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स्वीमिंग पूल में लोगों को डालकर कंरट लगाकर मारने वाले तानाशाह को उम्रकैद

इस पूर्व प्रेसिडेंट पर 40 हजार लोगों की हत्या का आरोप है.

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फोटो - thelallantop
ऋषभ
ऋषभ

ये स्टोरी ऋषभ श्रीवास्तव ने लिखी है. दी लल्लनटॉप के साथ काम कर रहे हैं. चाड के तानाशाह हिसेन हबरे को उम्र कैद की सजा मिली है. हजारों मौत के लिए जिम्मेदार हैं. कहते हैं कि हबरे दुनिया के सबसे खूंखार तानाशाहों में से एक है. जिसका कभी अमेरिका ने भी दिया था साथ. ये बंदा गद्दाफी के खिलाफ लड़ा और जीता था. पढ़िए पूरी कहानी.


 
हिसेन हबरे. जिसका नाम सुनते ही अफ़्रीकी देश चाड के लोगों के मन में दहशत और नफरत एक साथ फैल जाती है. हिसेन हबरे का नाम उन तमाम खूंखार लोगों की लिस्ट में शामिल है, जिसमें कभी हिटलर, पोलपोट, गद्दाफी, पिनोचेट जैसे लोग शामिल थे. ये हैवान सालों साल तक हर नस्ल के लोगों द्वारा मुंह पर थूके जाने लायक है. इसी बात को ध्यान में रखकर अफ्रीकन यूनियन ने 54 लोगों की एक कमेटी बनाई. कमेटी ने हिसेन हबरे को सेनेगल की राजधानी डकार में कोर्ट लगाकर उम्रकैद की सजा सुनाई है.
पहली बार ऐसा हुआ है कि किसी देश के पूर्व प्रेसिडेंट को किसी दूसरे देश में कोर्ट लगाकर सजा सुनाई गई हो.  हबरे ने 1982-90 के अपने शासन के दौर में बेगुनाह लोगों के साथ दरिंदगी की थी. इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट हबरे को सजा नहीं सुना सकता था, क्योंकि वो 2002 के बाद के केस देखता है. जिसके चलते हिसेन हबरे छुट्टा घूम रहा था. पर चाड, अफ्रीकन यूनियन, यूरोपियन यूनियन और अमेरिका ने 800 करोड़ रुपये खर्च कर 2013 से हबरे पर केस चलाया. एक खूंखार अपराधी के लिए पहली बार इतने सारे देशों ने आपसी सहमति से पूरी न्यायिक प्रक्रिया को पूरा किया.
दुनिया के कई देशों जैसे साउथ सूडान, इराक, सीरिया में इंसानियत का खून करनेवाले राजनेता मौजूद हैं. वो अपने रसूख और देश के कमजोर कानून का इस्तेमाल कर बच जाते हैं. ऐसे में इस मुकदमे ने नई नज़ीर पेश की है. 
दुखद बात ये है कि हबरे पश्चिमी देशों के कालोनियलिज्म की पैदाइश है. 1942 में पैदा हुए हबरे ने अफ्रीका में फ्रांस की हुकूमत को देखा था. वो बड़ा हो रहा था और अफ्रीका में मूल निवासियों पर अत्याचार हो रहे थे. उसने सब देखा और किसी को नहीं पता कि उसने क्या सीखा था. पर वो पढ़ने में अच्छा था.
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फ़्रांसीसी एडमिनिस्ट्रेशन में उसने नौकरी भी की. बाद में उसे स्कॉलरशिप मिली और वो पॉलिटिकल साइंस पढ़ने फ्रांस गया. लौट कर उसने पड़ोसी देश लीबिया की राजधानी त्रिपोली में क्रांतिकारियों की सेना को जॉइन कर लिया. ये लोग चाड की सीमा पर लड़ाई करते थे. बाद में उन लोगों से ही लड़-झगड़कर इसने अपनी अलग आर्म्ड फोर्सेज ऑफ़ नार्थ बना ली. उसमें वो अपने मूल के तूबू लोगों को भर्ती करता था. वो लोग सीधे-साधे अनपढ़ गरीब लोग थे.
हबरे दुनिया की नजर में तब आया जब उसने 1974 में यूरोपियन लोगों को बॉर्डर पर अगवा किया और फिरौती की मांग की. फ़्रांसीसी सरकार के दखल के बाद लोगों को छोड़ा गया. चाड में हबरे का प्रभावबढ़ने लगा. वहां पर उस समय भी तानाशाही थी. मलूम वहां का प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति दोनों था. किसी तरह चुनाव हुए और मलूम हार गया. आउदेई की सरकार बनी, जिसे हबरे ने 1982 में गिरा दिया और शासक बन बैठा.

