बजट का सबसे मजबूत संकेत गेमिंग और क्रिएटर इकोनॉमी को लेकर आया. बजट 2026 में पहली बार गेमिंग और डिजिटल कंटेंट को सीधे शिक्षा और स्किल से जोड़ा गया है. सरकार ने कहा है कि देश के 15,000 सेकेंडरी स्कूल और 500 कॉलेजों में AVGC यानी एनीमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स से जुड़ी कंटेंट क्रिएटर लैब्स बनाई जाएंगी. सरकार का मानना है कि अब गेमिंग सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि रोजगार देने वाला सेक्टर बन चुका है.
इन लैब्स के जरिए छोटे शहरों के युवाओं को भी वही सॉफ्टवेयर और टूल्स मिलेंगे, जो अभी तक बड़े स्टूडियो और प्राइवेट इंस्टीट्यूट तक सीमित थे. इसका मतलब साफ है. सरकार चाहती है कि गेम डेवलपमेंट और डिजिटल कंटेंट को एक सही करियर के तौर पर देखा जाए.
डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर रिकॉर्ड खर्च का ऐलान हुआ है. फास्ट इंटरनेट, मजबूत नेटवर्क और आगे चलकर बेहतर कनेक्टिविटी का फायदा ऑनलाइन गेमिंग और ई-स्पोर्ट्स दोनों को मिलेगा. खासकर उन खिलाड़ियों को, जो इंटरनेशनल टूर्नामेंट में हिस्सा लेते हैं.
बजट 2026 में विदेशी क्लाउड कंपनियों को 2047 तक टैक्स छूट देने का फैसला लिया गया है. शर्त यह है कि वे भारत के डेटा सेंटर का इस्तेमाल करें. इसका मतलब यह है कि सरकार चाहती है कि डेटा भारत में ही स्टोर हो. इससे डेटा सेंटर सेक्टर में निवेश बढ़ सकता है. लेकिन आम यूजर के लिए इसका असर तुरंत नहीं दिखेगा. डेटा सेंटर बनने में सालों लगते हैं. उसके बाद ही ऐप्स, गेम्स और AI प्लेटफॉर्म पर फर्क दिखता है.

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