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दिनाकरण की 'घरवापसी', स्टालिन ने तोड़ा पनीरसेल्वम का आखिरी गढ़, तमिलनाडु में शुरू हुआ 'चुनावी खेल'

अन्नाद्रमुक (AIADMK) से निकाले गए और ओ पनीरसेल्वम के कट्टर समर्थक माने जाने वाले वैथिलिंग डीएमके में शामिल हो गए. वहीं, टीटीवी दिनाकरण की पार्टी अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (एएमएमके) की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में वापसी हो गई है.

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तमिलनाडु में चुनावी मंथन शुरू हो गया है (india today)

तमिलनाडु में चुनाव आने वाले हैं. लिहाजा नेताओं का 'आयात-निर्यात' शुरू होना ही था. खबर है कि बुधवार, 21 जनवरी को अन्नाद्रमुक (AIADMK) से निकाले गए और ओ पनीरसेल्वम के कट्टर समर्थक माने जाने वाले आर वैथिलिंग डीएमके में शामिल हो गए. साल 2022 में वैथिलिंग को पनीरसेल्वम के साथ ही AIADMK से निकाल दिया गया था. दूसरे खेमे यानी एनडीए में भी एक बड़ा अपडेट इसी दिन सामने आया है. यहां टीटीवी दिनाकरण की पार्टी अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (एएमएमके) की राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) में वापसी हो गई है. 

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दिनाकरण AIADMK नेता पलानीस्वामी का विरोध करते हुए अलायंस से बाहर गए थे. अब इस मतभेद से ‘कंप्रोमाइज’ करते हुए वापस आ गए हैं. उनका कहना है कि डीएमके को सत्ता से बाहर करने के छोटे-मोटे मतभेदों को भुलाया जा सकता है.     

चलिए बारी-बारी से दोनों खबरों पर प्रकाश डालते हैं.

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सबसे पहले बात टीटीवी दिनाकरण की कर लेते हैं. दिनाकरण साल 2025 में बीजेपी और AIADMK के फिर से साथ आने से नाराज हो गए थे. उन्होंने अपनी पार्टी की उपेक्षा का आरोप लगाया और एनडीए से बाहर जाने की घोषणा कर दी. दिनाकरण को खासतौर पर AIADMK के नेता पलानीस्वामी से समस्या थी, जिनके वो विरोधी माने जाते हैं. जाहिर है दिनाकरण वीके शशिकला के भतीजे हैं, जो जयललिता की बेहद करीबी थीं. उन्हें 2017 में जब AIADMK से निकाला गया था, उस समय पलानीस्वामी पार्टी के सह-समन्वयक थे. तमिलनाडु में पलानीस्वामी को जब गठबंधन का नेता बनाया गया तो दिनाकरण ने अलग रास्ता अपना लिया.

इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, अगले साल होने वाले तमिलनाडु चुनाव को लेकर दिनाकरण ने अपना फैसला बदला है. चेन्नई में भाजपा के तमिलनाडु चुनाव प्रभारी पीयूष गोयल से मुलाकात के बाद दिनाकरण ने एनडीए में एएमएमके की फिर से एंट्री का ऐलान कर दिया. इस मुलाकात में तमिलनाडु भाजपा के नेता एल मुरुगन और नयनार नागेंद्रन भी मौजूद थे. पीयूष गोयल ने दिनाकरण के इस कदम का स्वागत करते हुए कहा कि गठबंधन सत्तारूढ़ डीएमके को हराने के अपने संकल्प में एकजुट है.

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दिनाकरण एनडीए में वापस आ गए (india today)

हालांकि, दिनाकरण के लिए यह समझौता ‘मधुर’ नहीं है. AIADMK के महासचिव के पलानीस्वामी के कभी कट्टर आलोचक रहे दिनाकरण ने अब बीते दिनों की दुश्मनी को छोड़कर आगे बढ़ने का फैसला किया है. एनडीए में वापसी की वजह बताते हुए दिनाकरण ने डीएमके को सत्ता से हटाने के ‘बड़े मकसद’ के लिए मतभेदों को दरकिनार करने का तर्क दिया.

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एनडीए में उनका स्वागत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की 23 जनवरी को मदुरंथगम के पास होने वाली चुनावी रैली से ठीक पहले हुई है. उम्मीद की जा रही है कि यहां 2017 में AIADMK से निकाले जाने के बाद पहली बार दिनाकरण पलानीस्वामी के साथ मंच साझा करेंगे.

अब वैथिलिंगम की बात. 

पूर्व AIADMK नेता पन्नीरसेल्वम के सबसे वफादार सहयोगी माने जाने वाले वैथिलिंगम द्रविड़ मुनेत्र कड़कम (डीएमके) में शामिल हो गए. साल 2022 में उन्हें पनीरसेल्वम के साथ AIADMK से निकाला गया था. खबरों के मुताबिक वैथिलिंगम ने डीएमके में शामिल होने से पहले ओराथनद से अपनी विधायकी छोड़ दी थी. इसके बाद वो डीएमके दफ्तर पहुंचे, जहां पार्टी के नेता सेंथिल बालाजी ने पार्टी समर्थकों के साथ उनका स्वागत किया.

वैथिलिंगम तंजावुर जिले के ओराथनद विधानसभा क्षेत्र से विधायक हैं और पलानीस्वामी के बड़े आलोचकों में से एक हैं. उन्होंने AIADMK के नेता पलानीस्वामी पर तानाशाही का आरोप लगाया और कहा कि उनके नेतृत्व में दिवंगत जयललिता की पार्टी प्रभावी तरीके से काम नहीं कर रही है. 

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वैथिलिंगम डीएमके में शामिल हो गए (X)

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सीएन अन्नादुरै की विरासत का हवाला देते हुए वैथिलिंगम ने कहा कि DMK मूल द्रविड़ राजनीतिक परंपरा की पैरोकार है. उसके साथ जाने का फैसला उन्होंने पन्नीरसेल्वम खेमे में अनिश्चितता के बाद उठाया है. उन्होंने ये भी बताया कि व्यक्तिगत तौर पर AIADMK में लौटने का न्योता भी उन्हें मिला था लेकिन उन्होंने इससे इनकार कर दिया.

डीएमके को क्या फायदा होगा?

वैथिलिंगम दिवंगत नेता जयललिता के भी करीबी रहे हैं और तमिलनाडु सरकार में कई बार मंत्री पद भी संभाला है. उनके आने से डीएमके को तंजावुर जिले की राजनीति में बड़ा फायदा मिल सकता है. जिले की AIADMK के प्रभाव वाली 8 में से 7 सीटों पर पिछले चुनाव में डीएमके ने कब्जा जमाया था. जो एक सीट बची थी वो वैथिलिंगम की ही थी. अब उनके पार्टी में आने से इस जिले की सभी 8 सीटों पर डीएमके का दावा मजबूत हो गया है. इसके अलावा कहा ये भी जा रहा है कि पार्टी में पद मिलने के बाद वह अपने कई अन्य समर्थकों को भी डीएमके में लाने की कोशिश करेंगे.

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