Gold Biscuits Robbery Train: करोड़ों की लूट की जांच में लगा पुलिसकर्मी ही उसे अंजाम देने वाला निकला. सोने के बिस्किटों की लूट की ये घटना पिछले साल 21 नवंबर को हावड़ा-बीकानेर एक्सप्रेस में हुई थी. लुटेरों ने चलती ट्रेन रुकवा कर उसमें सवार एक यात्री से 1.44 करोड़ रुपये के सोने के बिस्किट लूट लिए थे. पीड़ित ने अधिकारियों को बताया था कि लुटेरे पुलिस यूनिफॉर्म में थे.
ट्रेन में 1.44 करोड़ की लूट, जांच की कमान SHO को मिली, अब पता चला वही लुटेरा है
Gold Biscuits Robbery TRain: SHO राजेश कुमार सिंह की गिरफ्तारी के बाद पता चला कि इस लूट में लुटेरों के साथ कुछ पुलिसकर्मी और आम नागरिक भी शामिल थे
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शुरुआत में ये मामला सामान्य लूट का लगा. जांच के लिए पुलिस की एक टीम गठित की गई. गया स्थित GRP पुलिस स्टेशन के SHO राजेश कुमार सिंह को कमान सौंपी गई. मगर कहानी में अब दिलचस्प मोड़ आ गया है. पता चला है कि केस की जांच कर रहे राजेश कुमार सिंह खुद इस लूट में शामिल थे.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, राजेश कुमार सिंह की गिरफ्तारी के बाद पता चला कि इस लूट में लुटेरों के साथ कुछ पुलिसकर्मी और आम नागरिक भी शामिल थे. जिस व्यक्ति के गोल्ड बिस्किट चोरी हुए उनका नाम मनोज सोनी है. वो कोलकाता में सोने का व्यापार करते हैं. उन्हें जयपुर में एक व्यापारी को गोल्ड बिस्किट भेजने थे. इसके लिए उन्होंने अपने स्टाफ के एक सदस्य धनंजय शाश्वत को चुना.
20 नवंबर को धनंजय हावड़ा-जोधपुर-बीकानेर एक्सप्रेस से जयपुर के लिए रवाना हुआ. हावड़ा से उसकी ट्रेन साढ़े 11 बजे निकलनी थी. लेकिन लगभग साढ़े पांच घंटे बाद गया जंक्शन पर पुलिस कांस्टेबल की यूनिफॉर्म पहने चार लोग 3 AC कोच में चढ़े. उनमें से दो पुलिस ऑफिसर शाश्वत की बगल में बैठे और गोल्ड बिस्किट के बारे में पूछने लगे. बताया गया कि इसके बाद उन ऑफिसर्स ने कोडरमा और गया के बीच कहीं चेन खींची और उसे ट्रेन से लेकर उतर गए.
रिपोर्ट के मुताबिक शाश्वत ने अपनी शिकायत में बताया था,
“वे सभी ऑटो रिक्शा से और बाद में बोलेरो जीप से गया स्थित मानपुर के पानी की बोतल बनाने की फैक्ट्री में पहुंचे. वहां एक सुनार पहले से ही एक अन्य व्यक्ति के साथ मौजूद था. उसने सोने की जांच की और फिर उन्हें टुकड़ों में तोड़ दिया.”
इसके बाद शाश्वत को गया जंक्शन वापस लागा गया और दूसरी ट्रेन से हावड़ा भेज दिया गया. वहां पहुंच कर उसने सोनी को घटना की जानकारी दी. इसके बाद सोनी ने मलीपांचघोरा पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कराई. सारा फोकस उन चार ‘पुलिसकर्मियों’ पर था जिन्होंने घटना को अंजाम दिया. लेकिन जांच धीमी चली तो सोनी को अपने स्टाफ पर भी संदेह होने लगा. उन्होंने सीनियर पुलिस ऑफिसर्स से संपर्क किया.
बाद में 27 नवंबर को सोनी ने पटना में रेलवे SP के पास एक और शिकायत दर्ज कराई. उन्होंने इसे आगे की कार्रवाई के लिए गया रेल पुलिस को भेज दिया. सोनी ने खगड़िया के सांसद राजेश वर्मा से भी कॉन्टैक्ट किया. रिपोर्ट के मुताबिक इसके तुरंत बाद एक स्पेशल इन्वेस्टीगेशन टीम बनाई गई. जांच में टेक्नीकल एविडेंस, कॉल डिटेल रिकॉर्ड, टावर लोकेशन और अन्य चीजों पर ध्यान दिया गया. तब शक की सुई SHO राजेश कुमार सिंह पर भी गई. उनको पूछताछ के लिए बुलाया गया. आठ घंटे की पूछताछ के बाद राजेश को गिरफ्तार कर लिया गया.
मामले में चार अन्य पुलिसकर्मियों के नाम भी सामने आए हैं. ये हैं- करण कुमार, अभिषेक चतुर्वेदी, रंजय कुमार और आनंद मोहन. इन्हें सस्पेंड कर दिया गया है. दो अन्य लोग परवेज आलम और पूर्व जीआरपी ड्राइवर सीताराम के शामिल होने का भी शक है. रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस कर्मियों ने 12 दिसंबर को सोनी से संपर्क किया था और एक ऑफर के साथ सोने के बिस्किट वापस देने की बात कही थी. लेकिन सोनी ने उनका ऑफर खारिज कर दिया.
रिपोर्ट के मुताबिक अभी तक की जांच में इस लूट में धनंजय का हाथ होने की बात सामने नहीं आई है.
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