The Lallantop

'सेना में महिलाओं के साथ भेदभाव और इसलिए... ', सुप्रीम कोर्ट ने ये कहते हुए इतिहास पलट दिया

Supreme Court ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्ति का इस्तेमाल करते हुए सेना में नाइंसाफी खत्म करने का आदेश दिया. कोर्ट ने पाया कि सेना और नौसेना दोनों में ही महिला अधिकारियों का मूल्यांकन गलत ढंग से किया गया था. इसके बाद कोर्ट ने 'परमानेंट कमीशन' को लेकर बड़ा फैसला सुना दिया.

Advertisement
post-main-image
सुप्रीम कोर्ट ने महिला सैन्य अधिकारियों के हक में फैसला दिया. (ITG)
author-image
अनीषा माथुर

सुप्रीम कोर्ट ने आर्म्ड फोर्स में महिलाओं के साथ व्यवस्थागत भेदभाव मानते हुए जेंडर बराबरी की दिशा में एक बड़ा आदेश दिया है. सर्वोच्च अदालत ने कहा कि शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) की महिला अधिकारियों को परमानेंट कमीशन मिलने का हक है. कोर्ट ने महिलाओं को पूरी तरह इंसाफ देने के लिए अपनी खास शक्तियों का इस्तेमाल किया और यह आदेश जारी किया.

Add Lallantop as a Trusted Sourcegoogle-icon
Advertisement

24 मार्च को सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस उज्जल भुइंया और एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने यह फैसला दिया. इंडिया टुडे से जुड़ीं अनीषा माथुर की रिपोर्ट के मुताबिक, सिस्टमिक भेदभाव की बात करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि महिला SSC ऑफिसर्स को परमानेंट कमीशन ना देना, एक जमे-जमाए इवैल्यूएशन फ्रेमवर्क में मौजूद भेदभाव की वजह से हुआ है.

जजमेंट में कोर्ट ने यह भी कहा कि परमानेंट कमीशन के लिए हर साल 250 महिला ऑफिसर्स की लिमिट तय करना मनमाना फैसला है और इसे सही नहीं माना जा सकता. सुप्रीम कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत अपनी शक्ति का इस्तेमाल करते हुए नाइंसाफी खत्म करने का आदेश दिया. कोर्ट ने पाया कि सेना और नौसेना दोनों में ही महिला अधिकारियों का मूल्यांकन गलत ढंग से किया गया था.

Advertisement

CJI सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा,

"पुरुष SSCOs (शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारी) यह उम्मीद नहीं कर सकते कि परमानेंट कमीशन पूरी तरह से पुरुषों के लिए ही रहेगा. महिला SSCOs को परमानेंट कमीशन ना देना, मूल्यांकन के लिए बने पुराने और जमे हुए ढांचे में मौजूद भेदभाव का नतीजा था."

बेंच ने आगे कहा,

Advertisement

"महिलाओं की एनुअल कॉन्फिडेंशियल रिपोर्ट्स (ACRs) इस धारणा के साथ तैयार की गई थीं कि वे कभी भी परमानेंट कमीशन के लिए योग्य नहीं होंगी. उनकी ACRs ने उनके मूल्यांकन को प्रभावित किया. इन मानदंडों ने उन्हें उनके पुरुष समकक्षों की तुलना में नुकसान में डाल दिया. ACRs कभी भी ओवरऑल कॉम्पैरिटिव मेरिट को ध्यान में रखकर तैयार नहीं की गईं."

कोर्ट ने आदेश दिया कि प्रभावित महिला अधिकारियों को रिटायरमेंट के फायदों के लिए 20 साल की सेवा पूरी कर चुकी माना जाए. यह उन अधिकारियों पर लागू होगा जिन्हें परमानेंट कमीशन नहीं दिया गया था. इनमें वे अधिकारी भी शामिल हैं, जिन्हें 2020 के बाद कोर्ट के आदेशों के तहत परमानेंट कमीशन तो दिया गया, लेकिन उनका मूल्यांकन किसी सही प्रक्रिया के तहत नहीं किया गया.

इंडियन नेवी के मामले में बेंच ने फैसला दिया कि एक बार के उपाय के तहत योग्य महिला अधिकारियों को मेडिकल फिटनेस के आधार पर परमानेंट कमीशन दिया जाएगा. कोर्ट ने साफ किया कि 2009 के बाद शामिल हुई महिला अधिकारी परमानेंट कमीशन की हकदार होंगी.

वीडियो: ईरान जंग के बीच भारत में हो रहे गैस संकट पर क्या बोले पीएम मोदी?

Advertisement