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वश 2 - मूवी रिव्यू

साल 2023 में गुजराती हॉरर फिल्म ‘वश’ रिलीज़ हुई. इसे हिन्दी में ‘शैतान’ के टाइटल से बनाया गया. अब ‘वश’ का सीक्वल ‘वश विवश लेवल 2’ आया है. कैसा है सीक्वल, जानने के लिए रिव्यू पढ़िए.

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साल 2023 में आई 'वश' ने नैशनल अवॉर्ड भी जीता था.

Vash Vivash Level 2 (2025)

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Director: Krishnadev Yagnik

Cast: Hitu Kanodia, Janki Bodiwala, Hiten Kumaar, Monal Gajjar

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Rating: 4 Stars

 

INT. Movie Theatre – Daytime

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सिनेमाघर में घनघोर अंधेरा है. पसरा हुआ सन्नाटा. लोग अपने आपको किसी जकड़न में महसूस कर रहे हैं. मेरे दाहिने तरफ आर्म स्टैंड में रखे फोन की रोशनी चमकती है. शायद कोई नोटीफिकेशन आई. मगर कोई मतलब नहीं. बाईं तरफ बैठे दो दोस्त शायद जीवनभर की तमाम बातें सिनेमाघर में ही निपटा लेना चाहते हैं. मगर उन पर चिड़ना व्यर्थ लगता है. आपकी आंखें एकटक बस परदे पर जमी हुई हैं. आपको पता चलने से पहले ही एंड्रयू सैमुअल का बैकग्राउंड म्यूज़िक किसी पाश में कैद कर चुका है. परदे पर एक स्कूल की बच्ची किसी ज़मीन पर पड़ी लाश का सिर पत्थर से फोड़ रही है. कुछ क्षण पहले तक उस आदमी के शरीर में प्राण थे. आपने पत्थर की उस हर एक चोट को महसूस किया. म्यूज़िक का टेम्पो बढ़ा. उंगली के एक सिरे से दौड़ती हुई सेन्सेशन पूरे हाथ में महसूस हुई. गले में एक चीख फंस गई हो मानो. कृष्णदेव याग्निक के निर्देशन में बनी ‘वश विवश लेवल 2’ देखते हुए मुझे कई मौकों पर ऐसा ही महसूस हुआ.

Exit

ये गुजराती फिल्म साल 2023 में आई ‘वश’ का ही सीक्वल है. अजय देवगन, आर. माधवन और ज्योतिका की फिल्म ‘शैतान’, ‘वश’ का ही हिंदी रीमेक था. ‘वश 2’ केवल पिछली फिल्म की कामयाबी को भुनाने के मकसद से बनाई गई फिल्म नहीं लगती. यहां मेकर्स के पास कहने को बहुत कुछ था, और वो उन्होंने पूरे इम्पैक्ट के साथ कहा भी है. ये कहना गलत नहीं होगा कि लंबे समय के बाद एक कायदे की हॉरर फिल्म आई है. एक ऐसी फिल्म जो बस आपको डराकर घर भेजने में इच्छुक नहीं है, बल्कि एक मैसेज भी रखती है. ‘वश 2’ की मैसेजिंग की सबसे मज़बूत बात ये थी कि वो थोपा हुआ नहीं लगता. एक पॉइंट पर अथर्व, विलेन से पूछता है कि तुम ये सब क्यों कर रहे हो. इस पर विलेन दुत्कारते हुए जवाब देता है, “स्त्री शक्ति सबसे महान नहीं. पुरुष और पुरुषार्थ ही ब्रह्म है”.

vash 2 movie review
डायरेक्टर कृष्णदेव याग्निक ने जिस तरह चाइल्ड एक्टर्स से काम करवाया है, वो तारीफ के काबिल है.  

अगर वो किरदार ऐसा नहीं भी कहता तो भी फिल्म की मैसेजिंग साफ ही थी. दोनों ही फिल्मों में लड़कियों को सम्मोहित किया गया. उनके ज़रिए विलेन अपनी तंत्र साधना पूरी करना चाहते थे. लेकिन वहां तक पहुंचने के दौरान वो इन लड़कियों का जीवन नर्क कर देते हैं. उन्हें सिर्फ शारीरिक प्रताड़ना ही नहीं देते. बल्कि लगातार उनके आत्म-सम्मान को चोट पहुंचाते हैं. ये दर्शाते हैं कि तुम हमारे बराबर नहीं, हमसे कमतर ही हो. हम तुम्हें अपने हाथ की किसी कठपुतली की तरह इस्तेमाल करेंगे.

‘वश’ में प्रताप, आर्या नाम की लड़की को अपने वश में कर लेता है. ‘वश 2’ की कहानी उस घटना के 12 साल बाद खुलती है. एक नामी गर्ल्स स्कूल की सभी लड़कियों को सम्मोहित कर लिया गया है. कोई ऐसा क्यों कर रहा है, अपने मकसद के लिए वो उनसे क्या बर्बरता करवाता है, यही आगे की कहानी है. फिल्म में ऐसे कई सीन हैं जो आपको बहुत असहज महसूस करवाते हैं. जैसे एक सीन में अथर्व, विलेन से बात कर रहा है. उनके आसपास सम्मोहित हुई स्कूल की लड़कियां हैं. उनमें से एक को छींक आ जाती है. इतने में गुस्साया विलेन उससे सांस रोकने को कहता है. वो लड़की अपनी मर्ज़ी के खिलाफ ऐसा करने को मजबूर है. इस शॉट में कैमरा का फोकस अथर्व और विलेन पर है, और बैकग्राउंड में वो लड़की सांस की कमी से तड़प रही है. वो लड़की पूरी तरह फोकस से बाहर है. उसके बावजूद आपको गुस्सा आने लगता है, आप अपनी कुर्सी पर बैठे हुए असहज हो रहे हैं. ऐसी पकड़ बनाए रखती है ये फिल्म.

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‘वश 2’ भी पिछली फिल्म जितनी ही ग्रिपिंग है. 

जानकी बोदीवाला, हितू कनोडिया, हितेन कुमार और मोनल गज्जर अहम रोल्स में हैं. सभी ने बहुत उम्दा काम किया है. उनके काम के ज़रिए आप लगातार उस टेंशन को महसूस करते रहते हैं. इनके अलावा डायरेक्टर कृष्णदेव याग्निक की भी तारीफ होनी चाहिए. उन्होंने सभी चाइल्ड एक्टर्स से सही मात्रा में इमोशन निकलवाए हैं. यहां बहुत स्कोप था कि गलत एक्टिंग से वीभत्स लगने वाले सीन मज़ाकिया बन सकते थे. लेकिन एक पॉइंट पर भी ऐसा नहीं होता. कृष्णदेव याग्निक ने जो लिखा और डायरेक्ट किया, उसे एक्टर्स ने पूरी तरह से ट्रांसलेट किया है. ‘वश 2’ का थ्रिल एलिमेंट आपको लगातार एक्साइटेड रखता है. बस अंत में आकर क्लाइमैक्स को जल्दबाज़ी में समेत दिया गया. वो थोड़ा अखरता है.

बाकी बहुत लंबे समय बाद किसी फिल्म को देखते हुए मुझे समय का आभास नहीं रहा. फोन चेक करने की ज़रूरत महसूस नहीं हुई. बस ये चिंता थी कि ये लड़कियां सुरक्षित बच जाएं, अब आगे क्या होगा. यही इस फिल्म का हासिल है.

वीडियो: मूवी रिव्यू - कैसी है अजय देवगन, ज्योतिका और आर माधवन की फ़िल्म शैतान?

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