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2.4 लाख करोड़ रुपये का कर्जा कैसे चुकाएगा अडानी ग्रुप?

साल 2013 में अडानी ग्रुप की कंपनियों का कुल ऑपरेटिंग प्रॉफिट करीब ढाई हजार करोड़ रुपये था. ये 2022 तक बढ़ते-बढ़ते करीब साढ़े 14 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया. पिछले फाइनेंशियल ईयर यानी साल 2023-24 में ये करीब 83 हजार करोड़ हो गया.

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अडानी ग्रुप को भारतीय बैंकों और दूसरे वित्तीय संस्थानों से 88 हजार करोड़ से ज्यादा कर्ज मिल चुका है. (फोटो- PTI)

भारत के अलग-अलग बैंक और दूसरे वित्तीय संस्थान मिलकर अडानी ग्रुप को अब तक 88 हजार करोड़ से ज्यादा कर्ज दे चुके हैं. ये अडानी ग्रुप को मिले कुल कर्ज का सिर्फ 36% है. इसके अलावा ग्रुप ने 1 लाख 40 हजार करोड़ रुपये का कर्ज विदेशी सोर्स से भी लिया है. इन सब को मिला दें तो 31 मार्च, 2024 तक अडानी ग्रुप पर 2 लाख 41 हजार करोड़ रुपये का कर्ज था. कर्ज कितना बड़ा है, इसका अंदाजा आप इस बात से लगाइए कि ये राशि उत्तर प्रदेश के पिछले तीन सालों में लिए गए कर्ज के योग के बराबर है. ऐसे में कई सवाल  बनते हैं. जैसे- 

- पिछले सालों में अडानी को कितना कर्ज मिला? 
- कौन से भारतीय बैंक हैं, जिन्होंने अडानी ग्रुप पर बड़ा दांव लगा रखा है? 
- और सबसे जरूरी सवाल ये कि अडानी ग्रुप की कंपनियों का क्या हाल है. मतलब कर्ज जो लिया है, वो चुका लेगी ना? या नहीं? 

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पैसे की उधारी

साल 2023-24 तक अडानी ग्रुप ने करीब 2 लाख 41 हजार करोड़ का कर्ज लिया है. इन्हें दो हिस्सों में बांटा जा सकता है.

पहला, लॉन्ग टर्म लोन

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लॉन्ग टर्म लोन माने वो लोन जिसे वापस करने की अवधि 1 साल से ज्यादा होती है. ऐसे लोन अक्सर कंपनियां बिजनेस बढ़ाने या किसी नए प्रोजेक्ट को शुरू करने के लिए लेती हैं. अडानी ग्रुप के कुल कर्ज का 92% यानी 2 लाख 22 हजार करोड़ रुपया इसी रूप में लिया गया है.

दूसरा, वर्किंग कैपिटल लोन

माने वो लोन जिसे वापस करने की अवधि 1 साल से कम होती है. इस कर्ज का इस्तेमाल अक्सर कंपनियां अपने रोजमर्रा के काम, जैसे कर्मचारियों को सैलरी देने या रेंट चुकाने के लिए करती हैं. और आमदनी होते ही इस कर्ज को चुका देती हैं. अडानी के केस में कुल कर्ज का 8% यानी करीब 19 हजार करोड़ रुपये इसी तरह के लोन में है.

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अब सवाल ये है कि अडानी ग्रुप ने लॉन्ग टर्म लोन किन अलग-अलग सोर्स से जुटाए? तो, सबसे ज्यादा पैसा अडानी ग्रुप ने भारतीय बैंकों से जुटाया है. तकरीबन 75 हजार 800 करोड़ रुपये. इसमें भी अडानी ग्रुप को सबसे ज्यादा उधार स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) से मिला. इसके अलावा एक्सिस बैंक, ICICI, PNB और यस बैंक ने भी अडानी ग्रुप को समय-समय पर बड़े-बड़े लोन मंजूर किए हैं. 

