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बंगाल का 'विभाजन' मांग रहे BJP सांसद अनंत महाराज को ममता बनर्जी ने क्यों दिया बंग विभूषण?

भाजपा के राज्यसभा सांसद अनंत महाराज को पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी ने बंग विभूषण सम्मान दिया है. वह राजबोंगसी समुदाय के लोगों में अच्छा-खासा प्रभाव रखते हैं. ऐसे में इस सम्मान के सियासी मायने भी निकाले जा रहे हैं.

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नागेन रॉय को ममता बनर्जी ने दिया बंगाल का सर्वोच्च सम्मान. (India today)

बंगाल में अप्रैल-मई में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं. इससे कुछ महीनों पहले कोलकाता के देशप्रिया पार्क में एक मंच लगा है. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी इस मंच पर हैं और उनके साथ बंगाली संस्कृति से जुड़ी 25 नामचीन हस्तियां भी मौजूद हैं. नचिकेता चक्रवर्ती, बाबुल सुप्रियो, इमान चक्रवर्ती जैसे गायकों के साथ एक शख्सियत ऐसी है, जिसका इस मंच पर होना साधारण बात नहीं है. वो भी चुनाव से ठीक पहले. 

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वो शख्सियत हैं भाजपा के राज्यसभा सांसद अनंत महाराज. ये वही अनंत महाराज हैं, जिन्होंने बंगाल का विभाजन कर कूचबिहार नाम से अलग राज्य बनाने की मांग के लिए आंदोलन छेड़ रखा है. अब वही ‘बंग विभूषण’ बन गए हैं. 

हालांकि, अनंत महाराज ममता बनर्जी के साथ किसी राजनीतिक कार्यक्रम के लिए इस मंच पर नहीं आए हैं. उन्हें ममता बनर्जी की सरकार राज्य के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘बंग विभूषण’ से सम्मानित कर रही हैं. 21 फरवरी को मातृभाषा दिवस के अवसर पर अनंत महाराज उर्फ नागेन रॉय को ये सम्मान दिया गया. कला, संस्कृति, साहित्य, लोक प्रशासन और लोक सेवा के क्षेत्र में असाधारण योगदान के लिए बंगाल सरकार की ओर से ये सम्मान दिया जाता है. 

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इंडिया टुडे के मुताबिक, सीएम ममता बनर्जी ने 25 अन्य हस्तियों के साथ अनंत महाराज को बंग विभूषण सम्मान देते हुए कहा, 

राजबोंगसी भाषा और संस्कृति के प्रचार-प्रसार में अनंत महाराज की भूमिका के लिए उन्हें यह पुरस्कार प्रदान करते हुए हमें खुशी हो रही है. हम चाहते हैं कि वे राजबोंगसी समुदाय और समाज के लिए निरंतर कार्य करते रहें.

वहीं, सम्मान पाने के बाद नागेन रॉय ने कहा कि उन्होंने कभी इस पुरस्कार को पाने के बारे में सपनों में भी नहीं सोचा था. अपने योगदान के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा,

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मैं हिंदी कविताएं लिखता था और अभी भी लिखता हूं. मैंने 'अधिकारी दर्शन ज्योति' नाम की किताब लिखी है, जिसमें राजबोंगसी समुदाय के सभी रीति-रिवाजों, जैसे विवाह, श्राद्ध समारोह, अन्नप्राशन आदि को दर्ज किया गया है.

रॉय ने आगे बताया कि उन्होंने तकरीबन 70 से 75 बच्चों को वकील बनने में मदद की है और उनमें से लगभग 40% को आईएएस और आईपीएस अधिकारी बनने के लिए प्रशिक्षण दे रहे हैं.

राजबोंगसी संस्कृति के प्रचार प्रसार के लिए नागेन रॉय को ये सम्मान मिलना एकदम सामान्य बात है. इन सब में जो ‘असामान्य’ है, वो ये कि भाजपा सांसद होने के बावजूद ममता बनर्जी सरकार ने उन्हें ये सम्मान देने का फैसला किया. वो भी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले. 

इंडिया टुडे की रिपोर्ट की मानें तो उनका नाम भी शायद अंतिम समय में हाथ से लिखकर जोड़ा गया. हालांकि, इसकी पुष्टि नहीं हुई है. अटकलें तेज हैं कि क्या अनंत महाराज का चुनाव से पहले ‘पालाबदल’ हो सकता है? 

रॉय से जब ये सवाल पूछा गया तो उन्होंने इसे खारिज कर कहा,

क्या मैं किसी पार्टी में शामिल हुआ हूं? क्या मैं किसी पार्टी में शामिल हुआ था? नहीं. क्या अब कोई संभावना है? मुझे इसमें कोई दिलचस्पी नहीं है.

कौन हैं नागेन रॉय?

