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"ये पहली बार नहीं...", भारतीयों को जंजीर-हथकड़ी में भेजने पर एस जयशंकर ने संसद में ये बातें कहीं

विदेश मंत्री S Jaishankar ने माना कि अमेरिका में भारतीय अमानवीय हालात में फंसे थे. उन्होंने कहा कि अवैध प्रवासियों को वापस लेना ही था. हम डिपोर्टेशन के मामले पर लगातार US की सरकार के संपर्क में हैं ताकि भारतीयों के साथ किसी तरह का अमानवीय व्यवहार न हो.

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राज्यसभा में विपक्ष के आरोपों का जवाब देते विदेश मंत्री एस. जयशंकर. (फोटो- पीटीआई)
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गीता मोहन

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 6 फरवरी को संसद में अमेरिका से डिपोर्ट किए गए भारतीयों के मुद्दे पर सरकार का रुख सामने रखा. उन्होंने अप्रवासी भारतीयों के साथ कथित तौर पर ‘अमानवीय’ बर्ताव को लेकर राज्यसभा में सरकार का पक्ष रखा है. एस जयशंकर ने कहा कि अवैध प्रवासियों को डिपोर्ट करने का मामला कोई नया नहीं है. उन्होंने बताया कि अमेरिकी ने नियमों के मुताबिक ही प्रवासी भारतीयों को वापस भेजा है.

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हालांकि एस जयशंकर ने ये माना कि अमेरिका में भारतीय लोग अमानवीय हालात में फंसे थे. कई प्रवासियों ने बताया था कि वापस भेजे जाने के दौरान उनके पैरों की जंजीरें नहीं खोली गईं और उन्हें खुद को घसीटकर टॉयलेट तक जाना पड़ा. इन आरोपों पर विदेश मंत्री ने कहा, 

“टॉयलेट जाने के लिए बेड़ियां खोल दी जाती थीं. अमेरिकी एजेंसी ICE (इमिग्रेशन ऐंड कस्टम्स एनफोर्समेंट) ने भारत को बताया कि महिलाओं और बच्चों को डिपोर्टेशन के दौरान बांधकर नहीं रखा जाता. 2012 से लागू स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) के तहत डिपोर्ट किए जा रहे लोगों को फ्लाइट में बांधकर ले जाया जाता है.”

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जयशंकर ने आगे कहा,

“अवैध प्रवासियों को वापस लेना ही था. हम डिपोर्टेशन के मामले पर लगातार US की सरकार के संपर्क में हैं ताकि भारतीयों के साथ किसी तरह का अमानवीय व्यवहार न हो.”

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जयशंकर ने बताया अब तक इतने लोगों को किया गया है डिपोर्ट. 

जयशंकर सदन को विश्वास दिलाया कि अवैध प्रवास पर नकेल कसने के लिए कदम उठाए जाएंगे. उन्होंने कहा कि सरकार पता लगा रही है कि अवैध प्रवास कैसे हुआ. अधिकारियों को कहा गया है कि वे वापस लौटने वाले हर शख़्स के साथ बात करें और पता लगाएं कि वे अमेरिका कैसे गए, एजेंट कौन था और हम कैसे सावधानी बरतें ताकि यह फिर से न हो.

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विदेश मंत्री ने ऊपरी सदन को बताया,

“हर देश में लोगों की राष्ट्रीयता की जांच होती है. 2012 से ही ये नियम लागू हैं. अवैध इमिग्रेशन पर अमेरिका ऐसे ही कार्रवाई करता है. पहले भी इस तरह से ही अमेरिका से लोग वापस भेजे गए हैं. यह सभी देशों की जिम्मेदारी है कि अगर उनके नागरिक विदेश में अवैध रूप से रह रहे पाए जाते हैं तो उन्हें वापस ले लिया जाए.”

जयशंकर ने अमेरिका से अब तक भारत डिपोर्ट किए गए लोगों के आंकड़े भी दिए. उन्होंने बताया कि साल 2009 में 734, साल 2010 में 799, साल 2011 में 597 और साल 2012 में 530 भारतीयों को डिपोर्ट किया गया था.

इससे पहले गुरुवार को दोनों सदनों में विपक्षी सांसदों ने इस मुद्दे पर हंगामा किया और विदेश मंत्री से जवाब मांगा था. घटनाक्रम पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने कहा था,

“कहा गया था कि राष्ट्रपति ट्रंप और पीएम मोदी बहुत अच्छे दोस्त हैं. पीएम मोदी ने ऐसा क्यों होने दिया? क्या हम उन्हें वापस लाने के लिए अपना विमान नहीं भेज सकते थे? क्या इंसानों के साथ ऐसा व्यवहार किया जाता है कि उन्हें हथकड़ी और बेड़ियां पहनाकर वापस भेजा जाता है? विदेश मंत्री और प्रधानमंत्री को जवाब देना चाहिए.”

वहीं समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा था, “ये सपना दिखा रहे थे भारत विश्वगुरू बन गया है, पर सरकार अब मौन है. अमेरिका ने भारतीयों को बेड़ियां लगाकर दास की तरह भेजा है. विदेश मंत्रालय क्या कर रहा है? सरकार महिलाओं और बच्चों को भी नहीं बचा पाई. सरकार बताए कि ये लोग भारत छोड़कर क्यों गए थे?”

गौरतलब है कि अमेरिका के अलग-अलग राज्यों में अवैध रूप से रह रहे 104 भारतीयों को अमेरिकी सेना का विमान बुधवार को अमृतसर लैंड किया था. इनमें 25 महिलाएं और 13 बच्चे भी शामिल थे. रिपोर्ट्स के मुताबिक इन लोगों में 33-33 हरियाणा और गुजरात, जबकि 30 लोग पंजाब के हैं. 

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