ये सही समय है कि सबसे कॉमन कैंसर से जुड़े मिथ को खत्म किया जाय. लास्ट वीक विशेषज्ञों का एक पैनल कैंसर पर बहस कर रहा था. मैं भी उस पैनल का हिस्सा थी. यह बहस दिल्ली के कनॉट प्लेस में ऑक्सफोर्ड बुकस्टोर में हो रही थी. यह बहुत ही मजेदार सेशन रहा. जहां हमने इस जानलेवा बीमारी के तमाम महत्तवपूर्ण पहलुओं पर बातचीत की. जैसे कि ब्रेस्ट कैंसर क्या है, कितने तरह का होता है. क्या करना चाहिए जब हमें इसका पता चलता है. ये फैक्ट्स मर्दों को भी पता होना चाहिए. इसकी रोकथाम संभव है. और कैंसर पेशेंट का डाइट क्या होना चाहिए. इन पेशेंट्स में से कुछ ही ऐसे होते हैं. जो अपनी कहानियां लोगों को बताते हैं. एक बहुत ही अलग तरह की कहानी राहुल यादव ने सब के साथ शेयर की. ये खुद भी तीन बार मेलोमा कैंसर से अपने जिंदगी की लड़ाई लड़ चुके हैं. और अब एक हीरो की तरह दूसरे कैंसर पेशेंट्स की मदद कर रहे हैं. और उन्होंने ऐसी एक लड़की की कहानी सुनाई. जिसे 21 साल की उम्र में ही फर्स्ट स्टेज के ब्रेस्ट कैंसर पता चला. इस स्टेज पर लम्पेक्टॉमी (जिसमें सर्जरी करके लम्प को हटा दिया जाता है) की जरुरत पड़ती है. जिससे उसके ब्रेस्ट पर एक छोटा सा निशान छूट जाता. पर समाज में फैली टैबू की वजह से उसके मां-बाप ने उसके ब्रेस्ट की सर्जरी नहीं करवाई. यह सोच कर कि उससे कौन शादी करेगा, उसकी बहन की शादी कैसे होगी, फलाना-ढिमकाना. और वे लोग इलाज के दूसरे तरीकों को अपनाते रहे. राहुल ने हमलोगों को बताया कि इस बात के दो साल हो गए हैं. और अब उसके ब्रेस्ट की सर्जरी करना बहुत ही मुश्किल है. यह कहानी सभी के लिए एक मैसेज है. खास कर जो इलाज के मामले में लापरवाही करते हैं. हम लोग लगभग अपने सेशन को खत्म ही करने जा रहे थे कि तभी ऑडियंस में से एक औरत जो कि हमें बहुत गौर से सुन रही थी, अचानक से खड़ी हो गई. और हमसे एक सवाल करने लगी. बताया कि वो 34 साल की है. अपनी मर्जी से अनमैरिड है. वो अपने ब्रेस्ट की गांठ को लेकर चिंतित थी. जिसे वो पिछले कुछ दिनों से महसूस कर रही थी. वो बोलते-बोलते रोने लगी और बताया कि वो डॉक्टर के पास जाने से डरती है. चेक-अप के बाद कहीं ये कैंसर न निकल जाए. वो कहने लगी कि मुझे मरने से डर लगता है. पर जबसे मुझे अपने ब्रेस्ट में गांठ का पता चला है, मैं रोज मर रही हूं. इन सारी बातों का जिक्र उस औरत ने अब तक किसी से भी नहीं किया था. और जब सभी लोगों को कैंसर पर खुल कर बोलते हुए देखा तब उसने इन सारी बातों का जिक्र किया. तब हमें भी इस बात का पता चला कि ऐसे सेशंस कितने महत्त्वपूर्ण हैं. वो इस बात से भी चिंतित थी कि बच्चे न होने की वजह से इस बीमारी का खतरा और भी बढ़ जाता है. फिर भी उसने कहा, “सिंगल रहना मेरे मर्जी की चॉइस है क्योंकि मैं खुद को बदलने के लिए तैयार हूं”. यह