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उद्धव से 'गद्दारी' करके शिंदे के साथ जाएंगे राज ठाकरे के पार्षद, क्योंकि BJP का गेम बिगाड़ना है!

महाराष्ट्र में निकाय चुनाव के नतीजे आने के बाद मेयर की सीट के लिए तमाम राजनीतिक दल बिना पेंदी का लोटा हो गए हैं. कल्याण डोंबिवली में राज ठाकरे की एमएनएस ने शिंदे वाली शिवसेना को समर्थन का ऐलान किया है. जबकि MNS उद्धव ठाकरे के साथ मिलकर निकाय चुनाव लड़ रही थी.

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राज ठाकरे की पार्टी ने शिंदे के मेयर को सपोर्ट करने का ऐलान कर दिया (india today)

‘उसी को जीने का हक है जमाने में जो, इधर का लगता रहे और उधर का हो जाए.’ 

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महाराष्ट्र के निकाय चुनाव के नतीजे आने के बाद मेयर पदों के लिए जैसी जोड़-तोड़ चल रही है, वसीम बरेलवी का ये शेर बिल्कुल सटीक बैठता है. इस 'हेराफेरी' में कुछ देर के लिए ही सही दुनिया ने धुर विरोधी कांग्रेस और भाजपा का भी गठबंधन देख लिया. बहुतों ने सोचा कि जब ये भी देख लिया तो और देखने को बचा क्या है? हम बताते हैं क्या बचा है?

कल्याण डोंबिवली (केडीएमसी) में मेयर बनाने के लिए शिंदे वाली शिवसेना को कुछ लोग कम पड़ रहे थे. इस कमी को पूरा करने के लिए पता है वो किसके सहारे है? राज ठाकरे वाली महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के. वही राज ठाकरे जो शिवसेना से अलग होने के बाद पहली बार इसी निकाय चुनाव में अपने चचेरे भाई उद्धव ठाकरे के साथ मंचों पर दिखे. आगे की लड़ाई साथ लड़ने की कसमें खाईं. नई दोस्ती में दोस्त के दुश्मन को दुश्मन मानने के भी वादे किए ही होंगे लेकिन राजनीति के वादे ‘शीशे का दिल’ होते हैं. टूट ही जाते हैं.

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, केडीएमसी चुनाव में खंडित जनादेश आया था. 122 सदस्यों वाले नगर निगम में शिंदे वाली शिवसेना ने 53 सीटें जीतीं, जो भाजपा से मामूली अंतर से आगे थी. भाजपा को 51 सीटें मिली थीं. बहुमत का आंकड़ा 62 का है. बुधवार को 21 जनवरी को शिवसेना (शिंदे गुट) ने नगर निकाय में सबसे बड़ी पार्टी होने का दावा किया लेकिन बहुमत की कुछ सीढ़ियां कम रह गईं, जिससे वह मेयर की कुर्सी तक नहीं पहुंच पाए. इसी वक्त वहां राज ठाकरे की MNS के पार्षद भी मौजूद थे. 

MNS नेता राजू पाटिल ने शिवसेना के सांसदों श्रीकांत शिंदे और नरेश म्हस्के से मुलाकात की. इस मीटिंग का नतीजा आया कि MNS ने औपचारिक रूप से शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को समर्थन देने की घोषणा कर दी. याद रहे कि इस निकाय चुनाव में MNS उद्धव ठाकरे की शिवसेना के साथ मिलकर चुनाव लड़ी है. 

MNS के 5 पार्षद ही नहीं, उद्धव ठाकरे की शिवसेना के टिकट पर चुने गए 4 पार्षदों ने भी शिंदे गुट को सपोर्ट करने का ऐलान कर दिया. यानी सिर्फ MNS ने ही नहीं, उद्धव ठाकरे के पार्षदों ने भी उनसे ‘गद्दारी’ कर दी. हालांकि, कहा जा रहा है कि जिन चार शिवसेना (UBT) के पार्षदों ने शिंदे की पार्टी को समर्थन दिया है, उनमें से दो MNS के प्रत्याशी थे, जो शिवसेना (यूबीटी) के निशान पर चुनाव लड़े थे. बाकी के जो दो UBT उम्मीदवार थे, वो पहले शिंदे गुट वाली शिवसेना से चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन वहां से टिकट नहीं मिला तो इधर आ गए. 

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केडीएमसी की लोकल बॉडी की राजनीति का ये ‘गुणा-गणित’ किसी का भी दिमाग हिला दे. कहा जा रहा है कि भाजपा का मेयर बनने से रोकने के लिए राज ठाकरे की पार्टी ने उद्धव ठाकरे के सियासी 'दुश्मन' एकनाथ शिंदे की पार्टी को सपोर्ट किया है. उसका ये 'कवर करना' समझ में आता है लेकिन शिंदे सेना इस पर क्या कहेगी? उसका तो भाजपा से कोई बैर नहीं. राज्य में दोनों मिलकर सरकार चला रहे हैं. फिर यहां एक दूसरे के खिलाफ ही साजिश क्यों करनी पड़ रही है?

हालांकि, अभी तक शिंदे सेना ने MNS के पार्षदों के समर्थन के साथ मेयर पद के लिए दावा किया नहीं है. पार्टी के नेता श्रीकांत शिंदे का कहना है कि MNS ने विकास के लिए हमारा समर्थन किया है. शिंदे ने ये भी कहा कि वह भाजपा को दरकिनार नहीं कर रहे हैं. एकनाथ शिंदे और रवींद्र चव्हाण के बीच बातचीत होगी. उसके बाद कोई फैसला लिया जाएगा. इसके बाद भी अगर मनसे हमारे साथ आती है तो हम उनका स्वागत करेंगे. 

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