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Noida Techie death case: शिकायत के बाद भी सोती रही अथॉरिटी, अब अधिकारियों को भेजा नोटिस, बिल्डर के खिलाफ FIR

Noida Techie death case: आस-पास के क्षेत्रों में रहने वाले लोग काफी समय से वहां की समस्याओं की शिकायत अथॉरिटी से कर रहे थे. यहां तक कि सांसद और विधायक ने भी अथॉरिटी को पत्र लिखा था, लेकिन इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया. फिलहाल जिस प्लॉट के गड्ढे में यह हादसा हुआ है, वहां के बिल्डर पर FIR दर्ज की गई है. एक जूनियर इंजीनियर को भी टर्मिनेट किया गया है.

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तीन-तीन विभाग मिलकर भी युवक को नहीं बचा पाए. (Photo: ITG)

उत्तर प्रदेश के नोएडा सेक्टर 150 में पानी से भरे गड्ढे में गिरकर सॉफ्टवेयर इंजीनियर की मौत के मामले ने तूल पकड़ लिया है. पूरी घटना पर पुलिस और प्रशासन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं. इसके बाद अब हरकत में आते हुए नोएडा अथॉरिटी ने कई अधिकारियों-कर्मचारियों को नोटिस भेजा है. नोएडा प्राधिकरण ने 18 जनवरी की देर रात प्रेस नोट जारी कर बताया गया है कि क्षेत्र के आसपास ट्रैफिक संबंधी कार्यों के लिए जिम्मेदार लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है.

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वहीं, आजतक से जुड़े भूपेंद्र चौधरी के इनपुट के मुताबिक नोएडा ट्रैफिक सेल विभाग में तैनात जूनियर इंजीनियर नवीन कुमार की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दी गई हैं. इसके अलावा उस बिल्डर कंपनी के खिलाफ भी FIR दर्ज की गई है, जो हादसे वाले प्लॉट पर बिल्डिंग बना रहा था. ग्रेटर नोएडा की नॉलेज पार्क कोतवाली पुलिस ने एमजेड विशटाउन प्लानर्स व लोटस ग्रीन नाम की कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज किया है. पुलिस ने मृतक युवक युवराज मेहता के पिता राजकुमार मेहता की शिकायत पर बिल्डरों के खिलाफ बीएनएस की धारा-105, 106 (1) और धारा-125 के तहत केस दर्ज किया है.

बिल्डर के कामों की मांगी रिपोर्ट

प्राधिकरण के CEO ने लोटस बिल्डर के आवंटन और निर्माण कार्य से जुड़ी रिपोर्ट भी विभागों से मांगी है. साथ ही कहा है कि जिन जगहों पर निर्माण चल रहे हैं, वहां सुरक्षा मानकों की अनदेखी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. सीईओ ने सभी कंस्ट्रक्शन साइटों के री-इंस्पेक्शन के निर्देश दिए हैं. लेकिन सवाल है कि यह एक्शन इतनी बड़ी घटना के बाद क्यों लिया गया. पहले से लपरवाही और नियमों की अनदेखी पर कोई सख्ती क्यों नहीं की गई.

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पता चला है कि सेक्टर 150 और आस-पास के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों ने कई बार नोएडा अथॉरिटी को लिखित में शिकायत दी थी. लोगों ने स्पीड ब्रेकर, रिफ्लेक्टर, खुले नाले और घटना वाले प्लॉट में पानी होने के साथ साथ साफ सफाई, स्ट्रीट लाइट जैसे मुद्दों पर कई बार शिकायत की थी. अथॉरिटी से इनका काम कराने की भी मांग की थी. यहां तक कि दादरी विधायक तेजपाल नागर और सांसद महेश शर्मा ने भी सेक्टर के लोगों की मांग पर प्राधिकरण को पत्र लिखा था. लेकिन इन शिकायतों पर अब तक कोई कार्वाई नहीं हुई थी. IGRS पोर्टल पर भी इसे लेकर शिकायत की गई थी. जिस पर वर्ग सर्कल्स 10 ने नोएडा प्राधिकरण के ट्रैफिक सेल की जिमेदारी बता कर पल्ला झाड़ लिया था. आज तक/इंडिया टुडे को इन लिखित शिकायतों की कॉपी भी मिली हैं.

बिल्डरों का 3000 करोड़ बकाया 

ऐसे में अब नोएडा प्राधिकरण के ट्रेफिक सेल और संबंधित अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं. जानकारी यह भी मिली है कि मामले में जिन दो बिल्डरों के खिलाफ FIR हुई है, उन पर नोएडा प्राधिकरण का 3000 करोड़ रुपये बकाया भी है. प्राधिकरण न तो यह बकाया वसूल पाया और न निर्माण वाली जगह पर सेफ्टी बेरिकेट्स लगवा पाया. आजतक से जुड़े अरविंद ओझा की रिपोर्ट के मुताबिक यह प्लॉट 7 जुलाई 2014 को लोटस ग्रीन बिल्डर को अलॉट हुआ था. स्पोर्ट सिटी के नाम पर अलॉट हुई इस जमीन को बिल्डर कंपनी ने अलग अलग लोगों को बेचा था. इस मामले में CBI और ED जांच की भी बात सामने आई है.