नागेन रॉय उर्फ अनंत महाराज भाजपा के राज्यसभा सांसद हैं. भाजपा ने उन्हें 2023 में अपने कोटे से राज्यसभा भेजा था. वो बंगाल से भाजपा के पहले राज्यसभा सांसद हैं. बंगाल के उत्तरी इलाके में रहने वाले राजबोंगसी लोगों में उनकी अच्छी-खासी पैठ है. यहां वो ‘अनंत महाराज’ के नाम से जाने जाते हैं. कहते हैं कि ‘महाराज’ की उपाधि उनके समुदाय के लोगों ने उन्हें दी है. लंबे समय से वह कूच बिहार और उत्तर बंगाल के अन्य जिलों को मिलाकर एक अलग राज्य के लिए लड़ रहे हैं. इस मांग के लिए बनाए गए एक संगठन 'ग्रेटर कूच बिहार पीपल्स एसोसिएशन' (GCPA) के वो अध्यक्ष भी हैं. 

2011 की जनगणना के अनुसार, राजबोंगसी कम्युनिटी की आबादी लगभग 33 लाख है. यह समुदाय उत्तरी और मध्य बंगाल और असम के कुछ हिस्सों में अच्छी-खासी संख्या में मौजूद है. इन जिलों में कछार, जलपाईगुड़ी, उत्तर दिनाजपुर, दार्जिलिंग, मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे जिले शामिल हैं.

अनंत राय ने राजबोंगसी समुदाय के बीच अपनी छवि एक 'गुरु' की तरह बनाई है. कूचबिहार में राजा की तरह महल बनवाया हुआ है. दी लल्लनटॉप की एक रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल के सीनियर पत्रकार प्रभाकर मणि तिवारी कहते हैं कि अनंत महाराज खुद को राजबोंगसी समुदाय का राजा मानते हैं, लेकिन इनका कूच बिहार के राजपरिवार से कोई लेना-देना नहीं है. करीब दो दशक पहले वो ग्रेटर कूच बिहार आंदोलन में शामिल हो गए थे और हिंसक आंदोलनों के कारण कई बार अंडरग्राउंड होना पड़ा. लंबे समय तक वह असम में भी शरणागत रहे.

साल 2016 में टीएमसी ने अनंत राय पर आरोप लगाया था कि वे ‘नारायणी सेना’ नाम से एक अलग ग्रुप बना रहे हैं. आरोप था कि इस ग्रुप को सीमा सुरक्षा बल (BSF) ट्रेनिंग दे रही है, लेकिन BSF ने पार्टी के इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया.

सम्मान की टाइमिंग पर सवाल

बंगाल के विभाजन की मांग करने वाले अनंत महाराज को टीएमसी सरकार द्वारा बंग विभूषण सम्मान देने की टाइमिंग ने लोगों का ध्यान खींचा है. यहां अप्रैल से मई के बीच विधानसभा चुनाव होने हैं. तृणमूल कांग्रेस 15 सालों से बंगाल की सत्ता पर काबिज है, हाल के वर्षों में भाजपा उसकी मुख्य विरोधी बनकर उभरी है. इधर कुछ सालों से राजबोंगसी समुदाय के इलाकों में टीएमसी की पकड़ लगातार कमजोर हुई है. पिछले कई चुनावों में यहां भाजपा ने बेहतर प्रदर्शन किया है.

ऐसे में अगर चुनावी मकसद से अनंत महाराज पर डोरे डाले जा रहे हों तो इसमें किसी तरह की हैरानी की बात नहीं है. वह पहले टीएमसी के समर्थक माने जाते थे लेकिन बाद में उन्होंने भाजपा से दोस्ती गांठ ली. भाजपा ने भी उन्हें निराश नहीं किया. लोकसभा चुनाव लड़ाने की चर्चा करते-करते 2023 में अनंत महाराज को राज्यसभा भेज दिया. 

भाजपा में जाने के बाद कूचबिहार आंदोलन को लेकर अनंत महाराज के सुर भी नरम पड़ गए. राज्यसभा के लिए नामांकन के बाद जब उनसे इस बारे में पूछा गया तो उनका जवाब था,  

मैं राज्य का विभाजन चाहता हूं या बंगाल का एकीकरण. इसका जवाब तो समय ही देगा. मुझे खुशी है कि उन्होंने मुझे चुना. मैं अपने क्षेत्र के विकास के लिए काम करूंगा.

अब विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर अनंत महाराज गियर चेंज करते दिख रहे हैं. हाल ही में उन्होंने बंगाल में SIR यानी स्पेशल इंटेंस रिवीजन की चुनाव आयोग की प्रक्रिया पर असंतोष जताया था. उन्होंने कहा था कि चुनाव आयोग की इस पहल से राजबोंगसी लोगों को मुश्किलें हो रही हैं. 

साल 2024 में ममता बनर्जी अनंत महाराज के आवास पर गई थीं. सीएम के इस दौरे ने भी तब खूब सुर्खियां बटोरी थीं. अब ममता बनर्जी अनंत महाराज को बंगाल का सर्वोच्च नागरिक सम्मान दे रही हैं, जिसे आगामी चुनाव को देखते हुए टीएमसी का एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है.

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