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सरकार ने इस पाकिस्तानी महिला को सीमापार भेज दिया था, कोर्ट ने वापस भारत क्यों बुला लिया?

J&K High Court: महिला के पति शेख जहूर अहमद ने कोर्ट को बताया कि पाकिस्तान में उनकी देखभाल और संरक्षण के लिए कोई नहीं है. और वो कई बीमारियों से जूझ रही हैं. ऐसे में कोर्ट ने क्या कहा?

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कोर्ट ने महिला को वापस लाने का निर्देश दिया है. (फ़ाइल फ़ोटो- इंडिया टुडे)

पहलगाम आतंकवादी हमले (Pahalgam Terror Attack) के बाद भारत सरकार ने सभी पाकिस्तानियों के वीजा रद्द करने का फैसला किया. साथ ही आदेश दिया कि वे पाकिस्तान चले जाएं. और अगर ऐसा नहीं करते हैं तो उन्हें डिपोर्ट किया जाएगा. इस दौरान जम्मू में रह रही एक महिला को पाकिस्तान भेज दिया गया. अब जम्मू-कश्मीर और लद्दाख हाई कोर्ट ने केंद्रीय गृह मंत्रालय निर्देश दिया है कि वो उस महिला को भारत वापस लाए. वो लगभग चार दशकों से भारत में रह रही थीं और उनके पास दीर्घकालिक वीजा (Long-Term Visa) भी था.

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महिला की पहचान 63 साल की रक्षंदा रशीद के रूप में हुई है. उनकी तरफ़ से उनकी बेटी फलक जहूर ने एक याचिका दायर की थी. जिस पर सुनवाई करते हुए, जस्टिस राहुल भारती ने ये निर्देश दिया. कोर्ट ने केंद्र सरकार को दस दिनों के अंदर रक्षंदा को वापस लाने के लिए कहा है. वहीं, 1 जुलाई तक इसे लेकर रिपोर्ट पेश करने को कहा है.

रक्षंदा के पति शेख जहूर अहमद ने कोर्ट को बताया कि पाकिस्तान में उनकी देखभाल और संरक्षण के लिए कोई नहीं है. और वो कई बीमारियों से जूझ रही हैं. ऐसे में सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा,

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मानव अधिकार, इंसान के जीवन की सबसे ज़रूरी चीज़ होती है. इसलिए ऐसे मौक़े आते हैं, जब कोर्ट को किसी मामले के गुण-दोषों के बावजूद, क्षमादान देना चाहिए. इसीलिए कोर्ट ने महिला को वापस लाने का निर्देश दिया है.

कोर्ट ने ये भी कहा कि चूंकि महिला के पास दीर्घकालिक वीज़ा था. इसलिए उसका ‘डिपोर्टेशन ग़लत’ हो सकता है. ये भी हो सकता है कि उसे ‘डिपोर्टेशन के उचित आदेश के बिना’ जबरन बाहर निकाल दिया गया हो.

अप्रैल में पहलगाम हमले के बाद केंद्र सरकार ने पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द कर दिए थे और उन्हें भारत छोड़ने का निर्देश दिया था. 27 अप्रैल को समय सीमा ख़त्म हुई. जिसके बाद, अधिकारियों ने कई पाकिस्तानी नागरिकों को वापस भेज दिया. रक्षंदा रशीद उन्हीं में से एक हैं.

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मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, रक्षंदा बीते 38 सालों से अपने पति और दो बच्चों के साथ जम्मू में रह रही थीं. उन्हें 30 अप्रैल को डिपोर्ट कर दिया गया था. फिलहाल वो लाहौर के एक होटल में फंसी हुई हैं. 

कोर्ट ने कहा कि उसके मामले की विस्तृत जांच किए बिना और संबंधित अधिकारियों से उसके डिपोर्टेशन के संबंध में उचित आदेश लिए बिना, उसे जबरन बाहर कर दिया गया.

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