सफेद चादर पसरी हुई है. बर्फ की चादर. फ्रेम में कुछ पेंगुइनों का झुंड दिखता है. दो पेंगुइन उनसे थोड़ा पीछे चल रहे हैं. उन दोनों में से एक अचानक ही दूसरी दिशा में चलने लगता है. वो अपने झुंड, परिवार, सुरक्षा और खाने से दूर विपरीत दिशा में चला जा रहा है. उसकी आंखों के सामने 70 किलोमीटर लंबा रास्ता है. फिर बड़े, नुकीले और बर्फीले पहाड़ शुरू हो जाएंगे. वहां उसका बचना लगभग नामुमकिन है. ये पेंगुइन आगे बढ़ते हुए बीच में एक पल के लिए रुकता है. पीछे मुड़ता है. आप सोचते हैं कि ये वापस अपने झुंड से जा मिलेगा. मगर ऐसा नहीं होता. वो अनंत सफेद खालीपन की ओर चलता चला जाता है. पीछे से आवाज़ सुनाई पड़ती है कि वो अपनी निश्चित मृत्यु की ओर बढ़ता चला जाता है.
निहिलिस्ट पेंगुइन देख रो दिए? ये 8 फिल्में आपके दिल को झिंझोड़ के रख देंगी
इंटरनेशनल सिनेमा की ये दमदार फिल्में आपको सोचने पर मजबूर कर देंगी.


बीते कुछ दिनों से ये क्लिप इंटरनेट पर भयंकर वायरल हो रही है. ये क्लिप जर्मन फिल्ममेकर Werner Herzog की डाक्यूमेंट्री Encounters at the End of the World से ली गई है. इस क्लिप को Nihilist Penguin के नाम से शेयर किया जा रहा है. लोग इससे रीलेट कर रहे हैं. इसे देखकर इमोशनल हो रहे हैं. इस क्लिप के असर को समझने से पहले थोड़ा ब्रीफ में निहिलिज़्म को समझ लेते हैं. अगर कोई इंसान निहिलिस्ट है तो वो मानता है कि इस जीवन का अपने आप में कोई अर्थ नहीं है. इस दुनिया में हम किसी मकसद से आए हैं जैसी बातें उसे निरर्थक लगती हैं. वो नैतिकता, सामाजिक मूल्यों जैसी बातों को पाखंड समझता है. दुनिया के बने-बनाए ढर्रे से अलग अपने रास्ते चलने की कोशिश करता है. निहिलिज़्म का जन्म सामाजिक ढांचे से पैदा हुई निराशा, उसके प्रतीक एक किस्म की कटुता से होता है. यही वजह है कि लोग पेंगुइन की इस क्लिप को इतना देख रहे हैं. वो उसे एक प्रतीक की तरह देख रहे हैं कि एक जीव बने-बनाए सिस्टम से हताश होकर अपने अंत की तरफ बढ़ चला.
सिनेमा में भी समय-समय पर निहिलिज़्म को जगह मिलती रही है. हम ऐसे किरदारों से मिले हैं जो अपनी बसी-बसाई दुनिया छोड़कर खुद की खोज में निकल गए. अपने मायने खुद बनाने निकले. किसी का अंत सुखद रहा तो कोई उस पेंगुइन की तरह सफेद हवा में गायब हो गया. कुछ ऐसी ही फिल्मों के बारे में बताएंगे जिन्हें देखकर आपको यही फ़ील आएगी.
#1. इन्टू दी वाइल्ड
शॉन पेन के निर्देशन में बनी ये फिल्म Christopher McCandless के जीवन पर आधारित थी. क्रिस्टोफर एक आम अमेरिकी परिवार में पले-बड़े थे. उम्र बढ़ी, चार किताबें पढ़ीं और जब वो किताबें समझ आने लगीं तो अपने आसपास का पाखंड साफ दिखने लगा. क्रिस्टोफर ने अपनी गाड़ी छोड़ दी, जेब में जो पैसे थे उन्हें जला दिया. और जंगल के रास्ते अपनी डगर बनाने निकल पड़े. क्रिस्टोफर की कहानी का अंत बहुत ट्रैजिक था. मगर उस सफर में वो किन लोगों से मिलते हैं, उनकी ज़िंदगी को कैसे छूते हैं, अपने सच की खोज में कहां पहुंचते हैं, इन्हीं पहलुओं की वजह से इस फिल्म की एक कल्ट फॉलोइंग बनी.
#2. दी सीक्रेट लाइफ ऑफ वॉल्टर मिटी

