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'नोबेल पीस प्राइज मिले', मुनीर तो ट्रंप के मन की बात बोल गए, पर कुछ कर भी सकते हैं?

Asim Munir की चाहत है कि Donald Trump को Nobel Peace Prize मिले. लेकिन सवाल ये है कि क्या ट्रंप इसके लिए योग्य हैं और क्या मुनीर के पास ट्रंप को नॉमिनेट करने का अधिकार है?

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वाइट हाउस के अनुसार मुनीर ने ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार देने की बात की है. (तस्वीर: AP)

ऐसा व्यक्ति जिसने दो देशों के बीच भाईचारा बढ़ाने के लिए, स्थाई सेना को कम करने के लिए या शांति सम्मेलन के आयोजन के लिए काम किया हो, उसे ही नोबेल शांति पुरस्कार (Nobel Peace Prize) दिया जाता है. ये दुनिया का सबसे प्रतिष्ठित सम्मान है. अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप (Donald Trump) को इसकी चाहत तो है, लेकिन वो इसके लिए योग्य हैं या नहीं ये चर्चा का विषय है.

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ट्रंप और नोबेल पीस प्राइज की चर्चा इसलिए हो रही है क्योंकि पाकिस्तान के आर्मी चीफ असीम मुनीर ने वकालत की है कि ट्रंप को ये पुरस्कार मिले. पता करते हैं कि क्या मुनीर के पास इतनी योग्यता है कि वो किसी को नोबेल प्राइज के लिए नॉमिनेट कर सकें?

नोबेल प्राइज के लिए कौन नॉमिनेट कर सकता है?

नोबेल पीस प्राइज के विनर का चयन 'नॉर्वेजियन नोबेल कमेटी' करती है. ये जिम्मेदारी पूरी तरह से उन्हीं के जिम्मे होती है. लेकिन नॉमिनेट करने का अधिकार कई लोगों के पास होता है. कुछ योग्यताएं हैं जिसको पूरा करने पर कोई भी अपनी पसंद के किसी व्यक्ति को नोबेल पीस प्राइज के लिए नॉमिनेट कर सकता है. ये योग्यताएं इस प्रकार हैं-

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  1. किसी देश की संसद या सरकार का सदस्य (कैबिनेट मेंबर/मंत्री) या किसी देश के राष्ट्र प्रमुख.
  2. हेग स्थित इंटरनेशनल कोर्ट या हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायालय के मेंबर.
  3. ‘इंस्टिट्यूट डी ड्रोइट इंटरनेशनल’ के सदस्य. ये अंतर्राष्ट्रीय कानून के लिए काम करने वाली एक गैर-सरकारी संगठन है.
  4. ‘वुमेंस इंटरनेशनल लीग फॉर पीस एंड फ्रीडम’ के इंटरनेशनल बोर्ड के मेंबर.
  5. विश्वविद्यालय के प्रोफेसर, रिटायर्ड प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर. ये लोग  इतिहास, सामाजिक विज्ञान, कानून, दर्शन, धर्मशास्त्र और धर्म के प्रोफेसर हो सकते हैं. विश्वविद्यालय के रेक्टर और विश्वविद्यालय निदेशक (या उनके समकक्ष); शांति अनुसंधान संस्थानों और विदेश नीति संस्थानों के निदेशक.
  6. वो जिनको पहले ही नोबेल शांति पुरस्कार मिल चुका है.
  7. नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित संगठनों के मुख्य 'बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स' के सदस्य या इसके समकक्ष.
  8. नॉर्वेजियन नोबेल समिति के वर्तमान और पूर्व सदस्य.
  9. नॉर्वेजियन नोबेल समिति के पूर्व सलाहकार.

ये भी जान लीजिए कि इस प्राइज के लिए कोई खुद को नामित नहीं कर सकता. 

मुनीर के पास नॉमिनेट करने का अधिकार है?

असीम मुनीर पाकिस्तानी संसद के सदस्य नहीं हैं और वो आधिकारिक तौर पर अपने राष्ट्र के प्रमुख भी नहीं हैं. इस लिहाज से उनके पास ट्रंप को नॉमिनेट करने का अधिकार नहीं है. लेकिन इस संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता कि वो अपने राष्ट्र प्रमुख शहबाज शरीफ से नॉमिनेशन करवा दें.

अगर ऐसा हुआ भी तो क्या लोगों को इसकी जानकारी मिल पाएगी? जवाब है, हां. लेकिन 50 सालों के बाद. दरअसल, नॉमिनेशन के अगले 50 सालों तक नॉमिनेट करने वाले की कोई भी जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती. 

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ये भी पढ़ें: ईरान-इजरायल के बीच अमेरिका कूदा तो क्या होगा? ट्रंप के कदम से क्या बिगड़ेगा तेल का खेल?

ट्रंप, मुनीर और नोबेल प्राइज की चर्चा क्यों?

दरअसल, ट्रंप ने 18 जून को पाकिस्तान के आर्मी चीफ और फील्ड मार्शल असीम मुनीर को लंच पर बुलाया. इस खबर की खूब चर्चा हुई. दो सवाल भी सामने आए. एक तो ये कि भारत-पाकिस्तान के हालिया संघर्ष के बाद ट्रंप ने पाकिस्तान के आर्मी चीफ से मुलाकात क्यों की? दूसरा ये कि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के पद पर रहते हुए उनके आर्मी चीफ ने अमेरिका के राष्ट्रपति से मुलाकात क्यों की? खबर सामने आते ही खूब सारी अटकलें लगीं.

फिर न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने वॉइट हाउस की प्रवक्ता एना केली के हवाले से बताया कि इसके पीछे नोबेल पुरस्कार है. दरअसल, असीम मुनीर ने डॉनल्ड ट्रंप को नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामित करने की वकालत की है. केली के मुताबिक, इसके बाद ही ट्रंप ने मुनीर के लिए वॉइट हाउस में खास इंतजाम कराया है. मुनीर का कहना है कि ट्रंप ने पाकिस्तान और भारत के बीच युद्ध को टालने के लिए अहम कदम उठाए. इसलिए ट्रंप की नोबेल शांति पुरस्कार के लिए पुख्ता दावेदारी होती है.

असीम और ट्रंप की मुलाकात से पहले एक और खबर आई. खबर ये थी कि कनाडा में G7 समिट के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रंप की मुलाकात नहीं हो पाई क्योंकि ट्रंप वहां से जल्दी निकल गए थे. इसके बाद ट्रंप ने पीएम मोदी को फोन किया और कहा कि कनाडा से वापस लौटते हुए अमेरिका आएं और उनसे मुलाकात करें. प्रधानमंत्री ने पहले से तय कार्यक्रमों के कारण ऐसा करने से मना कर दिया. फोन पर दोनों नेताओं के बीच करीब 35 मिनट की बातचीत हुई. विदेश सचिव विक्रम मिस्री के अनुसार, पीएम मोदी ने ट्रंप से कहा कि भारत-पाकिस्तान संघर्ष में अमेरिका समेत किसी भी तीसरे देश ने मध्यस्थता नहीं की. युद्धविराम के लिए पाकिस्तान के अनुरोध पर भारत ने सीधी बातचीत की थी.

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