बोलते हुए वो सबके सामने जोर-जोर से रोने लगी. हम सभी लोगों ने उसको समझाया कि बिना देर किए हुए उसको डॉक्टर के पास जाना चाहिए. और अपनी गांठ का चेक-अप कराना चाहिए. जिससे पता लग सके कि कहीं यह गांठ खतरनाक तो नहीं है. हमने उसे ये भी समझाया कि उसे अपनी शादी न करने वाली बात पर ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए. क्योंकि ये सैकड़ों रिस्क फैक्टर्स में से यह एक रिस्क फैक्टर है. मैंने उसे अपना वजन कम करने को कहा. जो कि एक हायर रिस्क फैक्टर है. काफी समझा बुझा कर हमने उसे शांत कराया. ज्यादा समय नहीं बचा था. जिसकी वजह से मैं उसे कैंसर के रिस्क से बचाने वाले उपायों के बारे में नहीं बता पाई. इसलिए मैं अभी उस एक्सरसाइज को बता रही हूं. उम्मीद करती हूं कि लोग इससे डरने के बजाय इसे पढ़ेंगे. और इस एक्सरसाइज को करने से रिस्क फैक्टर्स को बहुत हद तक कम किया जा सकता है. जो कि हर किसी के अपने बस में है. यहां तक कि एक फीसदी मर्दों को भी ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा रहता है.
रिस्क को कम भी किया जा सकता है
आपका खाना एक बहुत बड़े फैक्टर के रूप में काम करता है. इसलिए अपने खाने का प्लेट साफ-सुथरा रखना चाहिये. और जहां तक हो सके सफाई का पूरा ख्याल रखना चाहिए. ज्यादा मोटा होना इस खतरे को बढ़ाता है. बॉडी में फैट टिश्यू का ज्यादा होना, बॉडी में एस्ट्रोजन के लेवल का ज्यादा होना, एस्ट्रोजन का तेजी से बढ़ना, इन सारी चीजों की वजह से ब्रेस्ट में ट्यूमर हो सकता है. और हमें इस बात से भी सचेत रहना चाहिए कि कहीं बॉडी में ज्यादा फैट तो नहीं इकट्ठा हो रहा है. क्योंकि ज्यादा मोटापा एक रिस्क फैक्टर हो सकता है. स्टडी से पता चलता है कि स्मोकिंग और ड्रिंकिंग इसके रिस्क को 12 पर्सेंट और 13 पर्सेंट के हिसाब से बढ़ा सकता है. ज्यादा स्मोकिंग हाई रिस्की हो सकता है. जिसके लिए हमें सावधानी बरतने की जरुरत है. फिजिकल एक्सरसाइज की कमी भी एक फैक्टर हो सकती है. एक स्टडी के हिसाब से हर हफ्ते सवा से ढाई घंटे तक की ब्रिस्क वॉकिंग ही ब्रेस्ट कैंसर के रिस्क को 18 पर्सेंट तक कम कर सकती है. वॉकिंग तो की जा सकती है.अंत में, अगर आप अपने काम और रिश्तों को लेकर ज्यादा चिंतित रहते हैं तो तनाव, भय, चिंता और सैकड़ों गड़बड़ियां पैदा हो सकती हैं. और स्टडी के मुताबिक इस वजह से ब्रेस्ट कैंसर होने का खतरा दोगुना हो जाता है. इस बहस की सारी बातें औरतों और दूसरों के लिए महत्त्वपूर्ण मैसेज रहीं. अपने ब्रेस्ट के गांठ को लेकर हरदम चिंतित रहना. इलाज के लिए कुछ नहीं करना. यह उस महिला का डर था. जबकि हो सकता है कि उसकी गांठ खतरनाक ना हो. तो पहले चिंता करना छोड़ दीजिए. अभी, इसी वक्त!तो रंग बिरंगी ब्रा पहनने से होता है ब्रेस्ट कैंसर!