लॉन्ग टर्म लोन के रूप में विदेशी बैंकों ने भी करीब 61 हजार करोड़ रुपये कर्ज दिए हैं. इसके अलावा अडानी ग्रुप ने काफी बड़ा अमाउंट कैपिटल मार्केट से भी उठाया है. कैपिटल मार्केट से पैसा उठाने के लिए बांड्स इश्यू किए जाते हैं. बॉन्ड में पैसा भुगतान की तारीख लिखी होती है. बॉन्ड खरीदने वाले को मूलधन के साथ निर्धारित ब्याज भी दिया जाता है. CNBC की रिपोर्ट के मुताबिक, अडानी ग्रुप ने भारतीय कैपिटल मार्केट से तकरीबन 12 हजार करोड़ रुपये और विदेशी कैपिटल मार्केट से 69 हजार करोड़ रुपये जुटाए. ये तो हुई बात लॉन्ग टर्म लोन की.

अब समझते हैं वर्किंग कैपिटल लोन की. तो जैसा आपको पहले बताया था कि अडानी ग्रुप पर करीब 19 हजार करोड़ रुपये का कर्ज, वर्किंग कैपिटल लोन के फॉर्म में भी है. लॉन्ग टर्म लोन की तरह ही वर्किंग कैपिटल लोन का भी सबसे बड़ा चंक, यानी करीब 12 हजार 223 करोड़ रुपये भारतीय बैंकों से ही जुटाया गया है. बाकी 7 हजार करोड़ रुपये तो कई अन्य ‘छोटे-मोटे सोर्स’ से जुटा लिए गए हैं.  

अगस्त 2024 में CNBC में एक रिपोर्ट छपी. इसके मुताबिक, अभी तक SBI ने अडानी ग्रुप को करीब 27 हजार करोड़ रुपये का कर्ज दिया है. करीब 9 हजार 200 करोड़ रूपये का कर्ज एक्सिस बैंक ने और 7 हजार करोड़ रूपये का कर्ज PNB ने दिया है. बैंकों के अलावा, अडानी ग्रुप ने LIC से भी 5 हजार 790 करोड़ रुपये का कर्ज लिया है.

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अडानी ग्रुप पर बैंकों के कर्जे.

आखिर क्या वजहें हैं कि भारत के बैंक और वित्तीय संस्थान ही नहीं, बल्कि विदेशी NBFCs भी अडानी पर इतने बड़े-बड़े दांव लगा रहे हैं? इसका उत्तर मिलेगा अडानी ग्रुप की कंपनियों की वित्तीय स्थिति जानकर.

फाइनेंशियल्स पैरामीटर्स क्या कहते हैं?

बेसिक लेवल पर किसी कंपनी की परफॉर्मेंस का आंकलन करने के लिए ‘फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स’ कुछ बेसिक पैरामीटर्स देखते हैं. जैसे प्रॉफिट और सेल्स कितनी है, सालाना इनमें कितनी बढ़त हो रही है, कंपनी के शेयर्स का क्या हाल है, आदि. तो चलिए सबसे पहले अडानी ग्रुप की कंपनियों का प्रॉफिट और सेल्स जान लेते हैं.

कंपनियों का हाल जानने के लिए अक्सर दो तरीके के प्रॉफिट कैलकुलेट किए जाते हैं. 

ऑपरेटिंग प्रॉफिट

ऑपरेटिंग प्रॉफिट का कैलकुलेशन आसान है. साल भर में कुल कमाई से कुल खर्च घटा दो. साल 2013 में अडानी ग्रुप की कंपनियों का कुल ऑपरेटिंग प्रॉफिट करीब ढाई हजार करोड़ रुपये था. ये 2022 तक बढ़ते-बढ़ते करीब साढ़े 14 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच गया. पिछले फाइनेंशियल ईयर यानी साल 2023-24 में ये करीब 83 हजार करोड़ हो गया. माने एक दशक में ऑपरेटिंग प्रॉफिट 33 गुना बढ़ गया. 