वॉल्टर कई सालों से रूटीन लाइफ जी रहा है. ऑफिस जाता है. अपना काम निपटाता है. खाना खाकर सो जाता है. जीवन में कोई रस नहीं है. फिर उसे एक मौका मिलता है. जिस नौकरी में खुद को इतने साल घिसा, उसे बचाने के लिए अनजान रास्तों पर निकलना पड़ता है. ज़िंदगी को edge पर जीने का समय आता है. इसी दौरान वॉल्टर समझता है कि ज़िंदगी का अपना कोई अर्थ नहीं, इसलिए वो खुद अपनी ज़िंदगी को मायने देगा. फिल्म का अंत ऐसा है कि दिल में एक खुशी पैदा होती है.
#3. दी ट्रूमन शो
एक आदमी है जिसके पूरे जीवन को रियलिटी शो बना दिया गया है. वो किन पड़ोसियों से मिलकर हाई-हैलो करता है. किस लड़की के प्रेम में पड़ता है. सब कुछ स्क्रिप्टेड है. सब एक धागे से बंधा है जिसका दूसरा छोर दुनियाभर की ऑडियंस के पास है. लेकिन उस आदमी का भ्रम टूटता है. वो इस धागे को तोड़ता है. अब तक उसने इसी दुनिया और इसके निवासियों को जाना है. लेकिन अब वो बाहर निकलेगा, खुद को खोजेगा, अपनी कहानी का सूत्रधार खुद बनेगा. 'दी ट्रूमन शो' ऐसी फिल्म है जो कई पहलुओं पर आपको सोचने पर मजबूर करेगी.
#4. दी पैसेंजर
महान इटालियन डायरेक्टर Michaelangelo Antonioni की फिल्म. लीड रोल में जैक निकल्सन हैं. वही जैक निकल्सन जिनका A Few Good Men से 'You can't handle the truth' वाला मोनोलॉग वायरल होता है. केके मेनन ने 'शौर्य' में जैक निकल्सन वाला रोल ही किया था. खैर 'दी पैसेंजर' में जैक ने एक जर्नलिस्ट का रोल किया जो अपनी पहचान, अपने काम से झुंझला चुका है. वो खुद को बदलता है. एक मृत शख्स की पहचान को अपना लेता है. एडवेंचर जैसे दिखने वाले इस फैसले की उसे क्या कीमत चुकानी पड़ती है, यही फिल्म की कहानी है.
#5. दी समिट ऑफ दी गॉड्स
एक जापानी फोटो-रिपोर्टर अपनी नई स्टोरी की तलाश में है. उसकी ये तलाश एक कैमरा पर आकर रुकती है. पता चलता है कि ये कैमरा एक पर्वतारोही का है जो 1924 में माउंट एवरेस्ट की चढ़ाई के दौरान लापता हो गया था. अब उसके सामने एक सवाल है, कि क्या वो पर्वतारोही माउंट एवरेस्ट पर चढ़ाई करने वाला पहला शख्स था. वो इस सवाल को लेकर अपनी खोज शुरू करता है. लेकिन धीरे-धीरे उसकी ये खोज ऐसे सवालों के जवाब सामने ले आती है जिनके लिए वो तैयार नहीं था. इस फ्रेंच एनीमेटिड फिल्म को आप नेटफ्लिक्स पर देख सकते हैं.
#6. कैप्टन फैन्टास्टिक
बेन और लेस्ली ऐसे लोग हैं जिन्हें अमेरिकन ड्रीम नाम के कीड़े ने काटा. वो उसके असर में भी रहे. पर एक दिन उनकी आंख खुली. भ्रम टूटा और वो सब कुछ छोड़कर, परिवार सहित जंगल की ओर चले गए. दोनों ने तय किया कि अपने बच्चों को एक निर्धारित सिस्टम के हिसाब से नहीं पालेंगे. उन्हें ऐसी स्किल सिखाएंगे जो वाकई उनके काम आएं, उन्हें अपने तरीके से बड़ा करेंगे. सब कुछ अच्छा चल रहा होता है लेकिन एक रोज़ लेस्ली इस दुनिया से चली जाती है. अब बेन के सामने मुश्किल चुनाव है. उसे अपने बच्चों को वास्तविक दुनिया में लेकर जाना है. इस वजह से परिवार पर क्या असर पड़ता है, उनकी एक-दूसरे की समझ कैसे बदलती है, आगे यही देखने को मिलता है.
#7. पेरिस, टेक्सस
नए सिनेप्रेमी Wim Wenders को Perfect Days से पहचानते हैं. लेकिन OG सिनेफाइल उन्हें 'पेरिस, टेक्सस' से याद रखते हैं. फिल्म का दो लाइन का प्लॉट ये है कि एक आदमी रेगिस्तान में भटक रहा है. उसे अपनी कोई होश-खबर नहीं है. उसका भाई उसे ढूंढता हुआ आता है. उसे याद दिलाता है कि कैसे आज से चार साल पहले वो अपना सब कुछ छोड़कर चला गया था. उस आदमी ने एक रोज़ उठकर ऐसा क्यों किया, उसके दिमाग में क्या कश्मकश चल रही थी, 'पेरिस टेक्सस' उसे ही एक्सप्लोर करने की कोशिश करती है.
#8. लकी
लकी अपनी ज़िंदगी की 90 वसंत, 90 सर्दियां देख चुका है. जिन दोस्तों के साथ बड़ा हुआ, उन्हें दफन होते हुए देख चुका है. लकी अपने जीवन के ऐसे पड़ाव पर है जहां उसे ईश्वर का भय नहीं, न ही उससे कोई प्रेम है. लकी को महसूस होता है कि उसने सब कुछ जान लिया, सबको जान लिया, बस एक मलाल है. खुद को जानने, समझने की तलाश कभी शुरू ही नहीं हुई. अब वो यही करने निकलता है.
वीडियो: आपकी फीड पर भी दिखा है ये पेंगुइन? जानिए इसके पीछे की कहानी

















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