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गुजरात में पुल से उतरते ही सामने दीवार, पुल बने डेढ़ साल हो गया, अब तक उद्घाटन नहीं हो पाया

Ahmedabad Bridge: अहमदाबाद में घुमा और शिलज को जोड़ने के लिए 80 करोड़ रुपये की लागत से एक ब्रिज बनाया गया था. जिसका अब तक उद्घाटन नहीं हुआ है.

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अहमदाबाद में बनाया गया ब्रिज, जो मुख्य सड़क से नहीं जुड़ा है (फोटो-इंडिया टुडे)

साल 2024 में गुजरात के अहमदाबाद में दो नगरों को जोड़ने के लिए एक पुल बनाया गया. पुल बनकर तैयार तो हो गया, लेकिन 2026 आने तक भी इस ब्रिज का उद्घाटन नहीं हो पाया. वजह है कि पुल पर उतरते समय आने वाली दीवार. दीवार तो है ही उसके आगे एग्रीकल्चर लैंड भी है. दरअसल, अहमदाबाद के बोपल में मौजूद घुमा और शिलज, दोनों को जोड़ने के लिए 80 करोड़ रुपये की लागत से एक ब्रिज बनाया गया. इसका निर्माण रेलवे लाइन के ऊपर किया गया था. मगर शिलज में पुल खत्म होते ही आगे एक दीवार आ जाती है और दीवार के पीछे खेती की जमीन.

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इंडिया टुडे से जुड़े पत्रकार अतुल तिवारी की रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2017 में अहमदाबाद अर्बन डेवलपमेंट अथॉरिटी (AUDA) और भारतीय रेलवे ने घुमा और शिलज को जोड़ने के लिए एक ब्रिज डिजाइन किया था. 2019 में इसके निर्माण पर काम शुरू हुआ और 2024 में यह बनकर तैयार भी हो गया. इसे बनाने की कुल लागत 80 करोड़ रुपये थी. मगर डेढ़ साल बाद तक भी ये ब्रिज यात्रियों के लिए शुरू नहीं हुआ है. क्योंकि जब कोई व्यक्ति घुमा से चढ़ता है, तो शिलज में उतरते हुए सामने एक दीवार मिलती है. 

ब्रिज का उद्घाटन तब होगा, जब 300 मीटर जमीन की खेती पर सड़क बनाई जाएगी. मुख्य सड़क को पुल से जोड़ा जाएगा और ये कब तक मुमकिन है, इसकी कोई जानकारी नहीं. ऐसे में सवाल उठा कि क्या डिजाइनर्स को पता नहीं था कि पुल खत्म होने के बाद सड़क नहीं है? क्यों इस परियोजना के लिए 80 करोड़ रुपये का खर्च किए गए, जिसका अब तक इनोग्रेशन तक नहीं हुआ है? इस सवाल के जवाब में AUDA के CEO डीबी देसाई ने बताया,

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“आमतौर पर विकास योजनाएं अगले 10-15 साल को ध्यान में रखकर बनाई जाती है. इस ब्रिज का डिजाइन भी भविष्य की जरूरतों को देखते हुए बनाया गया था.”

मगर पुल के उद्घाटन का इंतजार सिर्फ अधिकारी ही कर रहे हैं. लोगों ने आवाजाही के लिए इसका इस्तेमाल पहले ही शुरू कर दिया है. सीईओ देसाई ने बताया कि पुल के बाद एक कच्चा रास्ता है. जिस पर से आवाजाही चालू है. उन्होंने आगे कहा,

“हमारी परेशानी यह है कि ब्रिज के आगे की जगह एग्रीकल्चर जोन में शामिल है. हमारे पास उसका मालिकाना हक नहीं है. हमें सरकार की तरफ से एग्रीकल्चर लैंड में बदलाव करके टाउन प्लानिंग (TP) स्कीम से मंजूरी चाहिए. एक बार ये मिल जाए, तो सड़क बनाना आसान होगा.”

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सीईओ ने कहा कि हमारी कोशिश रहेगी कि एग्रीकल्चर लैंड में बदलाव होने के साथ ही दीवार हटाकर आगे सड़क बनाई जाए. ताकि शिलज के मुख्य मार्ग के साथ ब्रिज कनेक्ट हो सके. सरकार से नोटिफिकेशन कब तक मिलेगी, इस पर कुछ नहीं कहा जा सकता है.

पुल के अजीबोगरीब डिजाइन से जुड़ा ये कोई पहला मामला नहीं है. ठाणे में एक 4 लेन वाला ब्रिज बनाया गया, जो बीच में ही दो लेन का हो जाता है. भोपाल का 90 डिग्री मोड़ वाला पुल तो कैसे ही भूल सकते हैं. 

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