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8 मिनट में लाहौर, 12 में बीजिंग, चीन-पाकिस्तान की नींद उड़ाने वाली भारत की हाइपरसोनिक मिसाइल

Project Vishnu: DRDO जल्द ही ET‑LDHCM हाइपरसोनिक स्टेल्थ क्रूज मिसाइल का परीक्षण करेगा. Mach 8 (11,000 किमी/घंटा) की रफ्तार, 1500+ किमी की रेंज, और स्टेल्थ तकनीक से लैस यह मिसाइल मिल जाने के बाद भारतीय सेना पाकिस्तान और चीन के किसी भी शहर को बिना सीमा पार किए निशाना बना सकती है.

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भारत की नई मिसाइल: तेज़, स्टेल्थ और न्यूक्लियर, डर लाज़िमी है (फोटो- DRDO)

कल्पना कीजिए कि दिल्ली से एक मिसाइल दागी जाती है. मिसाइल जिसमें ना तो आवाज है, ना कोई रोशनी. ये हिन्दुस्तान मिसाइल महज़ 8 मिनट में दिल्ली से लाहौर और 12 मिनट में बीजिंग पहुंच जाती है. मजे की बात ये कि दुश्मन को इसके आने की भनक तक नहीं लगती. ना रडार इस पकड़ पाता है. ना दुश्मन अलार्म बजा कर किसी को सावधान कर पाता है. मिसाइल अचानक से जाकर धप्पा मारती है और दुश्मन की सरजमीं पर फट पड़ती है. 

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अब इतना सब जान लेने के बाद आप दबंग स्टाइल में करेंगे कि ‘परिचय नहीं कराएंगे हमारा…’ तो जनाब, पेश ए खिदमत है, भारत की हाइपरसोनिक, स्टेल्थ मिसाइल. जिसका नाम है - ET‑LDHCM.  पूरा नाम थोड़ा भारी है - Extended Trajectory - Long Duration Hypersonic Cruise Missile. लेकिन असर?  खामोश, क़ातिलाना और एकदम सटीक, बोले तो सर्जिकल स्ट्राइक की तरह.

ये मिसाइल खास क्यों है?

बात सीधी सी है. यह कोई आम मिसाइल नहीं है.  यह हाइपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल है. यानी ऐसी मिसाइल जो आवाज की स्पीड से 8 गुना तेज़ उड़ती है. अपने दुश्मन को जवाब देने का वक्त ही नहीं देती. और हवा में ऐसे बल खाती हुई उड़ती है, जैसे सांप रेत पर (वैसे डिफेंस जगत की भाषा में इस करतब को "मैनुवरबिलिटी" (Manoeuvrability) कहते हैं.

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चलो इन्ट्रोडक्शन हो गया? अब जरा जल्दी-जल्दी इस मिसाइल से जुड़े कुछ Frequently Asked Questions यानी अक्सर पूछे जाने वाले सवालों का जवाब जान लेते हैं.

  • गति कितनी है? 11,000 किलोमीटर प्रति घंटा
  • रेंज कितनी है? 1500 किलोमीटर से ज्यादा
  • वॉरहेड क्या ले जा सकती है? 1000 से 2000 किलो का बम (चाहे न्यूक्लियर वॉरहेड हो या नॉर्मल गोला बारूद कोई फर्क नहीं पड़ता)

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दुश्मन इसके आगे कहां टिकता है?

ET‑LDHCM उड़ती है बहुत कम ऊंचाई पर, यानी Low Altitude. इससे कई फायदे होते हैं. मिसाल के तौरपर- दुश्मन का रडार इसे पकड़ ही नहीं पाता, दुश्मन का एयर डिफेंस सिस्टम को धोखा खा जाता है और जब तक कोई समझे कि हुआ क्या… तब तक खेल खतम- पैसा हजम. मतलब टारगेट तबाह. और अगर न्यूक्लियर वॉरहेड यानी परमाणु हथियार लगा हो तो वो इलाका नक्शे से ही गायब.

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इस मिसाइल की पहुंच कहां तक है, इसे इसी बात से समझा जा सकता है कि पाकिस्तान के हर शहर को यह मिसाइल दिल्ली, अंबाला या जोधपुर से उड़कर हिट कर सकती है. सिर्फ इतना ही नहीं चीन का बड़ा हिस्सा यानी चेंगदू, युन्नान और यहां तक कि बीजिंग भी इसकी रेंज में है.

कहां बनी ये मिसाइल?

यह पूरी तरह से स्वदेशी मिसाइल है. जो बनाई गई है DRDO के हैदराबाद वाले मिसाइल कॉम्प्लेक्स में. साथ में लगे हैं - भारत डायनामिक्स लिमिटेड, L&T, और कुछ खास प्राइवेट इंडस्ट्री पार्टनर्स. इस पूरे प्रोजेक्ट का नाम है- Project Vishnu

टेस्ट कब होगा?

DRDO की वेबसाइट के मुताबिक  2025 के अंत तक इसका पहला परीक्षण करने की तैयारी में है.  ओडिशा के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप (पहले का व्हीलर आइलैंड) से इसे टेस्ट किया जाएगा. पहले इसके कुछ टेक्निकल पार्ट्स का टेस्ट किया गया है - जैसे Scramjet इंजन, Trajectory Systems, Guidance Mechanism वगैरह.

मिसाइल में क्या-क्या है?

अब इतना सब जान लिया है तो कुछ तकनीकी डिटेल्स भी जान ही लेते हैं.

तकनीककाम
Scramjet इंजनहवा से ही ऑक्सीजन खींचकर उड़ता है, फ्यूल वेस्ट नहीं करता
Stealth Designरडार में नहीं आता, लोकेशन का पता नहीं चलता
Mid-Course Correctionउड़ते-उड़ते रास्ता बदल सकता है, टारगेट लॉक रहता है
न्यूक्लियर कैपेबिलिटीअगर परमाणु हथियार लगाना हो, तो लगा दो

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इस मिसाइल से क्या बदलेगा?

अब तक भारत के पास थीं- ब्रह्मोस, अग्नि, पृथ्वी जैसी मिसाइलें. जो कि कम घातक नहीं हैं. लेकिन ET‑LDHCM एकदम अगली पीढ़ी की मिसाइल है. इसमें कई सारी सुपर पावर्स हैं. मिसाल के तौरपर-

  • सिर्फ रिएक्ट नहीं करती, पहला वार भी कर सकती है
  • LOC या LAC पार किए बिना, सीधे घर में घुसकर मारती है
  • यह बताती है कि भारत अब सिर्फ ताकतवर नहीं, चालाक भी हो चुका है
बात खत्म ऐसे होती है...

ये मिसाइल है, मगर पुराने ज़माने वाली नहीं.  ये रडार में नहीं आती, रास्ते में नहीं रुकती और दिमाग से ज्यादा तेज है. यह साइंस फिक्शन नहीं है. यह भारत का नया रियलिटी चेक है- पाकिस्तान और चीन के लिए. 

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