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केंद्रीय मंत्री वीरेंद्र खटीक ने दफ्तर के बोर्ड पर लिखवा दिया, "अगर पैर छुए तो…"

डॉ. वीरेंद्र कुमार खटीक, टीकमगढ़ (Tikamgarh) लोकसभा सीट से बीजेपी के सांसद और केंद्रीय मंत्री हैं. इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक हाल ही में उनके कार्यालय में लगा एक नोटिस चर्चा में आया. इसमें चेतावनी दी गई कि ‘पैर छूना सख्त मना है’. साथ ही एक और बात लिखी, “जो पैर छुएगा, उसका काम नहीं होगा.”

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मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ में केन्द्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार खटीक (तस्वीर: इंडिया टुडे)

केंद्रीय मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार खटीक (Virendra Kumar) के कार्यालय का एक बोर्ड चर्चा में है. बोर्ड पर पैर न छूने की हिदायत लिखी है. यही नहीं, पैर छूने वाले व्यक्ति का काम न करने की बात भी मेंशन की गई है. सरकारी दफ्तर में इस तरीके का बोर्ड देख सभी हैरान है. हालांकि सांसद वीरेंद्र कुमार पहले भी अपनी छवि को लेकर सुर्खियों में रहे हैं.

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डॉ. वीरेंद्र कुमार खटीक, टीकमगढ़ (Tikamgarh) लोकसभा सीट से बीजेपी के सांसद और केंद्रीय मंत्री हैं. इंडिया टुडे की खबर के मुताबिक हाल ही में उनके कार्यालय में लगा एक नोटिस चर्चा में आया. इसमें चेतावनी दी गई कि ‘पैर छूना सख्त मना है’. साथ ही एक और बात लिखी, “जो पैर छुएगा, उसका काम नहीं होगा.”

कौन हैं डॉ. वीरेंद्र कुमार खटीक?

वीरेंद्र कुमार पहले भी चर्चा में रहे हैं. इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक वीरेंद्र कुमार आज तक कोई भी चुनाव नहीं हारे हैं. साल 1996 में सागर लोकसभा सीट से पहली बार सांसद बने. तब जीत का सिलसिला जारी है. साल 2009, परिसीमन के बाद टीकमगढ़ सीट को अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया था. वीरेंद्र कुमार ने भी अपनी सीट बदली और सागर की जगह टीकमगढ़ से चुनाव लड़ा और जीता भी. साल 2024 के लोकसभा चुनाव में वे छठवीं बार सांसद बने.

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साल 2017 में उन्हें राज्य मंत्री नियुक्त किया गया. इस दौरान वीरेंद्र कुमार महिला एवं बाल विकास कल्याण मंत्रालय से जुड़े रहे. साल 2019 में उनकी जीत के बाद उनका प्रमोशन कर कैबिनेट मंत्री बनाया गया. अभी भी वे केंद्रीय मंत्रिमंडल में बरकरार हैं. उनकी पढ़ाई-लिखाई और अन्य जानकारियों को आप हमारी इस खबर में जा कर पढ़ सकते हैं. 

इसे भी पढ़ें - कभी पंक्चर बनाने वाला एमपी का ये नेता कैसे बना लोकसभा का प्रोटेम स्पीकर?

पंक्चर बनाने का काम भी किया

राजनीतिक सफलताओं के इतर वीरेंद्र खटीक अपने निजी जीवन के संघर्ष के चलते भी चर्चा में रहे हैं. दैनिक भास्कर की रिपोर्ट की मानें तो वीरेंद्र कुमार कभी पंक्चर बनाने का काम करते थे. काम में लापरवाही बरतने पर पिता की डांट भी खानी पड़ती थी. बाद में पंक्चर से रिपेयरिंग का काम सीख वे दुकान का काम संभालने लगे. राजनीतिक जीवन में आने के बाद भी कई दफा उनकी पंक्चर बनाने की तस्वीरे सामने आईं. सांसद बनने के बाद उन्होंने अपने क्षेत्र में साइकिलें भी बांटी थीं.

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