Cave की तस्वीर. फोटो क्रेडिट: मनुष्का
कुदरत से बड़ा कोई कलाकार नहीं हो सकता. कुछ 10 किलोमीटर दूरी पर एक पहाड़ है. उस पहाड़ के बीचों-बीच एक छोटा किला है- Predjama Castle . देख के ऐसा लगता है कि पहाड़ के अंदर से निकल रहा है. 3 मंज़िल ऊंचा, ये किला 15वीं शताब्दी के पहले का बना है. नीचे से एक पानी की धारा भी गुज़रती है. यहां लोगों के घर बहुत साफ़-सुथरे होते हैं. घर छोटा और पेड़ पौधों की जगह खूब होती है चारों तरफ.

कुछ ऐसा दिखता है Predjama Castle. फोटो क्रेडिट: मनुष्का

अगले दिन हम गए दक्षिण-एड्रियाटिक समुद्र की ओर. कुल मिला कर स्लोवेनिया का समुद्र तट 20 किलोमीटर है. एक तरफ इटली और दूसरी तरफ क्रोएशिया. खाया-पिया, समुद्र किनारे घूमे, डूबते सूरज को नमन किया. अब चलने का समय हो चला था. वापस ल्युब्लियाना आए. सामान पैक किया. और ट्रैन पकड़ने से पहले एक आखिरी बार स्लोवेनिया का मशहूर क्रेप्स अपने दोस्तों के साथ खा के इस सुन्दर देश को अलविदा कहा.
मेलानिया ट्रम्प का देश स्लोवेनिया और वहां के लोगों से मिलने का अनुभव अच्छा रहा. प्रकृति से शांत लोग लगे. उम्मीद करती हूं डोनाल्ड ट्रम्प जी का भी मन थोड़ा शांत हो तो देश दुनिया के लिए भी अच्छा रहेगा.
ख्वाला (स्लॉवेनियन भाषा में  Thank you)


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