नेट प्रॉफिट

अब प्रॉफिट के दूसरे पैमाने नेट प्रॉफिट का हाल भी जान लेते हैं. ऑपरेटिंग प्रॉफिट से टैक्स, कर्ज की EMI जैसे खर्च घटने के बाद जो असल बचत होती है उसे नेट प्रॉफिट कहते हैं. साल 2009 में अडानी ग्रुप का नेट प्रॉफिट करीब 500 करोड़ रुपये था. ये 2024 में 30 हजार करोड़ के पार हो गया. यानी सिर्फ 15 साल में नेट प्रॉफिट 60 गुना बढ़ा.

ये तो हुई प्रॉफिट की बात. अब समझते हैं अडानी ग्रुप के शेयर्स का क्या हाल है.

अडानी ग्रुप के शेयर

अडानी ग्रुप की बड़ी कंपनियों नजर डालते हैं. ग्रुप की पेरेंट कंपनी अडानी इंटरप्राइजेज को जनवरी 1999 में स्टॉक मार्केट में लिस्ट किया गया था. तब इसके एक शेयर का दाम 6 रुपये था. 27 अगस्त 2024 को इसके शेयर की वैल्यू 3070 रुपये है. यानी 25 सालों में 50,620 फीसदी की बढ़त हुई. 

अडानी ग्रुप की एक और कंपनी है. अडानी पोर्ट्स. साल 2007 में ये कंपनी स्टॉक मार्केट में लिस्ट हुई. महज 17 सालों में इसके शहर का भाव 700 परसेंट बढ़ा है. 

अगली कंपनी का उदाहरण तो और भी इंटरेस्टिंग हैं. अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड. कंपनी जून 2018 में लिस्ट हुई. मात्र 6 साल में इस कंपनी के शेयर प्राइस करीब 6300 फीसदी बढ़े हैं. 29 रुपये का शेयर आज 1883 रुपये का है. इसके अलावा भी कुछ और भी है, जिससे पता चलता है कि कंपनी कर्ज चुकाने में सक्षम है. 

ये भी पढ़ें- अडानी ग्रुप में निवेश करने वाली कंपनी का लाइसेंस रद्द हुआ, करोड़ों पैसे लगाए थे

आप जब भी कर्ज के लिए आवेदन करते हैं. तब सबसे पहले बैंक आपकी आमदनी और आपकी संपत्ति के बारे में जानकारी इकट्ठा करता है. स्वाभाविक है, बिना आमदनी के कर्ज चुकाया तो नहीं जा सकता है. वैसे ही कंपनियों के साथ भी किया जाता है. इसके लिए कंपनी के प्रॉफिट के मुकाबले कंपनी पर कितना कर्ज है, इसे कैलकुलेट किया जाता है. इसे डेट टू EBITA अनुपात कहते हैं. EBITA यानी Earnings before interest, taxes, and amortization. इसको आप ऑपरेटिंग प्रॉफिट भी कह सकते हैं.

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अडानी ग्रुप की कंपनियों का डेट टू EBITA अनुपात.

किसी कंपनी के लिए ये अनुपात जितना कम हो, उतना अच्छा होता है. पिछले पांच सालों में अडानी ग्रुप की कंपनियों का डेट टू EBITA अनुपात लगातार घटा है. इसी की बात करते हुए गौतम अडानी ने 19 अगस्त को ये दावा किया कि ग्रुप के पास मौजूदा समय में इतना कैश है कि वे अगले 30 महीने की तक कर्ज की भरपाई कर सकते हैं.

वीडियो: नई हिंडनबर्ग रिपोर्ट के बाद विपक्ष ने SEBI-अडानी को बुरी तरह घेरा, कांग्रेस-AAP नेता क्या बोले?

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