इंडिया और बांग्लादेश का मैच. 23 मार्च 2016. बैंगलोर.
डियर धोनी, जीत से खुश हूं लेकिन सवाल मेरे पास भी हैं!
बैंगलोर में प्रेस कॉन्फ्रेंस में धोनी ने एक रिपोर्टर को लताड़ा. क्या ये सही था?
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फ़ोटो पुरानी है. खुश न हो.
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"बाबा रेस को एक नियम होतो है. एक बार जो ये रेस सुरु है गई, फिर आप आगे हो कि पीछे हो, रेस को पूरो करनो पड़तो है."आख़िरी गेंद पर की गयी स्टम्पिंग उतनी ही याद की जायेगी जितना सेंचुरियन वाला सचिन का छक्का. धोनी एक दस्ताना छोड़ जैसे दौड़े थे, पान सिंह तोमर की याद आती थी. पान सिंह ने एक समय पर ये कहा भी था, अट्ठारहवें ओवर तक इंडिया ये रेस हारता दिख रहा था. लेकिन धोनी ने ये रेस न केवल पूरी की बल्कि इंडिया को जिताई भी. वर्ल्ड कप में टीम इंडिया फिर से ज़िन्दा हो उठी. टीम जीती मात्र एक रन से. वर्ल्ड कप का सबसे ज़्यादा क्लोज़ मैच. 3 गेंद में दो रन बनाने हों, फिर दो विकेट गिरें और आखिरी में एक रन लेने के चक्कर में एक और आउट हो और आपकी टीम जीत जाए, इससे ज़्यादा खुशी की बात और क्या होगी? मेरी टीम है, हारते-हारते जीत गयी, मैं बहुत खुश हुआ.

लेकिन चूंकि क्रिकेट में बैट-बॉल और चौकों-छक्कों से भी थोड़ा आगे तक दिलचस्पी रखता हूं, इसलिए दिमाग के किसी कोने में कुछ और भी चल रहा है. बांग्लादेश, जिसे वर्ल्ड कप में खेलने के लिए क्वालीफाई करना पड़ता है, के सामने हम ऐसे जीत रहे हैं? एक रन से? यहां मैं बांग्लादेश को कमतर नहीं बता रहा हूं लेकिन हां इंडिया और बांग्लादेश के क्रिकेट के बीच में जो अंतर है, उसका ज़िक्र ज़रूर करना चाहता हूं. इंडिया अभी-अभी ऑस्ट्रेलिया को टी-20 में क्लीन स्वीप करके आया है. ऑस्ट्रेलिया में ही. तगड़ी टीम बनी हुई है. और अब तो डेथ बॉलर्स वाली समस्या का भी अंत हो गया है. साथ ही, हम अपनी पिच पर खेल रहे थे. विराट कोहली का होम ग्राउंड. विराट वो जो ऑस्ट्रेलिया में ऐसा परचम लहरा चुके हैं कि सरकार ने उन्हें वहां एक घर गिफ्ट कर दिया है. इन सारी बातों के बावजूद, हम एक रन से जीते. गिरते-पड़ते 146 का स्कोर खड़ा किया.
जवाब में इधर उधर फेंकी हुई गेंदें. 4 छूटे कैच. बॉलिंग कॉम्बिनेशन में हुई गलतियां. ये सभी कुछ बांग्लादेश के फ़ेवर में ही जा रहा था. और सच यही है कि बांग्लादेश की जगह कोई और टीम होती तो इन कमियों का इतना फ़ायदा उठाती कि पाकिस्तान की जगह हम वर्ल्ड कप से बाहर हो गए होते.
मैच खतम होते ही जश्न धीमा पड़ने पर ये सभी बातें दिमाग में आने लगीं. ये बातें अब बातें नहीं सवाल बन चुके थे. वो भी तब जब अगला मैच ऑस्ट्रेलिया से होना तय है. ऑस्ट्रेलिया जो 3-0 की हार का बदला लेने तैयार बैठी है.
