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US-इजरायल जैसी हरकत नहीं करेंगे चीन-पाकिस्तान, 'पिनाका' की 7वीं रेजीमेंट सेना में शामिल

भारत ने अपनी पश्चिमी और उत्तरी सीमा पर सुरक्षा व्यवस्था को चाक चौबंद करने की तैयारी शुरू कर दी है. इसी मुहिम के तहत भारतीय सेना ने स्वदेशी रॉकेट सिस्टम पिनाका की एक और रेजीमेंट को अपने बेड़े में शामिल किया है. यही नहीं आने वाले सालों में सेना इसकी संख्या और बढ़ाने वाली है.

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भारतीय सेना ने पिनाका के एक और रेजिमेंट को अपने बेड़े में शामिल किया है. (Defence Ministery India)

मिडिल ईस्ट में अमेरिका-इजरायल और ईरान के टकराव ने दुनिया भर में सुरक्षा चिंताओं को बढ़ा दिया है. इस बीच भारत ने भी अपनी सीमाओं की मजबूत घेराबंदी शुरू कर दी है. खासकर पाकिस्तान और चीन से लगी सीमाओं पर. खबर है कि भारतीय सेना ने अपनी ताकत बढ़ाने के लिए स्वदेशी रॉकेट सिस्टम 'पिनाका' की एक और रेजीमेंट को अपने बेड़े में जगह दी है.

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टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान और चीन से लगी सीमा पर अब भारतीय सेना के पास कुल 7 पिनाका रेजिमेंट ऑपरेशनल हो चुकी हैं. साल के अंत तक एक और रेजिमेंट को ऑपरेशनल करने की तैयारी है. आठवीं रेजिमेंट के लिए आधे से ज्यादा साजोसामान भी आर्मी को मिल चुके हैं. सेना की तैयारी अगले साल तक अपने बेड़े में दो और रेजिमेंट जोड़ने की तैयारी है.

अप्रैल 2020 में भारतीय सेना ने भारत अर्थ मूवर्स लिमिटेड (BEML) टाटा पावर(अब टाटा एडवांस सिस्टम्स) और लार्सन एंड ट्रुबो कंपनी के साथ छह पिनाका रेजिमेंट की सप्लाई की डील की थी. इसमें 2,580 करोड़ रुपये की लागत आने वाली है.

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पिनाका एक स्वदेशी मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर है. इसका मतलब कि इससे एक साथ कई रॉकेट लॉन्च किए जा सकते हैं. इसे रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने डिजाइन और डेवलप किया है. इसके निर्माण में प्राइवेट सेक्टर को भी शामिल किया गया है. एक पिनाका मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर 44 सेकेंड में एकसाथ 12 रॉकेट दाग सकता है. इसके शुरुआती वर्जन की रेंज लगभग 40 किलोमीटर थी. बाद में पिनाका के कई अपग्रेडेड वर्जन भी आए हैं, जिनकी रेंज 45 किलोमीटर से लेकर 90 किलोमीटर तक बढ़ाई गई है. आगे भी इसकी रेंज और बढ़ाए जाने की योजना है.

पिनाका मल्टीबैरल रॉकेट लॉन्चर किसी भी मौसम में काम कर सकता है. इसका इस्तेमाल करके बहुत कम समय में टारगेट पर बड़े हमले किए जा सकते हैं. यह दुश्मन के बंकर, कमांड सेंटर और आर्टिलरी ठिकानों को निशाना बनाने के लिए तैयार किया गया है. इसकी खास 'शूट एंड स्कूट' क्षमता इसे और खतरनाक बनाती है. यानी हमला करने के बाद यह तुरंत अपनी लोकेशन बदल सकता है. इस रॉकेट लॉन्चर को फायर कंट्रोल कंप्यूटर (FCC) या लॉन्चर कंप्यूटर (LC) से जोड़कर मैन्युअल तरीके से संचालित किया जा सकता है.

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