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कानपुर के हैलट हॉस्पिटल के जच्चा-बच्चा वार्ड में टहल रहा कुत्ता, लोग बोले- 'डॉक्टर साहब आ गए'

Kanpur Hallet Hospital: वीडियो में जच्चा और नवजात बेड पर लेटे नजर आते हैं, जबकि वार्ड में न तो कोई डॉक्टर दिख रहा है और न ही वार्ड बॉय. इसी दौरान एक आवारा कुत्ता वार्ड में बेखौफ होकर पहुंच जाता है.

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मरीज के तीमारदार ने इस पूरी घटना को अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया. (फोटो: आजतक)
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रंजय सिंह

उत्तर प्रदेश में कानपुर के हैलट हॉस्पिटल का एक वीडियो सामने आया है, जिसने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. वीडियो अस्पताल के मैटरनिटी वार्ड का है. जच्चा और नवजात बेड पर लेटे नजर आते हैं, जबकि वार्ड में न तो कोई डॉक्टर दिख रहा है और न ही वार्ड बॉय. इसी दौरान एक आवारा कुत्ता वार्ड में बेखौफ होकर पहुंच जाता है. 

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हैलट, जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से संबद्ध है और कानपुर का एक बड़ा सरकारी अस्पताल है. मौके पर मौजूद एक मरीज के तीमारदार (मरीज की देखभाल करने वाले) ने इस पूरी घटना को अपने मोबाइल कैमरे में कैद कर लिया. इसके बाद वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिया गया, जो देखते ही देखते वायरल हो गया. बैकग्राउंड में एक शख्स को कहते हुए सुना जा सकता है- ‘डॉक्टर साहब आ गए.’

आजतक की रिपोर्ट के मुताबिक, हैलट हॉस्पिटल के अधीक्षक डॉ. आरके सिंह ने बताया कि यह वीडियो दो-तीन दिन पुराना हो सकता है. उन्होंने बताया कि वीडियो किसने बनाया और वायरल किया, इसकी जानकारी अभी नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि उस समय वार्ड बॉय कहां था, इसकी जांच की जा रही है और यह पता लगाया जा रहा है कि कुत्ता किसकी लापरवाही से अंदर घुसा. जांच के बाद जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की जाएगी.

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डॉक्टरों का कहना है कि मैटरनिटी वार्ड जैसे संवेदनशील जगहों पर आवारा कुत्तों से संक्रमण का गंभीर खतरा होता है. नवजात शिशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता बहुत कमजोर होती है, ऐसी स्थिति में यह जानलेवा भी हो सकता है.

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मामले पर जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. संजय काला का बयान भी सामने आया है. उन्होंने कहा कि वायरल वीडियो की जांच की जा रही है. वीडियो में दिख रहे वार्ड और तारीख की पुष्टि की जा रही है. जांच पूरी होने के बाद अगर किसी भी स्तर पर लापरवाही पाई गई, तो संबंधित स्टाफ या विभाग के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी. 

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इस घटना को सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन भी माना जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने साफ निर्देश दिए हैं कि अस्पताल और स्कूल जैसे संवेदनशील संस्थानों में आवारा जानवरों की मौजूदगी किसी भी हाल में मंजूर नहीं है. इसके लिए नगर निगम और स्थानीय प्रशासन को जिम्मेदार ठहराया गया है.

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