सॉफ्टवेयर इंजीनियर युवराज मेहता की मौत ने नोएडा अथॉरिटी की पोल खोल कर रख दी है. इस मामले ने कई स्तरों पर अथॉरिटी के काम करने के तरीकों और तैयारियों को लेकर सवाल खड़े किए हैं. सेक्टर 150 का यह गड्ढा बीते कई सालों से बारिश और आसपास की सोसायटियों का गंदा पानी समेटता रहा. धीरे-धीरे इसने तालाब की शक्ल ले ली है.
Noida Engineer Death: सालों की प्लानिंग, लाखों के खर्च के बाद 'मौत के गड्ढे' में फंसे युवराज मेहता
Noida Engineer Death: 2015 में सिंचाई विभाग ने एक स्टॉर्म वॉटर मैनेजमेंट प्लान बनाया था, जिसके तहत एक 'हेड रेगुलेटर' बनाकर पानी को हिंदन नदी की ओर मोड़ने का प्रस्ताव था. लेकिन यह नहीं बना और 2023 में Sector 150 और आसपास के इलाके बुरी तरह पानी में डूब गए थे.


इसी गड्ढे में 16 जनवरी को युवराज मेहता की कार फंस गई. वो काफी देर तक मदद के लिए चिल्लाते रहे, लेकिन नोएडा अथॉरिटी समेत पूरा प्रशासन लाचार साबित हुआ. पिता के सामने 27 वर्षीय युवराज की ठंडे पानी में डूबने से मौत हो गई.
यह मामला इतना बढ़ा कि यूपी सरकार को IAS अधिकारी लोकेश एम को नोएडा अथॉरिटी के CEO पद से हटाना पड़ा. स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) बनाई गई, जिसने मंगलवार, 20 जनवरी को मौके का दौरा किया.
मगर इस पानी भरे गड्ढे की कहानी केवल एक हादसे तक सीमित नहीं है. दस्तावेज बताते हैं कि बरसात और गंदे पानी से निपटने की तैयारी लगभग एक दशक पहले हो रही थी.
खूब प्लानिंग हुई, लाखों रुपये खर्च हुए, कई दौर तक फाइलें चलीं, सर्वे हुए, साइट निरीक्षण हुए, लेकिन काम जमीन पर नहीं उतरा. दरअसल, जिस प्लॉट में पानी जमा हुआ, वह पहले एक निजी मॉल प्रोजेक्ट के लिए आवंटित हुआ था. बाद में निर्माण नहीं हुआ तो बारिश का पानी और आसपास की सोसायटियों का वेस्ट वाटर वहीं इकट्ठा होता गया.
टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, 2015 में सिंचाई विभाग ने एक स्टॉर्म वॉटर मैनेजमेंट प्लान बनाया था, जिसके तहत एक 'हेड रेगुलेटर' बनाकर पानी को हिंडन नदी की ओर मोड़ने का प्रस्ताव था. फरवरी 2016 में नोएडा अथॉरिटी ने इस काम के सर्वे और डिजाइन के लिए 13.5 लाख रुपये सिंचाई विभाग को भी जारी कर दिए.
9 अक्टूबर, 2023 को गाजियाबाद में सिंचाई विभाग के कंस्ट्रक्शन डिवीजन के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ने नोएडा अथॉरिटी के वर्क सर्कल 10 के सीनियर मैनेजर को एक पत्र लिखा. इससे पता चला कि 2015 और 2023 के बीच कई बार बातचीत हुई थी.
इसमें डेवलप हो रहे सेक्टरों से बारिश के पानी को हिंडन नदी में मोड़ने की जरूरत पर भी जोर दिया गया था. पत्र में कहा गया था कि सिंचाई विभाग ने एक कंसल्टेंट के जरिए सेक्टर 150 में मैकेनिकल गेट वाले रेगुलेटर के डिजाइन तैयार किए थे. बाकायदा इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, दिल्ली (IIT Delhi) ने इसे मंजूरी दी.
4 अक्टूबर 2023 की एक जॉइंट साइट इंस्पेक्शन रिपोर्ट में कहा गया कि नए सेक्टरों का पानी भी इसी लाइन में जुड़ गया है, इसलिए पहले वाला डिजाइन बदलना होगा. तब मैकेनिकल गेट के बजाय हाइड्रोलिक या न्यूमेटिक गेट बनाने का सुझाव दिया गया. इसके बाद सिंचाई विभाग ने नया सर्वे और नया डिजाइन बनाने के लिए अलग से 30 लाख रुपये की मांग रख दी. हालांकि, रिवाइज्ड सर्वे रिपोर्ट आज तक लंबित है.
इस देरी का असर 2023 के मानसून में साफ दिखा. सेक्टर 150 और आसपास के इलाके बुरी तरह पानी में डूबे. कई सोसायटियों के बेसमेंट भरे, सीवर बैकफ्लो हुए और लोगों को खुद पंप लगाकर पानी निकालना पड़ा. स्थानीय लोगों का आरोप है कि नोएडा अथॉरिटी ने समय पर कदम नहीं उठाया, वर्ना इतना पानी जमा ही नहीं होता.
अब, इंजीनियर की मौत के बाद सिंचाई विभाग के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर बीके सिंह ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि एक हफ्ते में रेगुलेटर का काम शुरू हो जाएगा. उन्होंने कहा कि अब यह प्रोजेक्ट 10.5 करोड़ रुपये में तैयार होगा और नोएडा अथॉरिटी इसके लिए पैसा देगी.
विभाग को चुने गए कॉन्ट्रैक्टर की फाइनेंशियल बिड मिल गई है. बाकी आधिकारिक दस्तावेज और सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा करने जैसी औपचारिकताएं एक हफ्ते के अंदर पूरी होने की उम्मीद है. मानसून से पहले इसे पूरा करने का लक्ष्य है, ताकि पहले जैसी परेशानी ना हो.
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