टॉर्चर के अजीब तरीके अपनाता था हबरे

शासक बनने के बाद शुरू हुआ हबरे का खूनी खेल. जैसा कि हर तानाशाह करता है. अपने आप को सही साबित करने और अपनी सत्ता बचाए रखने के लिए उसने हर विरोधी को मौत के घाट उतारना शुरू कर दिया. धीरे-धीरे ये सिलसिला बढ़ता गया और बेकाबू हो गया. 1982-90 के बीच इसने 40 हजार लोगों को मार डाला. दो लाख लोगों को भयानक रूप से टॉर्चर किया गया.
टॉर्चर के तरीके भी अजीब थे. हबरे के सैनिक घंटों दिमाग भिड़ाते थे और नए-नए चित्र बनाकर लाते थे, जिसमें टॉर्चर के क्रूरतम तरीके ईजाद किए जाते थे. देखनेवालों ने बताया था कि लोगों को मारने के लिए उसने एक स्विमिंग पूल बनवा रखा था. उसमें लोगों को डाल के वो बिजली के तार छुआ देता था. कभी लोगों को पानी पिलाते-पिलाते ही मार देता था. कभी जलती सिगरेट से घंटों छुआते रहता था. आंखों में गरम गैस डाल दी जाती थी.
हर अत्याचार की मार औरतों पर सबसे ज्यादा पड़ती है. बलात्कार और हत्या. हबरे ने खुद कई औरतों का बलात्कार किया. एक औरत जिदाने ने कोर्ट में उसके खिलाफ गवाही दी. उसने बताया कि हबरे उसके प्राइवेट पार्ट में बॉलपेन घुसा देता था और कभी भी उसे हवस का शिकार बना लेता. बहुत सारी औरतें गवाही नहीं दे पाईं, क्योंकि वो जिंदा नहीं बची थीं.
हिसेन हबरे के सैनिक स्कैच बनाकर खोजते थे टॉर्चर करने के तरीके
हिसेन हबरे के सैनिक स्कैच बनाकर खोजते थे टॉर्चर करने के तरीके

हबरे शायद इतना आगे नहीं बढ़ता. अगर उस वक्त अमेरिका और फ्रांस ने गद्दाफी को रोकने के लिए हबरे को आगे न बढ़ाया होता.  दरअसल 1980 में लीबिया ने चाड पर हमला कर दिया था. इस लड़ाई में हबरे जीत गया. बाद में गद्दाफी को अमेरिका ने 2011 में मार दिया था. हबरे की नजदीकियां अमेरिका से ज्यादा बढ़ गईं. 1990 में झागवा समुदाय के इदरिस एब्बी ने विद्रोह किया. इस बार फ्रांस और अमेरिका ने हबरे का साथ नहीं दिया. क्योंकि हबरे की नीतियां उनको रास नहीं आ रही थीं. हबरे को गद्दी छोड़कर सेनेगल भागना पड़ा. तब से लेकर अब तक कई बार हबरे पर मुक़दमा चलाने की कोशिश की गईं, पर सफलता नहीं मिली थी. 2005 में बेल्जियम ने सार्वभौमिक सिद्धांतों का हवाला देकर अरेस्ट वारंट जारी किया. पर सेनेगल ने प्रत्यर्पण से मना कर दिया. 2013 में चाड ने इंसानियत के खिलाफ अपराधों के लिए उसकी गैर मौजूदगी में ही उसे मौत की सजा सुनाई. बाद में सेनेगल को समझा बुझा के राजी किया गया.
पीड़ितों की तस्वीरें
पीड़ितों की तस्वीरें

चाहे जो हो, अब वहां पर लोग बहुत खुश हैं. देर से सही, अपराधी को सजा तो मिली. नहीं तो ऐसा लग रहा था कि अपराधियों के आगे किसी की चलेगी ही नहीं, कुछ नहीं हो सकता. लोगों ने काफी जश्न मनाया. किसी ने सही कहा था कि अगर बुरे लोगों का सामना करना है तो अच्छे लोगों को एक होना पड़ेगा. शायद वो वक़्त आ गया है. हर देश की जनता अपराधियों से उनके गुनाहों का हिसाब मांग रही है.

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