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जब पंचम दा ने कुमार सानू का गाना सुना, उन्हें गले लगाया और जी भर के गालियां दी

कुमार सानू ने बताया कि पंचम दा ने गालियां देने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी.

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1942: A Love Story आर डी बर्मन की आखिरी फिल्म थी.

Kumar Sanu ने अपने सिंगिंग करियर में 35 साल पूरे कर लिए हैं. उन्होंने नाइंटीज़ के हिंदी सिनेमा में यादगार गानों की झड़ी लगा दी थी. उनके क्लासिक गानों में से है – एक लड़की को देखा तो. 1994 में आई फिल्म 1942: A Love Story का गाना. कुमार सानू ने हाल ही में इंडियन एक्सप्रेस से बात की. जहां उन्होंने अपने इस पॉपुलर गाने से जुड़ा एक किस्सा भी साझा किया. उन्होंने ये गाना रिकॉर्ड किया. सब कुछ सही हो गया. फिर म्यूज़िक बनाने वाले आर डी बर्मन उनके पास आए. गले लगाया और जी भर के गालियां देने लगे. 

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जावेद अख्तर के लिखे गाने ‘एक लड़की तो’ में कई जगह जैसे शब्द का इस्तेमाल हुआ है. जैसे सुबह का रूप, जैसे सर्दी की धूप. पंचम दा (आर डी बर्मन) चाहते थे कि कुमार हर बार जैसे को अलग तरह से गाएं. उन्होंने इस बारे में आगे बताया,

पंचम दा सिंगिंग रूम में आए और मुझसे कहा, ‘देखो इस गाने में बहुत सारे ‘जैसे’ हैं. जैसे खिलता गुलाब, जैसे शायर का ख्वाब, जैसे उजली किरण, जैसे वन में हिरण’. एक मुखड़े में ही कई सारे ‘जैसे’ थे. उन्होंने मुझसे कहा, ‘सानू, मैं चाहता हूं कि तुम हर ‘जैसे’ को अलग ढंग से गाओ. वो बिल्कुल भी एक जैसे नहीं लगने चाहिए’. उन्होंने कहा कि अगर तुम हर ‘जैसे’ को अलग गा पाते हो, तो ये गाना हिट है.               

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कुमार सानू ने आगे बताया कि उन्होंने पंचम दा की बात मानी. हर ‘जैसे’ को अलग तरह से गाया और गाना हिट हो गया. वो बताते हैं कि गाना रिकॉर्ड होने के बाद आर डी बर्मन उनके पास आए. उन्हें गले लगाया. माथा चूमा. और गालियां देने लगे. कुमार के मुताबिक अगर पंचम दा को गाना पसंद आता. रिकॉर्डिंग उनके मनमुताबिक हो जाती तो वो खूब गालियां देते. मां, पिता सभी की गालियां. कुमार को उस वक्त समझ नहीं आया कि उन्हें गालियां क्यों दी जा रही हैं. फिर बाद में किसी ने बताया कि पंचम दा ऐसे ही हैं. 

कुमार सानू ने ‘एक लड़की को’ के अलावा इस फिल्म के ‘कुछ ना कहो’, ‘रिमझिम रिमझिम’ और ‘रूठ ना जाना’ जैसे गानों को भी अपनी आवाज़ दी. 

# जब विधु विनोद चोपड़ा ने पंचम दा को मुंह पर कहा - “ये गाना कूड़ा है”

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1942: A Love Story के लिए विधु विनोद चोपड़ा आर डी बर्मन से म्यूज़िक बनवाना चाहते थे. विधु ने बताया कि वो ‘कुछ ना कहो’ गाने के लीरिक्स लेकर पंचम दा के पास गए. उनसे धुन बनाने को कहा. ये वो दौर था जब धूम धड़ाका टाइप गानें चार्टबस्टर बना करते थे. पंचम ने ‘कुछ ना कहो’ के लीरिक्स को ऐसी ही धुन में लपेटकर सुनाया. विधु निराश हुए. मतलब बहुत ज़्यादा निराश. उन्होंने ये बोलने में कोई झिझक नहीं दिखाई कि ये बहुत खराब धुन है. वो भी पंचम दा के सामने ही. 

विधु ने अपनी बात खत्म की और उधर पंचम दा की आंखें डबडबा गई. उस स्टूडियो में पंचम दा के पिता एस डी बर्मन की एक बड़ी सी तस्वीर लगी थी. विधु ने उस तस्वीर की तरफ इशारा किया और पंचम से कहा, ‘मुझे वो चाहिए’. आर डी बर्मन ने एक हफ्ता मांगा. विधु को कोई आपत्ति नहीं थी. हफ्ता बीत जाने के बाद वो नई धुन के साथ विधु के पास आए. ये वही धुन है जिससे आज हम सभी ‘कुछ ना कहो’ गाने को जानते हैं.  

वीडियो: कुमार सानू ने 90s के हिंदी गानों और नए बॉलीवुड म्यूजिक पर खुलकर बात की

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