दिल्ली से दूर बैंगलोर में, मैच के ठीक बाद, प्रेस कॉन्फ्रेंस में यही सवाल धोनी से असल में पूछे जाते हैं.
"कहाँ बड़े अंतर से जीतने की बात हो रही थी, कि रनरेट बढ़ाना है 50 रन से जीतना है, कहाँ हारते-हारते जीत पाए. इस जीत से कितने ख़ुश हैं?"इस सवाल में सवाल और चिंता दोनों का कॉकटेल दिख रहा था. सवाल वही जो मेरे मन में थे, चिंता भी वही जो मेरे अन्दर थी. हमें सचमुच रन-रेट को देखते हुए मैच खेलना पड़ेगा. आप श्रेष्ठतम जगह पर रहकर क्रिकेट खेलते हैं और ऐसा कमाल कितनी ही बार पहले भी कर चुके हैं इसलिए आपसे उम्मीदें लगायी जा रही हैं. श्री लंका के खिलाफ़ 40 ओवर में 321 चेज़ करने वाले भी हम ही हैं. तब भी मामला नेट रन रेट का ही था.
इस पर धोनी का जवाब था,
"मुझे पता है कि आपको खुशी नहीं हुई है कि इंडिया जीत गया. नहीं, सुनिए, बात सुनिए. आपकी आवाज़ से, आपकी टोन से, आपके सवाल से ऐसा लग रहा है कि आपको खुशी नहीं है कि इंडिया जीत गया आज. ठीक है? और जहां तक क्रिकेट के मैच की बात है तो स्क्रिप्ट नहीं होता है. Its is not about the script. आपको एनलाईज़ करना पड़ता है कि टॉस हारने के बाद जिस विकेट पे हमने बैटिंग की थी, क्या करना था कि हम ज़्यादा रन नहीं बना पाए. अगर आप सारी चीज़ें बाहर बैठ के एनलाईज़ नहीं कर रहे हैं, तो you shouldn't ask these questions."https://www.youtube.com/watch?v=Uk9Wvn_KZEU
सबसे पहली बात, ये पूछे गए सवाल का जवाब ही नहीं है. जवाब के आस-पास की भी कोई चीज नहीं है. इसमें सिर्फ़ रिपोर्टर को लतियाया गया है क्यूंकि उसने जीतने के बाद भी एक सवाल पूछ लिया. प्रेस कांफेरेंस थी न? जिसमें सवाल जवाब किये जाते हैं. ज़ाहिर सी बात है कि सवाल रिपोर्टर ही करेगा और जवाब टीम का कप्तान देगा. धोनी बरसों से ऐसा करते आ रहे हैं. उन्हें इस बात का अब तक तो अभ्यास हो ही गया होगा. धोनी जैसे कप्तान से ये आशा भी की जाती है कि सिर्फ़ जीत और हार के इतर भी एक दुनिया होती है जहां रणनीतियां बनती हैं, ऐसा वो बखूबी जानते होंगे.

The tactics were questioned and not the intent.
जीतने के बावजूद हम अपनी खामियों पर ध्यान देते हैं. जीतने के बावजूद हम अगले मैच के लिए कुछ नया प्लान करते हैं. क्यूं करते हैं हम ऐसा? क्यूंकि हर गेम को पिछले गेम की तरह नहीं खेला जा सकता. वर्ल्ड कप में तो कतई नहीं. यहां हर गेम के बाद इक्वेशन बदल रहा होता है. हर प्लेयर सामने वाले प्लेयर को नोटिस कर रहा होता है. और यहां बैंगलोर में हम सच मुच ख़राब क्रिकेट खेल के आये थे. बुमराह के उन्नीस वें और पांड्या के बीसवें ओवर की आखिरी तीन गेंदों को छोड़ दें तो ये वो टीम इंडिया नहीं लग रही थी जो ऑस्ट्रेलिया से लौटी थी. बुमराह और अश्विन के छोड़े कैच वाकई शर्मनाक थे. ऐसे में उस वक़्त जब हर कोई जश्न में सराबोर था, इन सभी बातों पर रोशनी डालने पर ही सवाल कैसे खड़ा कर दिया जा सकता है?
