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'पानी बहुत गंदा है, कुछ करिए', इंदौर के लोग विनती करते रहे, मौत से पहले नहीं खुली सरकार की आंखें

Indore के Bhagirathpura में जो भी हुआ वो कोई अचानक घटित आपदा नहीं थी. नगर निगम के रिकॉर्ड, हेल्पलाइन के डेटा और स्थानीय निवासियों और अधिकारियों के बयान बताते हैं कि चेतावनियों की अनदेखी और नौकरशाही की सुस्त चाल ने इस हादसे को निमंत्रण दिया.

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इंदौर के भागीरथपुरा में लगभग दो महीनों से पानी में गड़बड़ी की शिकायतें आ रही थीं (वीडियोग्रैब, इंडिया टुडे)

इंदौर (Indore Water Tragedy). देश का सबसे स्वच्छ शहर, जिसकी स्वच्छता की मिसाल दी जाती है. लेकिन शहर के भागीरथपुरा (Bhagirathpura) इलाके में बीते दिनों जो हुआ, उसने शहर की स्वच्छता के तमगे पर एक दाग छोड़ दिया. इंदौर में गंदे पानी से हुई मौतें एक हादसा भर नहीं, यह सिस्टम की अनदेखी, लापरवाही, सुस्ती और जवाबदेही से बचने की कोशिशों का परिणाम है. लगभग दो महीने पहले से ही पानी में बदबू और गंदगी की शिकायतें आने लगी थीं. लेकिन उसे सुन कर भी अनसुना किया जाता रहा.

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इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, दो महीने पहले ही इस आपदा की आहट मिली थी. जब इंदौर मेयर की हेल्पलाइन नंबर पर पानी में गड़बड़ी की एक शिकायत आई. तारीख 15 दिसंबर. इंदौर के भागीरथपुरा इलाके का वार्ड नंबर 11. यहां रहने वाले दिनेश भारती वर्मा को एक स्थानीय मंदिर के पास स्थित कुंए के पानी में कुछ गड़बड़ी दिखी. उन्होंने चेतावनी के लहजे में शिकायत की, बोरवेल के पानी में नाले का पानी मिक्स हो रहा है. मंदिर में आने वाले लोगों के स्वास्थ्य को इससे खतरा होगा.

मिड नवंबर आते-आते समस्या और गंभीर हो गई. एक और निवासी शिवानी थकले की शिकायत आई, गंदे पानी में एसिड मिला हुआ है. जैसे-जैसे दिसंबर बीतता गया, शिकायतें बढ़ती गईं और उनकी गंभीरता भी. भागीरथपुरा निवासियों ने नर्मदा वॉटर सप्लाई में बदबू की शिकायत की. गणेश परस्कर और यश परेवा ने बताया कि 28 दिसंबर तक वार्ड 11 के 90 प्रतिशत लोग बीमारी के चपेट में आ गए. उन्हें उल्टी, दस्त और डिहाइड्रेशन होने लगा.

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ऋतिक प्रजापत ने बताया कि 29 दिसंबर को मौत का सिलसिला शुरू होने के बाद कहीं जाकर प्रशासन की नींद खुली. भागीरथपुरा में दूषित पानी पीने से कम से कम 9 लोगों की जान गई है, जबकि 200 से ज्यादा लोग अस्पताल में भर्ती हैं. प्रथम दृष्टया इसका कारण पीने की पानी की पाइपलाइन पर बना टॉयलेट बताया जा रहा है, जिसके नीचे कोई सेफ्टी टैंक नहीं था.

गलतियां और दोष मढ़ने का खेल

साल 2025 में इंदौर शहर से पानी की क्वालिटी को लेकर 266 शिकायतें आईं. भागीरथपुरा समेत जोन 4 में 23 औपचारिक शिकायतें दर्ज की गईं. इंदौर मेयर की हेल्पलाइन रिकॉर्ड के मुताबिक, पिछले एक साल में असिस्टेंट इंजीनियर योगेश जोशी को दूषित पानी के 16 मामले निपटारे के लिए दिए गए. इनमें से पांच मामलों का समाधान हो गया. वहीं सात मामलों को बंद कर दिया गया और उन्हें कंप्लीट बता दिया गया.

इसके अलावा इंदौर नगर निगम से जुड़े सूत्रों ने बताया कि लगभग साल भर पहले नर्मदा वॉटर सप्लाई के लिए नई वॉटर पाइपलाइन बिछाने के लिए एक फाइल तैयार की गई थी. निगम के सीनियर अधिकारियों के निरीक्षण के बाद टेंडर जारी कर दिया गया. 12 नवंबर, 2024 को फाइल तैयार की गई और 30 जुलाई, 2025 को टेंडर जारी कर दिया गया. इस प्रोजेक्ट के आखिरी चरण को पूरा करने का वर्क ऑर्डर 26 दिसंबर, 2025 को पारित किया गया. यानी जब स्थिति हाथ से निकलने लगी थी.

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भागीरथपुरा इलाके के पार्षद कमल वाघेला ने बताया कि लगभग सात महीनों तक फाइल को बिना किसी कारण के लटकाया गया. वाघेला ने 31 दिसंबर को मुख्यमंत्री मोहन यादव को एक पत्र लिखा था, जिसमें उन्होंने आरोप लगाया कि उनके बार-बार अनुरोध करने के बावजूद अधिकारी यही जवाब देते रहे कि प्रक्रिया चल रही है. 

भागीरथपुरा में जो भी हुआ वो कोई अचानक घटित आपदा नहीं थी. नगरनिगम के रिकॉर्ड, हेल्पलाइन के डेटा और स्थानीय निवासियों और अधिकारियों के बयान बताते हैं कि चेतावनियों की अनदेखी और नौकरशाही की सुस्त चाल ने इस हादसे को निमंत्रण दिया.

वीडियो: इंदौर में दूषित पानी के सवाल पर नगर निगम के अधिकारी ने क्या कहा?

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