इधर पूरे हादसे पर सिस्टम की नाकामी भी खुलकर सामने आई है, जहां तीन-तीन विभागों की टीमें मिलकर भी एक युवक की जान नहीं बचा पाईं. बताया गया है कि मृतक इंजीनियर युवराज 2 घंटे तक अपनी जान बचाने के लिए शोर मचाता रहा. लाचार पिता भी सिस्टम के सामने गिड़गिड़ाते रहे, लेकिन 3 विभाग के लगभग 80 लोगों की टीम उनके बेटे को नहीं बचा पाई. यह विभाग हैं- फायर डिपार्टमेंट, नोएडा पुलिस और SDRF. फायर डिपार्टमेंट तो खासतौर से इस तरह के रेस्क्यू ऑपरेशन के लिए ट्रेन्ड होता है, बावजूद इसके युवराज को नहीं बचाया जा सका. पिता का आरोप है कि इन विभाग के लोग रेस्क्यू के लिए पानी में इसलिए नहीं उतरे, क्योंकि उनका कहना था पानी बहुत ठंडा है और पानी में सरिया भी हो सकता है.

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पिता ने बताई पूरी आपबीती

इधर, सेक्टर-150 टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी के निवासियों ने रविवार, 18 जनवरी को घटना के विरोध में कैंडल मार्च निकालकर प्रदर्शन किया. निवासियों ने मामले में लापरवाही बरतने वाले बिल्डरों के साथ प्राधिकरण के जिम्मेदारों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. वही आजतक से बात करते हुए मृतक युवराज के पिता ने बताया कि उन्हें रात के समय अपने बेटे का फोन आया कि उसकी गाड़ी नाले में जा गिरी है. इसके बाद वह अपने बेटे को ढूंढते हुए उस जगह पर पहुंचे. ज्यादा कोहरा होने के कारण उन्हें अपना बेटा नहीं दिखाई दे रहा था. तब उनके बेटे ने फोन की टॉर्च जलाकर दिखाया. इसके बाद उन्होंने पुलिस को बुलाया. साथ ही एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें भी मौके पर पहुंची. लेकिन उनके पास पर्याप्त साधन नहीं थे. वह केवल देखते रहे. टीमों ने पानी ठंडा होने के कारण और पानी के अंदर सरिया होने के कारण नहीं जाने की बात कही. उन्होंने अब अपनी शिकायत में प्राधिकरण के ऊपर भी आरोप लगाए हैं. हालांकि एक चश्मदीद, मोनिंदर नाम के लड़के ने पानी के अंदर जाकर देखने की कोशिश की, लेकिन तब तक काफी देर हो चुकी थी.

आजतक के सहयोगी अरुण त्यागी के इनपुट के मुताबिक मृतक के पिता राज कुमार मेहता टाटा यूरेका पार्क सोसाइटी के रहने वाले हैं. उन्होंने पुलिस को दी गई शिकायत में बताया है कि उनके बेटे की कार गहरे पानी में गिर गई थी. यह प्लॉट सेक्टर-150 के एमजेड विशटाउन प्लानर्स प्राइवेट लिमिटेड का है. जमीन लोटस ग्रीन्स कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड की थी. यहां लगभग 50 फुट गहरा गड्डा खोदा गया था. उसमें पानी था. प्लॉट पर कोई बैरिकेडिंग व रिफ्लेक्टर नहीं था. जिसके कारण यह घटना हुई. पिता ने बताया कि रात में करीब 12 बजे बेटे का फोन आया था. उसने कहा कि वह नाले में गिर गया, उसे आकर बचाओ. पहले वह ऐस सिटी नाले के पास पहुंचे, लेकिन वह वहां नहीं मिला. करीब 30 मिनट तक वह घटना स्थल को ढूंढते रहे. जब वह घटना स्थल को ढूंढते हुए पहुंचे तो देखा कि बेटा कार की छत पर लेटा हुआ है. इस दौरान डायल-112 पर पुलिस को सूचना दी. बेटा बीच-बीच में बचाओ-बचाओ की आवाज लगा रहा था. इस दौरान उसेने टॉर्च जलाकर अपने जिंदा होने का भी सबूत दिया.

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बचाया नहीं जा सका

सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और दमकल के कर्मियों ने पहले रस्सी फेंककर ही बचाव का प्रयास किया. मगर रस्सी उस तक नहीं पहुंची. जो क्रेन मंगवाई गई, वह भी उस तक नहीं पहुंची. मौके पर कोई गोताखोर भी नहीं पहुंचा. इस कारण वह पिता की आंखों के सामने ही कार सहित डूब गया. बाद में सफलता नहीं मिलते देख एसडीआरएफ और एनडीआरएफ के जवानों को बुलाया गया. कई घंटे के सर्च ऑपरेशन के बाद उन्होंने पुत्र को बाहर निकाला, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी. जिस जगह पर हादसा हुआ है, वहां पहले भी एक ट्रक कोहरे के कारण फंस चुका था. बावजूद उस हादसे से सबक नहीं लिया गया. जिस बेसमेंट में हादसे हुआ है, वहां हमेशा ही पानी भरा रहता है. ट्रक हादसे की घटना के बाद उसे दूर करने के लिए कोई प्रयास नहीं किया. घटना स्थल के पास नाला भी खुला हुआ है. वहां कोई रिफ्लेक्टर और बैरिकेड भी नहीं थी.

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