लड़के के पास होने पर भी उसके मैथ्स में कम नम्बर लाने पर उसकी क्लास लगती है. क्यूं? क्यूंकि मैथ्स में कम नम्बर आये हैं, इस बात को कोई झुठला नहीं सकता. बाप लड़के को कोसता है, इसलिए कि वो अमुक सब्जेक्ट में भी आगे बढ़े. इसलिए नहीं कि वो चाहता है कि लड़का फ़ेल ही होकर निकले.
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दूसरी बात, धोनी का ये कहना कि आप टीम इंडिया की जीत पर खुश नहीं हैं, बड़ा ही तकलीफ़देह है. कैसे? बताता हूं. ये एक बहुत ही नॉर्मल स्टेटमेंट है कहने के लिए. लेकिन जब आप इसके मायने निकालेंगे तो पायेंगे कि इसे जिस इंसान को कहा गया है, अचानक ही वो इंसान देशद्रोही के आस पास बन बैठा है. हाल ही में भारत माता की जय पर छिड़ी बहस इस जवाब के आस पास ही घूमती मालूम देती है. किसी भी सवाल पूछने वाले को आप कह दीजिये कि आप इंडिया की जीत से खुश नहीं हैं. बस. खतम बात. अगला देशद्रोही क़रार हो गया और आप देशभक्त कप्तान. ये बिलकुल ही वैसा हो गया कि मैथ्स में कम नम्बर आने पर बाप के पूछने पर लड़का फ़ेसबुक पे पोस्ट डाल दे - "मेरा बाप मेरे पास होने से खुश नहीं है." बस, फिर बाप की छीछालेदर होते हुए देखिये.
हमने उस रिपोर्टर की होते हुए देखी. वीडियो वायरल हो चुका है. दोनी वाहवाही लूट रहे हैं. सच्चे देशभक्त क्रिकेटर बताये जा रहे हैं. मेरे हिसाब से वो खुद पर आये सवाल से खुश नहीं थे. सवाल जो कि पूरी तरह से जायज़ था.
प्रेस कॉन्फ्रेंस में सवाल ही पूछे जाते हैं. जहां सवाल नहीं पूछे जाते, उसे सुहागरात कहते हैं, कप्तान साहब.
टीम इंडिया की जीत से खुश न होने वाला पॉइंट खूब ढूँढा है. हम इस पॉइंट के दम पे पूरा का पूरा वर्ल्ड कप ही जीत सकते हैं. अगला मैच ऑस्ट्रेलिया के साथ है. मैच में आउट होने पर कोई भी बल्लेबाज बॉलर पर ये इल्ज़ाम लगा सकता है कि वो इंडिया की जीत से खुश नहीं है और इसलिए आउट कर रहा है. बस! काम बन जायेगा. फिर कोई भी किसी भी प्लेयर से सवाल नहीं कर सकेगा.
टीम इंडिया की जीत टीम इंडिया होने से नहीं बल्कि अच्छे खेल से होती आई है और आगे भी उस से ही होगी. टीम इंडिया अगर जीती तो इसलिए क्यूंकि हार्दिक पांड्या ने छोटी गेंद फेंकी, धोनी ने एक दस्ताना उतार के कीपिंग करते हुए बॉल कलेक्ट की और स्टम्प की और दौड़ पड़े. रन आउट किया. अमुक वक़्त पर अगर हमारी जर्सी नीले की बजाय गुलाबी, सफ़ेद, पीली या हरी होती, तो भी कोई फ़र्क नहीं पड़ने वाला था. फ़र्क सिर्फ़ आपकी स्किल का होता है. और जब तक आप उस लेवल पर खेलेंगे जहां आपको करोड़ों लोग हर पल देख रहे होंगे, जहां आपके एक एक मूव को नोटिस किया जा रहा होगा, जहां लोग आपको उस जगह बिठा के रक्खेंगे कि खुद भगवान भी आपसे जलने लगे, आपसे सवाल पूछे जायेंगे.
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