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गंदे पानी से हुई मौतों के बाद इंदौर के कलेक्टर-मेयर RSS की बैठक में गए, कांग्रेस बोली- 'सर्कस चल रहा'

Indore के Mayor और Collector 8 जनवरी को RSS कार्यालय में एक बैठक में शामिल हुए. Congress ने बैठक में शामिल होने को लेकर प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए हैं. वहीं BJP ने इसे शिष्टाचार बैठक बताते हुए दोनों का बचाव किया है.

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इंदौर के कलेक्टर शिवम वर्मा की आरएसएस ऑफिस से बाहर निकलती तस्वीर वायरल है (एक्स)

इंदौर के कलेक्टर शिवम वर्मा और मेयर पुष्यमित्र भार्गव 8 जनवरी को देर रात राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के कार्यालय में हुई एक बैठक में शामिल हुए. ऐसे वक्त में जब इंदौर में प्रदूषित पानी की वजह से हुई मौतों को लेकर माहौल गर्माया हुआ है, शिवम वर्मा और पुष्यमित्र के खिलाफ विपक्ष ने मोर्चा खोल दिया. कांग्रेस ने दोनों पर ‘बीजेपी कार्यकर्ता’ की तरह काम करने का आरोप लगाया है.

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इंडियन एक्सप्रेस से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, RSS के मालवा प्रांत प्रचारक राजमोहन सिंह ने सुदर्शन रोड स्थित मालवा क्षेत्रीय इकाई के मुख्यालय में यह बैठक बुलाई थी. बैठक में इंदौर आपदा में स्थानीय प्रशासन की विफलता पर चर्चा हुई. मेयर पुष्यमित्र भार्गव ने RSS कार्यालय जाने की बात स्वीकार की है. उन्होंने कहा,

एक स्वयंसेवक के तौर पर मैं अक्सर RSS कार्यालय जाता हूं. इसका मौजूदा संकट से कोई लेना-देना नहीं है.

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कांग्रेस ने उठाए सवाल?

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर मेयर और कलेक्टर के RSS कार्यालय जाने को लेकर सवाल उठाए हैं. उन्होंने लिखा, 

 इंदौर में बीजेपी सरकार और प्रशासन सरकार नहीं, सर्कस चला रहे हैं. इंदौर में जहरीले पानी से 20 लोगों की मौत हो गई और इसके बावजूद इंदौर के मेयर और कलेक्टर देर रात RSS के कार्यालय में बैठक करने गए. क्या इंदौर के अधिकारी अब सरकार की जगह RSS के लिए काम करेंगे?

जीतू पटवारी के सवालों को खारिज करते हुए बीजेपी प्रवक्ता शिवम शुक्ला ने कहा, 

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यह एक शिष्टाचार भेंट थी और इसमें कुछ भी गलत नहीं था. क्या अधिकारी लोगों से मिल नहीं सकते? कांग्रेस को इस मुलाकात के बारे में गलत जानकारी फैलाना बंद करना चाहिए.

बीजेपी से जुड़े एक और पदाधिकारी ने बताया कि यह महज एक शिष्टाचार बैठक थी. ये दावा नहीं किया जा सकता कि RSS के प्रति उनकी जवाबदेही तय की जा रही थी. उन्होंने आगे बताया,

 बैठक में उन लोगों ने संघ से जुड़े पदाधिकारियों को बताया कि इंदौर में स्थिति क्यों बिगड़ी, समय पर फाइलें आगे क्यों नहीं बढ़ाई गईं और फिर स्थिति को कैसे संभाला गया.

इस बैठक ने संस्थागत प्रोटोकॉल को लेकर बहस को और तेज कर दिया है. जिला कलेक्टर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी के तौर पर राज्य सरकार के अधीन एक चेन ऑफ कमांड में काम करते हैं, जबकि मेयर नगर निगम के कानूनों के मुताबिक काम करते हैं.

वीडियो: नेतानगरी: इंदौर में मौतों का जिम्मेदार कौन, किन नेता-अधिकारियों के नाम सामने आए?

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